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Firozabad News: एआईएमआईएम बिगाड़ सकता है समीकरण
Tue, 02 Apr 2024 11:43 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 02 Apr 2024 11:43 PM IST
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फिरोजाबाद। फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) इस बार तीन प्रमुख बड़े दलों का समीकरण बिगाड़ सकती है। पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी द्वारा खेला गया पीडीएम (पिछड़ा, दलित, मुसलमान) का संयुक्त गठजोड़ अगर कारगर रहा तो जिले की सीट पर बड़ा असर पड़ेगा। जिले में पिछड़े, दलित और मुसलमान आबादी निर्णायक स्थिति में है। लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा भले ही चार सौ पार का दावा कर रही है। वहीं सपा व बसपा भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। वहीं दो दिन पहले प्रदेश में हुए एआईएमआईएम के साथ कई छोटे दलों ने तीसरा गठबंधन (पीडीएम) पिछड़ा, दलित, मुसलमान मोर्चा बनाया है। उस मोर्चा के बल पर एआईएमआईएम कई मुस्लिम व पिछड़े जाति के वोट बैंक वाली संसदीय सीटों पर अपना दम भर रही है। एक अनुमान के अनुसार जिले में करीब चार लाख यादव मतदाता (पिछड़ा वोट बैंक), ढाई लाख मुस्लिम, दो लाख जाटव के साथ अन्य पिछड़े वर्ग बघेल, राठौर कुशवाहा, सविता अन्य समाज से जुड़े करीब 13 लाख मतदाता है। जो कि सालों से सामान्य चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं।
अगर मोर्चा का कार्ड सफल रहा तो भाजपा जो कि पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को काफी पहले से सहेजने में लगी है, उन मतदाताओं का एक हिस्सा छिटक सकता है। वहीं सपा की बात करें तो यादव व मुस्लिम मतदाता की पहली पसंद सपा ही होती है, लेकिन अगर एआईएमआईएम से कोई अल्पसंख्यक मुस्लिम प्रत्याशी आता है तो सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका रहेगी। वहीं बसपा का परंपरागंत जाटव (दलित) वोट बैंक भी खिसक सकता है। एआईएमआईएम इसके लिए कोई ऐसे चेहरे की तलाश में हैं जिसका कोई जिले में विरोध न हो। हालांकि चर्चा है कि एआईएमआईएम जिले के साथ-साथ आगरा के एक मुस्लिम नेता से भी बात हुई है। वहीं एक पिछड़े वर्ग से जुड़े नेता भी पार्टी से टिकट लेने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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अगर मोर्चा का कार्ड सफल रहा तो भाजपा जो कि पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को काफी पहले से सहेजने में लगी है, उन मतदाताओं का एक हिस्सा छिटक सकता है। वहीं सपा की बात करें तो यादव व मुस्लिम मतदाता की पहली पसंद सपा ही होती है, लेकिन अगर एआईएमआईएम से कोई अल्पसंख्यक मुस्लिम प्रत्याशी आता है तो सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका रहेगी। वहीं बसपा का परंपरागंत जाटव (दलित) वोट बैंक भी खिसक सकता है। एआईएमआईएम इसके लिए कोई ऐसे चेहरे की तलाश में हैं जिसका कोई जिले में विरोध न हो। हालांकि चर्चा है कि एआईएमआईएम जिले के साथ-साथ आगरा के एक मुस्लिम नेता से भी बात हुई है। वहीं एक पिछड़े वर्ग से जुड़े नेता भी पार्टी से टिकट लेने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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