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यूं ही अपराजिता नहीं हैं आशा, खतरा मोल लेकर ड्यूटी निभा रहीं
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अनीता, आशा संगनी
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। नारी को यूं ही अपराजिता नहीं कहा है। क्योंकि हर संघर्ष से जूझने को तैयार रहती है। कोरोना योद्धा के रूप में आशा कार्यकर्ता एवं संगनी जुटी हैं। लोग घरों से निकलने में डर रहे हैं, किंतु आशा कार्यकर्ता घर-घर दस्तक दे रही हैं। विशेषकर उन लोगों के घर जा रही हैं, जिनमें संक्रमण की आशंका है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भले ही सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं कराई है। किंतु यह फिर भी कार्य पर डटी हुई हैं।
बिना आशा कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं अधूरी रहती हैं। आम दिनों में गर्भवती के साथ नवजात शिशुओं की देखभाल करती हैं। किंतु आशाएं खतरा मोल लेकर कोरोना मुक्त जनपद बनाने के लिए दिन रात एक किए हैं। आशा कार्यकर्ता क्वारंटीन किए प्रवासी मजदूरों के घर पर जा रहीं हैं। उन्हें कोरोना के लक्षण बता रही हैं। यही कारण है कि प्रवासी मजदूर जांच कराने आ रहे हैं और कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए हैं। जनपद में 1559 आशाएं हैं।
कोरोना से लोग डर रहे हैं। उसी दौर में हम अपनी और परिवार की परवाह किए बगैर ड्यूटी निभा रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोगों से मिलना होता है। जिनमें कोरोना का खतरा है, उनसे ही मिलना हो रहा है। जो लोग पॉजिटिव पाए हैं, उनके घर बोर्ड लगाने जाते हैं। सरकार को भी अब हमारी तरफ ध्यान देना चाहिए।
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संतोष देवी, आशा कार्यकर्ता
महिला होते हुए भी हम तो ड्यूटी कर रहे हैं। पहले घर के काम करते हैं, फिर क्षेत्र में निकल जाते हैं। एक तरफ कोरोना है तो दूसरी ओर भीषण गर्मी है। किंतु हम बिना परवाह किए सेवा में जुटे हैं। मकसद है कि देश से कोरोना को भगाना। इसके चलते अब सरकार को भी हमारी परहवा करनी चाहिए।
प्रेमलता, आशा कार्यकर्ता
सबसे कठिन ड्यूटी आशा कार्यकर्ता और संगनी की है। घर-घर सर्वे करने में लगीं हुईं हैं। अस्पतालों में प्रसव कराने से चिकित्सक डर रहे हैं। आशा कार्यकर्ता बिना डरे, बिना किसी सुरक्षा के उनको अस्पताल तक लेकर पहुंच रही हैं। प्रवासी मजदूरों पर निगाह बनाए हुए हैं। आशा अपराजिता है।
अनीता देवी, आशा संगनी
सबसे बड़े कोरोना योद्धा के रूम में आशाएं ही काम कर रही हैं। न ही ड्यूटी के बाद क्वारंटीन होती हैं। हम स्वयं तो खतरा उठाते हैं। क्षेत्र में पूरा दिन ड्यूटी करने के बाद घर जाते हैं। वहां सारा घर का काम करते हैं। खतरा हमारे लिए होता है। साथ ही परिवार के लिए भी खतरा रहता है।
अमृता, आशा संगनी
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बिना आशा कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं अधूरी रहती हैं। आम दिनों में गर्भवती के साथ नवजात शिशुओं की देखभाल करती हैं। किंतु आशाएं खतरा मोल लेकर कोरोना मुक्त जनपद बनाने के लिए दिन रात एक किए हैं। आशा कार्यकर्ता क्वारंटीन किए प्रवासी मजदूरों के घर पर जा रहीं हैं। उन्हें कोरोना के लक्षण बता रही हैं। यही कारण है कि प्रवासी मजदूर जांच कराने आ रहे हैं और कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए हैं। जनपद में 1559 आशाएं हैं।
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कोरोना से लोग डर रहे हैं। उसी दौर में हम अपनी और परिवार की परवाह किए बगैर ड्यूटी निभा रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोगों से मिलना होता है। जिनमें कोरोना का खतरा है, उनसे ही मिलना हो रहा है। जो लोग पॉजिटिव पाए हैं, उनके घर बोर्ड लगाने जाते हैं। सरकार को भी अब हमारी तरफ ध्यान देना चाहिए।
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संतोष देवी, आशा कार्यकर्ता
महिला होते हुए भी हम तो ड्यूटी कर रहे हैं। पहले घर के काम करते हैं, फिर क्षेत्र में निकल जाते हैं। एक तरफ कोरोना है तो दूसरी ओर भीषण गर्मी है। किंतु हम बिना परवाह किए सेवा में जुटे हैं। मकसद है कि देश से कोरोना को भगाना। इसके चलते अब सरकार को भी हमारी परहवा करनी चाहिए।
प्रेमलता, आशा कार्यकर्ता
सबसे कठिन ड्यूटी आशा कार्यकर्ता और संगनी की है। घर-घर सर्वे करने में लगीं हुईं हैं। अस्पतालों में प्रसव कराने से चिकित्सक डर रहे हैं। आशा कार्यकर्ता बिना डरे, बिना किसी सुरक्षा के उनको अस्पताल तक लेकर पहुंच रही हैं। प्रवासी मजदूरों पर निगाह बनाए हुए हैं। आशा अपराजिता है।
अनीता देवी, आशा संगनी
सबसे बड़े कोरोना योद्धा के रूम में आशाएं ही काम कर रही हैं। न ही ड्यूटी के बाद क्वारंटीन होती हैं। हम स्वयं तो खतरा उठाते हैं। क्षेत्र में पूरा दिन ड्यूटी करने के बाद घर जाते हैं। वहां सारा घर का काम करते हैं। खतरा हमारे लिए होता है। साथ ही परिवार के लिए भी खतरा रहता है।
अमृता, आशा संगनी