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Firozabad News: हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने शुरू की किशोरी के अपहरण मामले की जांच

Tue, 17 Feb 2026 01:02 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Tue, 17 Feb 2026 01:02 AM IST
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CBI begins investigation into teenage girl's kidnapping case on High Court order
फिरोजाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश और उप्र सरकार के निर्देश के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रसूलपुर थाने में यूपी पुलिस के सिपाही दीपेंद्र पर दर्ज किशोरी अपहरण के मामले की जांच अपने हाथों में ले ली है। विशेष अपराध शाखा नई दिल्ली द्वारा केस री-रजिस्टर किया गया है।
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हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 सितंबर 2022 को ही जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था, जिसे राज्य सरकार की विशेष अनुज्ञा याचिका खारिज होने के बाद अब अमल में लाया गया है। सीबीआई की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में, उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग ने 29 जनवरी 2026 को इस मामले से संबंधित सभी अभिलेख और केस प्रॉपर्टी सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। इसके बाद 13 फरवरी को सीबीआई ने नई दिल्ली में इस मामले को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया और पुलिस उपाधीक्षक गौरव जोशी को इस हाई-प्रोफाइल मामले का विवेचक नियुक्त किया गया है।
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मामला दीपेंद्र सिंह निवासी बिरजापुर, हाईवे, मथुरा, जो कि उप्र पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात है, उससे व उसके परिजन पर दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। दीपेंद्र वर्ष 2022 में आगरा जीआरपी में तैनात था। तभी उसकी मुलाकात ट्रेन में रामगढ़ इलाके की रहने वाली किशोरी से हुई थी। रसूलपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार 16 वर्षीय किशोरी की मां ने अपनी बेटी के पास से एक मोबाइल बरामद किया था। पूछताछ में बेटी ने बताया था कि उससे दोस्ती कर यह फोन बातचीत के लिए दीपेंद्र ने दिया था। इसके बाद 24 मार्च 2022 को किशोरी अपनी मां के साथ रसूलपुर क्षेत्र में बाजार गई थी। वहां से वह लापता हो गई। 29 मार्च 2022 को किशोरी को आगरा के हरीपर्वत थाने से रसूलपुर पुलिस ने बरामद किया था। किशोरी ने पुलिस को बताया था कि मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र के बिरजापुर निवासी सिपाही दीपेंद्र उसे भगाकर लाया था। मथुरा के होटल में उसने संबंध बनाए और अपने भाई सुमित के साथ भी बनवाए। वहां से आगरा ले आया। आगरा दीवानी में अपने भाई सुमित के साथ उसकी कोर्ट मैरिज करवा रहा था। वहां से किसी प्रकार भागकर निकली। मामला दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में तरमीम किया गया। इसमें दीपेंद्र के अलावा सुमित की मां माया देवी को भी नामजद किया गया। आरोपियों की तलाश में पुलिस ने दबिश दी, लेकिन वह हाथ नहीं आए। इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट होने के साथ सुमित, दीपेंद्र पर 10-10 हजार का इनाम भी घोषित किया गया। इस दौरान किशोरी व उसके परिवार ने रसूलपुर पुलिस पर असहयोग का आरोप लगाते हुए गांधी पार्क में धरना दे दिया। इस पर मुकदमे की विवेचना आगरा क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हो गई थी। इसी दौरान दीपेंद्र पक्ष हाईकोर्ट चला गया और आरोप लगाया था कि उसके परिवार को षड्यंत्र के तहत पुलिस ने ही इस मामले में फंसाया है।
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हाईकोर्ट में लगाए यह आरोप, सुप्रीम कोर्ट तक गई थी राज्य सरकार
हाईकोर्ट में दीपेंद्र पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि उसके भाई पुनीत को 2018 में एसओजी की टीम ने उठाया था और गोविंद नगर पुलिस ने दो दिन बाद उसे छिनैती और बाइक चोरी के आरोप में एक अन्य अभियुक्त चेतन के साथ जेल भेज दिया था। यह मामला फर्जी था। इसकी शिकायत एससी-एसटी आयोग में की गई। वहां से हुए आदेश पर लखनऊ की एक विशेष पुलिस टीम ने जांच की थी तो उसमें 35 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। उसी खुन्नस में उसके भाई की फर्जी गिरफ्तारी की गई थी। इसके अलावा इस याचिका में 2013 व 2016 में परिजन पर दर्ज मारपीट, बिजली चोरी आदि के मुकदमों के भी फर्जी होने का उल्लेख किया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था। राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की कहते हुए सुनवाई नहीं की थी। इसके बाद फिर से मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई। राज्य सरकार ने यहां बताया कि जिन 35 पुलिसकर्मियों को लखनऊ की विशेष जांच टीम ने दोषी पाया, उनमें से काफी पुलिसकर्मी 2018 में मथुरा जिले में ही तैनात नहीं थे। एक अन्य जांच में सिर्फ 6 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। इन सभी बिंदुओं को सुनते हुए हाईकोर्ट ने पिछले दिनों फिर से आदेश दिया कि सिपाही दीपेंद्र व उसके परिजन के खिलाफ दर्ज सभी (करीब छह) मुकदमों की जांच सीबीआई से कराई जाए। इनमें एक मुकदमा किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म का रसूलपुर थाना (फिरोजाबाद), मथुरा के हाईवे थाने में दर्ज मारपीट व अन्य मुकदमे, गोविंद नगर थाने में दर्ज छिनैती व अन्य मुकदमे, मथुरा शहर कोतवाली में दर्ज बाइक चोरी का मुकदमा आदि शामिल हैं। इन सभी की जांच अब सीबीआई द्वारा की जाएगी।
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