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UP: फिरोजाबाद में प्राचीन चिकित्सा प्रणाली खुद 'बीमार', अस्पताल में सिर्फ चूर्ण; VIDEO खोल रहा पूरी पोल

Sat, 13 Dec 2025 02:48 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 13 Dec 2025 02:48 PM IST
सार

फिरोजाबाद की आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है। कोरोना काल के बाद लोगों का आयुर्वेद पर भरोसा तो बढ़ा है, लेकिन शासन-प्रशासन की उपेक्षा के कारण यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति खुद ही संकट में है। जिले के 26 आयुर्वेदिक अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही दवाएं, जिसके कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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Ayurvedic Hospitals in Firozabad Face Shortage of Doctors and Medicines
आयुर्वेदिक चिकित्सालय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

फिरोजाबाद में कुल 26 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए केवल 21 डॉक्टर और 3 फार्मासिस्ट उपलब्ध हैं। कर्मचारियों की कमी इतनी गंभीर है कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी मरीजों को दवाएं बांटने पर मजबूर हैं। सबसे बड़ी समस्या दवाओं की किल्लत है।
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पिछले लगभग एक साल से आयुर्वेद अस्पतालों में दवाओं का गंभीर संकट बना हुआ है। मरीजों को जोड़ों के दर्द की दवाएं, हार्ट टॉनिक, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली औषधियां, बुखार और मूत्र रोग की दवाएं जैसी महत्वपूर्ण दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, क्योंकि अस्पतालों में केवल कुछ चूर्ण और गिनी-चुनी गोलियां ही उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार से आने वाली दवाओं की आपूर्ति भी लगभग एक साल से बंद है।
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ये हैं के हालात
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, महावीर नगर में 12 दिसंबर को सुबह 11 बजे तक महज चार मरीज पहुंचे थे। इनका पीड़ा अनुसार उपचार और औषधि यहां तैनात कर्मचारी सुरेश चंद द्वारा दी गईं। सुरेश चंद ने बताया कि डॉक्टर अवकाश पर हैं। इधर, मरीज रमेश चंद निवासी नई बस्ती ने बताया कि उनको कई बार दवा/औषधि न होने की बात कहते हुए लौटा दिया गया है। अन्य मरीज दयानंद निवासी जगजीवन नगर ने बताया कि उनको औषधि स्वरूप दवा दी गई। वहीं, एक अन्य महिला मरीज मंजू निवासी रसीदपुर कनैटा ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत लेकर आई थीं। अस्पताल से चूर्ण दिया गया।
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जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. सुनीता पाल ने बताया कि दवाओं की आपूर्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। पहले केवल एक कंपनी से दवाएं आती थीं, लेकिन अब नए टेंडर के माध्यम से शासन स्तर से सीधे दवाएं भेजी जाएंगी। कुछ दवाएं पहुंच गई हैं और बाकी भी जल्द ही उपलब्ध होंगी।

 
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