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Firozabad News: दस साल बाद नशे में धुत सिपाही को एक माह की सजा
Tue, 15 Jul 2025 12:05 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 15 Jul 2025 12:05 AM IST
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सांकेतिक
फिरोजाबाद। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेश कुमार दिवाकर ने पुलिस के एक सिपाही को अत्यधिक नशे में होने के कारण जमीन पर गिर जाने के मामले में दोषी ठहराते हुए एक माह की सजा और उसके एक माह के वेतन के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर पांच दिन का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
सहायक अभियोजन अधिकारी हरेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि मामला थाना मटसेना से जुड़ा हुआ है। प्रतिसार निरीक्षक ने थाने में रिपोर्ट लिखाते हुए कहा है कि मूल रुप से मुकंदपुर हाईवे मथुरा निवासी जो फिरोजाबाद के थाना मटसेना में तैनात था। 30 मई 2015 को आरक्षी 362 रामबाबू सिंह शराब के नशे में आदेश कक्ष के सामने जमीन पर पड़ा था एवं बड़बड़ा रहा था जो शराब के नशे में ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा था। आरक्षी को जिला चिकित्सालय फिरोजाबाद भेज कर परीक्षण कराया गया।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोपी रामबाबू सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेश कुमार दिवाकर की न्यायालय में चला। न्यायालय में गवाह के बयान हुए। न्यायाधीश ने दोनों पक्ष के तर्क सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्य का गहनता से अध्ययन करने के बाद सिपाही रामबाबू को दोषी पाते हुए खुले न्यायालय में सजा सुनाई।
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सहायक अभियोजन अधिकारी हरेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि मामला थाना मटसेना से जुड़ा हुआ है। प्रतिसार निरीक्षक ने थाने में रिपोर्ट लिखाते हुए कहा है कि मूल रुप से मुकंदपुर हाईवे मथुरा निवासी जो फिरोजाबाद के थाना मटसेना में तैनात था। 30 मई 2015 को आरक्षी 362 रामबाबू सिंह शराब के नशे में आदेश कक्ष के सामने जमीन पर पड़ा था एवं बड़बड़ा रहा था जो शराब के नशे में ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा था। आरक्षी को जिला चिकित्सालय फिरोजाबाद भेज कर परीक्षण कराया गया।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोपी रामबाबू सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेश कुमार दिवाकर की न्यायालय में चला। न्यायालय में गवाह के बयान हुए। न्यायाधीश ने दोनों पक्ष के तर्क सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्य का गहनता से अध्ययन करने के बाद सिपाही रामबाबू को दोषी पाते हुए खुले न्यायालय में सजा सुनाई।
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