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सेट टॉप बाक्स बिना टीवी पर ब्लैक आउट
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 05 Jan 2016 10:59 PM IST
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शहरी क्षेत्र के एक लाख से अधिक घरों में टीवी पर ब्लैक आउट हो गया है। बिना सेट टॉप बाक्स मनोरंजन बंद हो गए और ब्लैक आउट जैसी स्थिति है। ऐसा 31 दिसंबर तक सेट टॉप बॉक्स न लगने के कारण हुआ। अब उपभोक्ताओं के यहां केवल दूरदर्शन एवं कुछ अन्य चुनिंदा चैनल ही दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में ऑपरेटरों ने सेट टॉप बॉक्स की कीमतें भी बढ़ा दी हैं।
केबल ऑपरेटरों की सुस्ती और मनमानी के कारण शहर के लगभग 1.25 लाख ग्राहक और उनके परिवार के सदस्य टीवी से मनोरंजन नहीं कर पा रहे हैं। सेट टॉप बॉक्स लगवाने की निर्धारित तिथि निकलने के कारण एमएसओ (मल्टी सिस्टम ऑपरेटर) ने फ्री चैनलों को छोड़कर एनालॉग प्रसारण बंद कर दिया है। अब केवल सेट टॉप बॉक्स लगाने वाले घरों में ही डिजिटल प्रसारण हो रहा है। दूसरी ओर यकायक बाजार में डीटीएच की मांग बढ़ गई है। यह सेवा केबल की तुलना में महंगी है पर ग्राहक मजबूरी में ऐसा कर रहे हैं। वहीं कुछ ऑपरेटरों ने सेट टॉप बॉक्स के रेट भी बढ़ा दिए हैं।
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केबल ऑपरेटर वसूल रहे मनमाने दाम
लोकल आपरेटर्स द्वारा शहर में सेट टॉप बाक्स न लगाने के चलते अब कीमतों पर जगह-जगह विवाद हो रहा है। ऑपरेटर सेट टॉप बॉक्स लगाने के लिए 1000 से 1500 रुपये वसूल रहे हैं। विवाद के कारण हजारों की संख्या में उपभोक्ताओं ने सेट टॉप बॉक्स नहीं लगवा रहे हैं। उपभोक्ताओं का तर्क है कि सेट टॉप बॉक्स पर कीमत दर्शाई नहीं है। साथ ही लोकल ऑपरेटर रुपये लेने के बाद सेट टॉप बॉक्स की आईडी भी उपभोक्ता को नहीं दे रहे हैं।
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नहीं लिखी होती कीमत, उठा रहे फायदा
सेट टॉप बाक्स पर एमआरपी नहीं लिखी होती है। जिले में करीब पंाच लाख सेट टॉप बॉक्स की जरूरत है और बाजार में 20 प्रतिशत उपलब्ध है। ऐसे में बाजार में सेट टॉप बॉक्स मुंह मांगी कीमतों पर मिल रहे हैं। इसका खामियाजा भी लोकल ऑपरेटर्स को भुगतना पड़ा रहा है।
सेटटॉप बॉक्स के फायदे भी नुकसान भी
सेट टॉप बॉक्स लगाने के बाद उपभोक्ताओं को मनपसंद चैनल चुनने की छूट होगी। हालांकि प्रत्येक टीवी पर एक सेट टॉप बॉक्स होना जरूरी है। हालांकि कई कंपनियों ने ऐसे सेट टॉप बॉक्स भी तैयार कर रखे है, जिस पर एक से अधिक टीवी का संचालन संभव है। हालांकि अभी तक एक कनेक्शन पर घर के सभी टीवी चल रहे थे।
फैक्ट फाइल
