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मालगाड़ी डिरेल, पांच घंटे बाधित रहा रेलमार्ग

Fri, 13 Mar 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Fri, 13 Mar 2015 11:05 PM IST
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derailed frieght compartment,  five hours interrupted Railroad
स्थानीय रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह शंटिंग कर रही मालगाड़ी डाउन की मुख्य लाइन में डि-रेल हो गई। इस मालगाड़ी में चावल की रैक लदी थी और दो डिब्बे रेल ट्रैक को ध्वस्त करते हुए जमीन में धंस गए। इससे नई दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग ठप हो गया। टूंडला से पहुंची दुर्घटना राहत ट्रेन ने करीब साढे़ पांच घंटे की मशक्कत के बाद उतरे डिब्बों को पटरी पर चढ़ाया, तब जाकर इस लाइन पर यातायात सुचारु हुआ। इस दौरान शताब्दी एक्सप्रेस सहित करीब एक दर्जन ट्रेनें प्रभावित रहीं।
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शुक्रवार सुबह 9.05 बजे  रेलवे स्टेशन पर पहुंची फीरोजाबाद स्पेशल मालगाड़ी को माल गोदाम की ओर ले जाया जा रहा था। मालगाड़ी को लूप लाइन में ले जाने के लिए मुख्य लाइन पर बैक कराने के दौरान दो डिब्बे पटरी से उतर गए। इसकी जानकारी नियंत्रण कक्ष को दी गई। आनन-फानन में शताब्दी सहित अप व डाउन की सभी ट्रेनों को पिछले स्टेशनों पर रोकने के आदेश दिए गए। साथ ही टूंडला से दुर्घटना राहत ट्रेन को रवाना किया गया। एईएन एसके संत सहित टूंडला और फीरोजाबाद के रेल अधिकारी मौके पर पहुंच गए। दोपहर करीब 2.30 बजे डाउन रेलमार्ग सुचारु किया जा सका। इस दौरान ट्रेनों और स्टेशन पर बैठे रेल यात्री परेशान रहे।
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अप लाइन से गुजारी गईं डाउन की सभी ट्रेनें
डाउन लाइन बाधित हो जाने के बाद  इस लाइन पर खड़ी शताब्दी एक्सप्रेस सहित सभी ट्रेनों को अप लाइन से गुजारा गया। एक ही लाइन से अप और डाउन की ट्रेनों को गुजारने से दोनों ओर ट्रेनें प्रभावित हुई और अप लाइन पर चल रहीं ट्रेनें भी लेट हो गईं। जो ट्रेनें प्रभावित हुई हैं, उनमें नईदिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस, मूरी एक्सप्रेस, नीलांचल एक्सप्रेस, जियारत एक्सप्रेस, कालका मेल, महानंदा एक्सप्रेस, नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस, भुवनेश्वर-नई दिल्ली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस आदि शामिल हैं। वहीं अप लाइन की अनन्या एक्सप्रेस, गोमती एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस आदि।
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 - फीरोजाबाद ट्रेन दुर्घटना मानवीय भूल के चलते हुई है। ट्रेन के थोड़ा सा पीछे जाने पर सुरक्षा के लिए बनाए जाने वाले कांटा प्वाइंट पर जाकर ट्रेन गिरी है। शंटिंग के दौरान पीछे भी किसी कर्मचारी हो होना चाहिए था। फिलहाल घटना की जूनियर स्केल पर जांच कराई जा रही है। एओएम, एडीएसओ और एएमई घटना जांच करेंगे।
                                                  नवीन बाबू
                                                  सीपीआरओ, उमरे इलहाबाद
..आखिर किसकी गलती से हुई दुर्घटना।़
शंटिंग के दौरान जिस तरह से ट्रेन पटरी से उतरी है। इसके  लिए प्रथम दृष्टया दोषी रेल चालक को माना जा रहा है। वहीं तकनीकी आधार पर एएसएम एवं शंटमैन को भी दोषी माने जा रहे हैं। दुर्घटना का दोषी कौन है? यह जांच के बाद पता चलेगा। फिलहाल शंटमैन, एएसएम और रेल चालक पर कार्रवाई की तलवार लटकी है।

कमजोर ट्रैक पर हाई स्पीड ट्रेन का सपना
ट्रेन आने से पूर्व नहीं किया जाता ट्रैक को चैक
ट्रैक पर जमी है घास और मिट्टी
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। ट्रेन यात्रियों को बेहतर सुविधा और रेलवे को हाईटेक बनाने के लिए मोदी सरकार की पहल कमजोर ट्रैक पर पूरी होते दिखना सपना जैसा है। जिले में लगातार होते हादसे रेल विभाग की नाकामी को दर्शाते हैं। यही हाल रहा तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय रेलवे स्टेशन पर ट्रैक की बात की जाए तो स्थिति काफी खराब नजर आती है। अप और डाउन की मैन लाइन की बात छोड़ दें तो लूप लाइन के साथ अन्य लाइनों का हाल इतना खराब है कि कब हादसा हो जाए कहा नहीं जा सकता। वहीं दूसरी ओर स्टेशन से माल गोदाम की ओर जाने वाले ट्रैक पर सफाई व्यवस्था के लिए शायद ही विभागीय अधिकारियों ने कभी सुध ली हौ। ट्रैक पर घास है तो कहीं मिट्टी जमी दिखती है। वर्ष 2014 में भी मालगाड़ी पटरी से उतरी थी। गुरुवार सुबह शिकोहाबाद स्टेशन के समीप रांची-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के इंजन की कपलिंग टूट गई। डिब्बों को छोड़ इंजन काफी आगे तक दौड़ता चला गया था। गनीमत रही कि गंभीर हादसा नहीं हुआ। बसंत और शरद के दिनों में विभागीय अनदेखी के कारण इस तरह के हादसे ट्रेन पर आए दिन हो रहे हैं तो गर्मियों के दिनों में क्या स्थिति होगी कहा नहीं जा सकता। गर्मी के दिनों में ट्रैक पर सबसे अधिक फैक्चर होते हैं। ऐसे में ट्रेनों के पलटने का खतरा भी बना रहता है।


नहीं होता ट्रैक चैक
जब भी कोई गाड़ी माल गोदाम वाले ट्रैक पर जाती है, तो उससे पूर्व विभागीय अधिकारियों द्वारा ट्रैक की स्थिति को चैक नहीं किया जाता कि बोगियों में लदे माल का वजन ट्रैक झेल लेगा अथवा नहीं।
  
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