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पेड-पौधों के संरक्षण को पर्यावरण प्रेमी करेंगे ठोस पहल
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फिरोजाबाद। औद्योगिक नगरी में पर्यावरण संरक्षण के लिए समय-समय पर रोपे जाने वाले पेड़-पौधों की उचित देखभाल एवं नियमित संरक्षण की आवश्यकता है। अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर पर्यावरण प्रेमी रक्षाबंधन पर शहर के प्राचीन पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधेंगे। उनकी नियमित देखभाल का संकल्प लेंगे।
ताजसंरक्षित जोन में शामिल फिरोजाबाद की हवा में कार्बनिक तत्वों के अलावा धूल के कणों की मात्रा सामान्य से अधिक है। यहां की आवोहवा पर एनजीटी की भी पैनी नजर है। टीटीजेड में पेड़-पौधों के कटान पर पूरी तरह से रोक लगी है। पूर्ववर्ती पांच वर्षों में रोपे गए पेड़-पौधों के संरक्षण एवं घरों व खाली जगहों पर किचिन गार्डन अथवा पुष्प वाटिका बनाए जाने के साथ ही हरे पेड़ कटान को आमजन व समाजसेवी संगठन भी जागरूक हैं। आगामी रक्षाबंधन के दौरान समाजसेवी संगठन एवं पर्यावरण प्रेमियों ने अमर उजाला फाउंडेशन की मुहिम से जुड़ने के साथ ही पेड़ों के रखरखाव का संकल्प व्यक्त किया है।
पर्यावरण के दृष्टिकोण से औद्योगिक नगरी में वर्ष 2017 से लेकर 2021 के तक करीब 85 लाख पौधों का रोपण हुआ। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक देखभाल का अभाव। जानवरों द्वारा अथवा मौसम की मार के कारण पांच वर्ष के अंतराल में करीब 12 लाख पौधे नष्ट हो गए।
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परिवार की तरह से पेड़-पौधे भी हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं। परिजनों से हमें आत्मीयता व पेड़-पौधों से जीवन दायनी ऑक्सीजन व अन्य पर्यावरणीय लाभ मिलते हैं। रक्षाबंधन पर हम अपनी बहन-बेटियों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। उसी तरह से हमें पेड़-पौधों की देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए।
कल्पना राजौरिया, शिक्षिका एवं पर्यावरण संरक्षक
हम कई वर्षों से सार्वजनिक स्थलों जाकर पेड़-पौधों पर रिबन अथवा रक्षासूत्र बांधते हैं। आने वाली पीढ़ी के लिए स्वच्छ पर्यावरणीय माहौल देने को पेड़-पौधों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
नीतेश अग्रवाल जैन, जनकल्याण सर्व समाज सेवा समिति
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ताजसंरक्षित जोन में शामिल फिरोजाबाद की हवा में कार्बनिक तत्वों के अलावा धूल के कणों की मात्रा सामान्य से अधिक है। यहां की आवोहवा पर एनजीटी की भी पैनी नजर है। टीटीजेड में पेड़-पौधों के कटान पर पूरी तरह से रोक लगी है। पूर्ववर्ती पांच वर्षों में रोपे गए पेड़-पौधों के संरक्षण एवं घरों व खाली जगहों पर किचिन गार्डन अथवा पुष्प वाटिका बनाए जाने के साथ ही हरे पेड़ कटान को आमजन व समाजसेवी संगठन भी जागरूक हैं। आगामी रक्षाबंधन के दौरान समाजसेवी संगठन एवं पर्यावरण प्रेमियों ने अमर उजाला फाउंडेशन की मुहिम से जुड़ने के साथ ही पेड़ों के रखरखाव का संकल्प व्यक्त किया है।
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पर्यावरण के दृष्टिकोण से औद्योगिक नगरी में वर्ष 2017 से लेकर 2021 के तक करीब 85 लाख पौधों का रोपण हुआ। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक देखभाल का अभाव। जानवरों द्वारा अथवा मौसम की मार के कारण पांच वर्ष के अंतराल में करीब 12 लाख पौधे नष्ट हो गए।
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परिवार की तरह से पेड़-पौधे भी हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं। परिजनों से हमें आत्मीयता व पेड़-पौधों से जीवन दायनी ऑक्सीजन व अन्य पर्यावरणीय लाभ मिलते हैं। रक्षाबंधन पर हम अपनी बहन-बेटियों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। उसी तरह से हमें पेड़-पौधों की देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए।
कल्पना राजौरिया, शिक्षिका एवं पर्यावरण संरक्षक
हम कई वर्षों से सार्वजनिक स्थलों जाकर पेड़-पौधों पर रिबन अथवा रक्षासूत्र बांधते हैं। आने वाली पीढ़ी के लिए स्वच्छ पर्यावरणीय माहौल देने को पेड़-पौधों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
नीतेश अग्रवाल जैन, जनकल्याण सर्व समाज सेवा समिति