वर्ष 2013 में चार मेट्रो सिटीज में सेट टॉप बॉक्स लागू हुआ और डिजिटलाइजेशन का फायदा उपभोक्ताओं ने कीमत चुकाकर पाया। इसके बाद 2014 में कुछ और शहरों में सेट टॉप बॉक्स की अनिवार्यता लागू की गई। अब प्रदेश भर के रूरल एरिया में इसकी अनिवार्यता रखी गई है। चौथे फेज में अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र इस योजना से जुड़ेंगे, हालांकि ऐसी जगह केबल कनेक्शन नाममात्र है।
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केबल ऑपरेटरों की सुस्ती और मनमानी के कारण शहर के लगभग 1.25 लाख ग्राहक और उनके परिवार के सदस्य टीवी से मनोरंजन नहीं कर पा रहे हैं। सेट टॉप बॉक्स लगवाने की निर्धारित तिथि निकलने के कारण एमएसओ (मल्टी सिस्टम ऑपरेटर) ने फ्री चैनलों को छोड़कर एनालॉग प्रसारण बंद कर दिया है। अब केवल सेट टॉप बॉक्स लगाने वाले घरों में ही डिजिटल प्रसारण हो रहा है। दूसरी ओर यकायक बाजार में डीटीएच की मांग बढ़ गई है। यह सेवा केबल की तुलना में महंगी है पर ग्राहक मजबूरी में ऐसा कर रहे हैं। वहीं कुछ ऑपरेटरों ने सेट टॉप बॉक्स के रेट भी बढ़ा दिए हैं।
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केबल ऑपरेटर वसूल रहे मनमाने दाम
लोकल आपरेटर्स द्वारा शहर में सेट टॉप बाक्स न लगाने के चलते अब कीमतों पर जगह-जगह विवाद हो रहा है। ऑपरेटर सेट टॉप बॉक्स लगाने के लिए 1000 से 1500 रुपये वसूल रहे हैं। विवाद के कारण हजारों की संख्या में उपभोक्ताओं ने सेट टॉप बॉक्स नहीं लगवा रहे हैं। उपभोक्ताओं का तर्क है कि सेट टॉप बॉक्स पर कीमत दर्शाई नहीं है। साथ ही लोकल ऑपरेटर रुपये लेने के बाद सेट टॉप बॉक्स की आईडी भी उपभोक्ता को नहीं दे रहे हैं।
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नहीं लिखी होती कीमत, उठा रहे फायदा
सेट टॉप बाक्स पर एमआरपी नहीं लिखी होती है। जिले में करीब पंाच लाख सेट टॉप बॉक्स की जरूरत है और बाजार में 20 प्रतिशत उपलब्ध है। ऐसे में बाजार में सेट टॉप बॉक्स मुंह मांगी कीमतों पर मिल रहे हैं। इसका खामियाजा भी लोकल ऑपरेटर्स को भुगतना पड़ा रहा है।
सेटटॉप बॉक्स के फायदे भी नुकसान भी
सेट टॉप बॉक्स लगाने के बाद उपभोक्ताओं को मनपसंद चैनल चुनने की छूट होगी। हालांकि प्रत्येक टीवी पर एक सेट टॉप बॉक्स होना जरूरी है। हालांकि कई कंपनियों ने ऐसे सेट टॉप बॉक्स भी तैयार कर रखे है, जिस पर एक से अधिक टीवी का संचालन संभव है। हालांकि अभी तक एक कनेक्शन पर घर के सभी टीवी चल रहे थे।
फैक्ट फाइल
वर्ष 2013 में चार मेट्रो सिटीज में सेट टॉप बॉक्स लागू हुआ और डिजिटलाइजेशन का फायदा उपभोक्ताओं ने कीमत चुकाकर पाया। इसके बाद 2014 में कुछ और शहरों में सेट टॉप बॉक्स की अनिवार्यता लागू की गई। अब प्रदेश भर के रूरल एरिया में इसकी अनिवार्यता रखी गई है। चौथे फेज में अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र इस योजना से जुड़ेंगे, हालांकि ऐसी जगह केबल कनेक्शन नाममात्र है।