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Firozabad News: मां की गोद में कंगारू केयर से खिलखिला रहा बचपन

Thu, 07 Nov 2024 10:53 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Thu, 07 Nov 2024 10:53 PM IST
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Childhood blossomed with kangaroo care in mother's lap.
फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज में जहां संसाधन कम पड़ जाते हैं, वहां नवजात शिशुओं की जान बचाने के लिए मां का दुलार ही वरदान बन रहा है। विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में पलंग फुल होने पर प्रीमैच्योर शिशुओं को कंगारू केयर सेंटर में भर्ती करके स्वस्थ्य किया जा रहा है। कंगारू मदर केयर (केएमसी) की इस विधि से 4500 शिशुओं का जीवन खिलखिला उठा है।मेडिकल कॉलेज में 18 बेड का एसएनसीयू अधिकांश समय में फुल रहता है। एक बेड पर दो या तीन नवजात शिशु देखे जा सकते हैं। जबकि गरीब माता, पिता के लिए प्राइवेट अस्पतालों में बच्चों को भर्ती कराने के लिए बजट नहीं होता है। क्योंकि प्राइवेट में एक दिन का खर्चा तीन से हजार हजार रुपये है। ऐसे में कंगारू केयर कमजोर बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। 2015 में खुले केएमसी में प्रीमैच्योर और 1800 ग्राम से कम वजन के 4500 बच्चों को स्वस्थ जीवन प्रदान किया है, इनमें से एक 750 ग्राम का भी शिशु है।
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मां की ममता में मशीन से अधिक शक्ति
मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभागध्यक्ष डाॅ. एलके गुप्ता ने बताया कि गर्भकाल में सही देखभाल न हो पाने के कारण प्री-मैच्योर व कमजोर शिशुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में कंगारू मदर केयर घर पर देखभाल का एक कारगर विकल्प साबित हो रहा है। मां की ममता में किसी भी मशीन से अधिक शक्ति है, और इसमें कोई खर्च नहीं आता। कंगारू मदर केयर के प्राकृतिक तरीकों से मां और शिशु का जुड़ाव बढ़ता है, स्तनपान बेहतर होता है और शिशु का वजन तेजी से बढ़ता है।
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कंगारू मदर केयर के फायदे

-बच्चा चौंकता नहीं है, क्योंकि वह अकेले नहीं रहता और कम रोता है।

-मां व बच्चे के बीच मानसिक एवं भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है।
-नवजात शिशु स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है।

-शिशु का वजन तेजी से बढ़ता है।


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कंगारू विधि से तरह से करती है स्वस्थ्य
मां और शिशु के बीच स्किन-टू-स्किन संपर्क कंगारू केयर कहलाता है। इसमें मां अपने शिशु को अपने सीने से लगाकर रखती है। इसके हर एक सेशन में मां कुछ घंटों के लिए शिशु को अपने सीने से लगाकर रखती है। इसके लिए शिशु को डायपर के अलावा और कुछ नहीं पहनाया जाता है। गर्भ से ही शिशु अपनी मां की आवाज और दिल की धड़कन को पहचानने लगता है। इसलिए कंगारू केयर में बच्चा खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। बच्चे का वजन बढ़ाने में भी यह मददगार है। कंगारू केयर मिलने वाले बच्चे कम रोते हैं। हर महीने 30 बच्चों का उपचार होता है।
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