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Firozabad News: तहसील में भ्रष्टाचार का आरोप, वकीलों ने की हड़ताल
Tue, 10 Feb 2026 12:00 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 10 Feb 2026 12:00 AM IST
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जसराना। तहसील जसराना में लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों की कार्यप्रणाली से नाराज अधिवक्ताओं का आंदोलन और उग्र हो गया है। बार एसोसिएशन की बैठक में अधिवक्ताओं ने भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए आगामी 13 फरवरी तक न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि बंटवारे के मुकदमों में कुरा (विभाजन रिपोर्ट) दाखिल न होने से सालों पुराने मामले लंबित पड़े हैं।
बार हॉल में अध्यक्ष ओमकार सिंह यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिवक्ताओं ने रोष व्यक्त किया। बार अध्यक्ष ने बताया कि पूर्व में अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखा। लेखपालों द्वारा फाइलों में कुरा दाखिल न किए जाने के कारण न केवल मुकदमे लटके हैं, बल्कि इसके चलते भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है।
बैठक में अधिवक्ताओं ने राजस्व निरीक्षकों (कानूनगो) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। आरोप है कि सीमांकन (पैमाइश) के मामलों में भ्रष्टाचार चरम पर है। राजस्व निरीक्षक मौके पर जाकर जांच करने के बजाय पक्षकारों को अनावश्यक रूप से उलझा रहे हैं। कुरा दाखिल न होने और गलत सीमांकन के कारण ग्रामीण इलाकों में जमीनी विवाद और अधिक बढ़ रहे हैं। अधिवक्ताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और व्यवस्था में सुधार नहीं आता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के दौरान अधिकारियों द्वारा पत्रावलियों को खारिज किया जा रहा है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 13 फरवरी तक कोई भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य नहीं करेगा। इस दौरान तहसील के बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
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बार हॉल में अध्यक्ष ओमकार सिंह यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिवक्ताओं ने रोष व्यक्त किया। बार अध्यक्ष ने बताया कि पूर्व में अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखा। लेखपालों द्वारा फाइलों में कुरा दाखिल न किए जाने के कारण न केवल मुकदमे लटके हैं, बल्कि इसके चलते भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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बैठक में अधिवक्ताओं ने राजस्व निरीक्षकों (कानूनगो) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। आरोप है कि सीमांकन (पैमाइश) के मामलों में भ्रष्टाचार चरम पर है। राजस्व निरीक्षक मौके पर जाकर जांच करने के बजाय पक्षकारों को अनावश्यक रूप से उलझा रहे हैं। कुरा दाखिल न होने और गलत सीमांकन के कारण ग्रामीण इलाकों में जमीनी विवाद और अधिक बढ़ रहे हैं। अधिवक्ताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और व्यवस्था में सुधार नहीं आता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के दौरान अधिकारियों द्वारा पत्रावलियों को खारिज किया जा रहा है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 13 फरवरी तक कोई भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य नहीं करेगा। इस दौरान तहसील के बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।