चिंताजनकः स्क्रीनिंग में हर पांचवां मरीज मुख कैंसर से पीड़ित, समय पर मिले इलाज तो हो सकते हैं ठीक, जानें लक्षण
फिरोजाबाद में ओरल कैंसर के स्क्रीनिंग की ओपीडी में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यहां स्क्रीनिंग के दौरान हर पांचवा मरीज मुख के कैंसर से पीड़ित मिला है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यदि पहले चरण में ही व्यक्ति को इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में स्वशासीय मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग में ओरल कैंसर स्क्रीनिंग को एक साल पूरा हो गया है। यहां स्क्रीनिंग के दौरान हर पांचवा व्यक्ति मुख कैंसर से पीड़ित मिला है। इसे लेकर डॉक्टर लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
लोग आखिरी स्टेज में शुरू करते हैं इलाज
मेडिकल कॉलेज में चार फरवरी 2022 को दंत रोग विभाग में ओरल कैंसर के स्क्रीनिंग की ओपीडी की शुरुआत हुई थी। यहां एक साल में 4800 लोग मुख कैंसर से मिलते, जुलते लक्षण को देखकर जांच कराने पहुंचे। इसमें 960 मरीज ऐसे मिले, जिन्हें या तो मुख कैंसर हो गया या फिर प्री-कैंसर की स्टेज पर है। समय से इलाज मिलने के कारण कई मरीज ठीक भी हो गए।
डॉक्टरों की मानें तो यदि कैंसर को शुरुआती स्टेज में पहचान लिया जाए और इसका इलाज शुरू कर दिया जाए, तो किसी की भी जान बच सकती है। लेकिन, अक्सर लोग कैंसर के आखिरी स्टेज में इलाज शुरू करते हैं। इस कारण उनकी जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
प्री-कैंसर में मिल जाए इलाज तो ठीक होने की संभावना अधिक
मेडिकल कॉलेज में प्री-ओरल कैंसर से पीड़ित मरीजों के इलाज की शुरुआत हुई है। अगर किसी में प्री-कैंसर के लक्षण पता चल जाते हैं तो उसको नियंत्रित किया जा सकता है। ये बीमारी इतनी खतरनाक है कि मरीज का मुंह, गला, जीभ, मसूडे आदि बुरी तरह से प्रभावित हो जाते हैं।
दंत रोग एवं ओरल कैंसर की विभागाध्यक्ष डॉ. किरन कुमारी ने बताया कि जिले में तंबाकू, खैनी, सिगरेट का सेवन अधिक प्रचलन है। ऐसे में ओरल कैंसर की ओपीडी की शुरुआत की गई। एक साल में 960 मरीज ओरल कैंसर से पीड़ित मिले हैं। प्री-कैंसर में इलाज मिल जाए तो ठीक होने की संभावना अधिक होती है। अन्यथा यह रोग जानलेवा भी हुआ है।
यह हैं मुख कैंसर के लक्षण
- मुंह का कम खुलना
- मुंह के किसी भी हिस्से में सफेद व लाल धब्बे पड़ना
- मुंह में छाले होना, दवाइयों से ठीक न होना
- मुंह के अंदर गांठ जैसा अनुभव होना
- मुंह के किसी हिस्से में बदबू आना