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Firozabad News: दीवानी विवाद को आपराधिक रूप नहीं दिया जा सकता

Tue, 02 Jun 2026 12:12 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Tue, 02 Jun 2026 12:12 AM IST
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A civil dispute cannot be criminalised.
सांकेतिक  - फोटो : सांकेतिक
फिरोजाबाद । अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे-7) श्याम बाबू की कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था देते हुए कहा है कि किसी आपराधिक मामले में आरोपी को समन जारी करना एक गंभीर विषय है और केवल दो गवाहों के बयान दर्ज करा देने से ही आपराधिक कानून को गति में नहीं लाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कृषि भूमि के किराए के लेन-देन से जुड़ा विवाद पूरी तरह से दीवानी (सिविल) प्रकृति का है, जिसे आपराधिक रूप नहीं दिया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने निगरानीकर्ता महेशचंद्र अग्रवाल (निवासी प्रेमपुर रैपुरा, हाल निवासी सूरत, गुजरात) की दाण्डिक पुनरीक्षण याचिका को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया और मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
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मामले के अनुसार, महेशचंद्र अग्रवाल ने अपने चचेरे भाई ओमप्रकाश अग्रवाल के खिलाफ अदालत में परिवाद दर्ज कराया था कि उन्होंने अपना एक खेत ओमप्रकाश को 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष के किराए पर दिया था। वर्ष 2017-18 और 2018-19 का कुल एक लाख रुपये किराया बकाया होने पर ओमप्रकाश ने पंजाब नेशनल बैंक का एक चेक दिया था, जो 13 अगस्त 2019 को समय सीमा समाप्त होने की टिप्पणी के साथ बैंक से वापस हो गया। महेशचंद्र का आरोप था कि पैसे मांगने पर आरोपी ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सिविल जज (जूडि) प्रथम ने 22 नवंबर 2024 को परिवाद निरस्त कर दिया था, क्योंकि चेक समय सीमा पार होने के कारण एनआई एक्ट का मामला नहीं बनता था और विवाद सिविल प्रकृति का था। निचली अदाल
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