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184 मृतकों के खातों में भेजी जा रही थी पेंशन
Firozabad
Updated Tue, 06 Aug 2013 05:33 AM IST
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फीरोजाबाद। गरीबों के लिए शुरू की गई रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना का लाभ अपात्रों को मिल रहा था। सत्यापन के दौरान विभाग की खामी उजागर हो गई। विभाग ने अब इन नामों को हटाते हुए शासन से धनराशि की डिमांड की है। शासन ने आदेश दिया है कि पात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए अलग से शासनादेश जारी होगा। इसके बिना कोई भी नाम शामिल नहीं होना चाहिए।
बसपा शासन में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले वह गरीब जिनके पास न तो बीपीएल कार्ड है और न ही अन्य कोई सुविधा उनके लिए महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना की शुरूआत की थी। गरीब तबके के लोगों को 400 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही थी। प्रदेश में सत्ता बदली तो योजना का नाम बदल दिया गया। रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना के नाम से गरीबों को लाभ मिलने लगा। जिले में गत वर्ष इसके पात्रों की संख्या 20123 थी। हकीकत यह है कि इस योजना का लाभ एक दो नहीं चार सैकड़ा से भी अधिक अपात्र ले रहे थे। विभाग की यह खामी उस समय उजागर हो गई जब इसका सत्यापन के लिए गांव-गांव जाकर टीमों ने दस्तक दी। कइयों के परिवार में बालिग पुत्र मिले तो कई सुविधा संपन्न थे। विभागीय सूत्रों की मानें तो करीब 445 अपात्र मिले हैं। अपात्रों की संख्या पता चलने के बाद इनके नाम सूची से हटाने की तैयारी विभाग ने कर ली है। सूत्रों की मानें तो करीब 180 से अधिक ऐसे मिले जिनकी मौत हो गई। विभाग इनके खाते में पेंशन की धनराशि नहीं भेजेगा। उत्तर प्रदेश वित्त एवं विकास निगम के सहायक परियोजना प्रबंधक भगवान स्वरूप से बात की गई तो उन्होंने स्वीकारा कि सत्यापन रिपोर्ट में 445 अपात्र एवं 184 मृतक मिले हैं। इनके नाम हटाने के साथ 19494 के लिए ही पेंशन की धनराशि मांगी जा रही है। नए नाम बढ़ाने के लिए अब शासन से दिशा निर्देश मिलने पर ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
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बसपा शासन में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले वह गरीब जिनके पास न तो बीपीएल कार्ड है और न ही अन्य कोई सुविधा उनके लिए महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना की शुरूआत की थी। गरीब तबके के लोगों को 400 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही थी। प्रदेश में सत्ता बदली तो योजना का नाम बदल दिया गया। रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना के नाम से गरीबों को लाभ मिलने लगा। जिले में गत वर्ष इसके पात्रों की संख्या 20123 थी। हकीकत यह है कि इस योजना का लाभ एक दो नहीं चार सैकड़ा से भी अधिक अपात्र ले रहे थे। विभाग की यह खामी उस समय उजागर हो गई जब इसका सत्यापन के लिए गांव-गांव जाकर टीमों ने दस्तक दी। कइयों के परिवार में बालिग पुत्र मिले तो कई सुविधा संपन्न थे। विभागीय सूत्रों की मानें तो करीब 445 अपात्र मिले हैं। अपात्रों की संख्या पता चलने के बाद इनके नाम सूची से हटाने की तैयारी विभाग ने कर ली है। सूत्रों की मानें तो करीब 180 से अधिक ऐसे मिले जिनकी मौत हो गई। विभाग इनके खाते में पेंशन की धनराशि नहीं भेजेगा। उत्तर प्रदेश वित्त एवं विकास निगम के सहायक परियोजना प्रबंधक भगवान स्वरूप से बात की गई तो उन्होंने स्वीकारा कि सत्यापन रिपोर्ट में 445 अपात्र एवं 184 मृतक मिले हैं। इनके नाम हटाने के साथ 19494 के लिए ही पेंशन की धनराशि मांगी जा रही है। नए नाम बढ़ाने के लिए अब शासन से दिशा निर्देश मिलने पर ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
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