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ड्यूटी से लौट रहे कर्मचारी की हादसे में मौत
ब्यूूराो , अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 24 Mar 2015 11:56 PM IST
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जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन से रात करीब दो बजे काम कर लौट रहे पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लिपिक की गांव कनेंटा के समीप ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई।
टक्कर से मौत हो गई। हादसे की खबर परिजनों को सुबह पांच बजे लगी। इतनी रात तक दफ्तर में काम कराने को लेकर परिजनों में काफी गुस्सा था। जिला अस्पताल में परिजनों और रिश्तेदारों ने डीएम के सामने अपने गुस्से का खुलकर इजहार किया।
मूलरूप से नारखी क्षेत्र के गांव गढ़ी अफोह निवासी अरुण कुमार सिंह (40) पुत्र स्व. महेंद्र कुमार सिंह पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में लिपिक थे। वह अपनी पत्नी कृष्णा सिंह, बेटे आर्यन और साहिल के साथ उत्तर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला तिलक नगर में डीबी सिंह के मकान में किराए पर रहते थे। सोमवार सुबह नौ बजे वह आफिस गए थे। कार्य अधिक होने के कारण अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। देर रात दो बजे वह दफ्तर से काम करके निकले। बाइक से वह घर लौट रहे थे। रात करीब ढाई बजे गांव कनेंटा के समीप पीछे से आ रहे ट्रक ने बाइक को अपनी जद में ले लिया। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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इधर, हादसे के बाद चालक ट्रक छोड़कर भाग गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक से मिले ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर शिनाख्त अरुण के रूप में की। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर परिवारीजनों को सूचित किया और शव को पीएम के लिए भेज दिया। तड़के पांच बजे परिवारीजन जिला अस्पताल पहुंच गए। जानकारी पर सुबह करीब आठ बजे सीडीओ सुजीत कुमार भी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने घटना की जानकारी डीएम को दी। इस पर डीएम विजय किरन आनंद परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम के साथ जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां डीएम को देखकर परिवारीजनों का आक्रोश भड़क गया। परिवारीजनों ने डीएम के सामने आक्रोश व्यक्त किया। डीएम ने मृतक के परिवारीजनों को सांत्वना देकर जांच का आश्वासन दिया। बाद में, डीएम शव मृतक के पैतृक गांव पहुंचने पर गढ़ी अफोह भी पहुंचे। यहां डीएम मृतक अरुण के अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
अधिकारियों पर लगाया शोषण का आरोप
अरुण की मौत के बाद परिवारीजनों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश था। डीएम के आने पर मृतक के परिवारीजनों ने अधिकारियों पर अरुण का शोषण करने आरोप लगाया। मृतक के चाचा श्यामपाल और छोटे भाई की पत्नी ऋचा ने कहा कि सुविधाओं के नाम पर अरुण को कुछ नहीं दिया जा रहा था। मृतक के परिवारीजनों ने सीडीओ और डीडीओ के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की। इस पर डीएम ने मामले की जांच का आश्वासन दिया।
पिता की जगह मिली थी नौकरी
नारखी क्षेत्र के रहने वाले अरुण के पिता महेंद्र सिंह सरकारी कर्मचारी थे। उनकी मौत के बाद अरुण को सरकारी नौकरी मिली थी।
फोटो -
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टक्कर से मौत हो गई। हादसे की खबर परिजनों को सुबह पांच बजे लगी। इतनी रात तक दफ्तर में काम कराने को लेकर परिजनों में काफी गुस्सा था। जिला अस्पताल में परिजनों और रिश्तेदारों ने डीएम के सामने अपने गुस्से का खुलकर इजहार किया।
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मूलरूप से नारखी क्षेत्र के गांव गढ़ी अफोह निवासी अरुण कुमार सिंह (40) पुत्र स्व. महेंद्र कुमार सिंह पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में लिपिक थे। वह अपनी पत्नी कृष्णा सिंह, बेटे आर्यन और साहिल के साथ उत्तर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला तिलक नगर में डीबी सिंह के मकान में किराए पर रहते थे। सोमवार सुबह नौ बजे वह आफिस गए थे। कार्य अधिक होने के कारण अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। देर रात दो बजे वह दफ्तर से काम करके निकले। बाइक से वह घर लौट रहे थे। रात करीब ढाई बजे गांव कनेंटा के समीप पीछे से आ रहे ट्रक ने बाइक को अपनी जद में ले लिया। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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इधर, हादसे के बाद चालक ट्रक छोड़कर भाग गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक से मिले ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर शिनाख्त अरुण के रूप में की। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर परिवारीजनों को सूचित किया और शव को पीएम के लिए भेज दिया। तड़के पांच बजे परिवारीजन जिला अस्पताल पहुंच गए। जानकारी पर सुबह करीब आठ बजे सीडीओ सुजीत कुमार भी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने घटना की जानकारी डीएम को दी। इस पर डीएम विजय किरन आनंद परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम के साथ जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां डीएम को देखकर परिवारीजनों का आक्रोश भड़क गया। परिवारीजनों ने डीएम के सामने आक्रोश व्यक्त किया। डीएम ने मृतक के परिवारीजनों को सांत्वना देकर जांच का आश्वासन दिया। बाद में, डीएम शव मृतक के पैतृक गांव पहुंचने पर गढ़ी अफोह भी पहुंचे। यहां डीएम मृतक अरुण के अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
अधिकारियों पर लगाया शोषण का आरोप
अरुण की मौत के बाद परिवारीजनों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश था। डीएम के आने पर मृतक के परिवारीजनों ने अधिकारियों पर अरुण का शोषण करने आरोप लगाया। मृतक के चाचा श्यामपाल और छोटे भाई की पत्नी ऋचा ने कहा कि सुविधाओं के नाम पर अरुण को कुछ नहीं दिया जा रहा था। मृतक के परिवारीजनों ने सीडीओ और डीडीओ के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की। इस पर डीएम ने मामले की जांच का आश्वासन दिया।
पिता की जगह मिली थी नौकरी
नारखी क्षेत्र के रहने वाले अरुण के पिता महेंद्र सिंह सरकारी कर्मचारी थे। उनकी मौत के बाद अरुण को सरकारी नौकरी मिली थी।
फोटो -