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बैंक प्रबंधक खोजते रहे किसानों की संख्या
Firozabad
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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फीरोजाबाद। पचास हजार के कर्जदार किसानों की कर्जमाफी की घोषणा की सूचना किसानों तक भले ही नहीं पहुंच सकी, लेकिन बैंकों में इसको लेकर चर्चा होती रही। ग्रामीण विकास बैंक के शाखा प्रबंधक 50 हजार से कम के बकाएदारों की सूची खंगालते रहे। संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव के जन्मदिवस पर ग्रामीण विकास बैंक से 50 हजार तक का ऋण लेने वाले तथा 31 मार्च 2012 तक दस प्रतिशत जमा करने वाले किसानों को ब्याज सहित ऋण माफ करने के आदेश दिए हैं। इस घोषणा के बाद ग्रामीण बैंक के अधिकारी ही नहीं बल्कि अन्य बैंकों के अधिकारी भी किसानों की सूची खंगालते दिखाई दिए। लीड बैंक प्रबंधक महेंद्रपाल सिंह का कहना था कि ग्रामीण बैंक ही बता सकती हैं कि कितने किसानों को इस घोषणा का लाभ होगा। श्रेयश ग्रामीण बैंक के एमके सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि शासन से जब आदेश आएगा तभी किसानों को लाभ मिलने की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जिला सहकारी बैंक के सचिव एवं महाप्रबंधक एमके अग्रवाल का कहना था कि ग्रामीण विकास बैंक में सिर्फ भूमि विकास बैंक से ऋण लेने वाले किसान ही शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक तो सिर्फ फसली ऋण देती हैं। जिसे किसान एक मुश्त जमा कराते हैं। भूमि विकास बैंक की जिले में आधा दर्जन शाखाओं का संचालन हो रहा है। इन बैंकों में तो अभिलेखों का रख-रखाव ही ठीक ढंग से नहीं होता। यदि बैंक सूत्रों की मानें तो करीब 25 से 30 हजार के करीब किसानों को लाभ मिलेगा, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं कर सका है।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव के जन्मदिवस पर ग्रामीण विकास बैंक से 50 हजार तक का ऋण लेने वाले तथा 31 मार्च 2012 तक दस प्रतिशत जमा करने वाले किसानों को ब्याज सहित ऋण माफ करने के आदेश दिए हैं। इस घोषणा के बाद ग्रामीण बैंक के अधिकारी ही नहीं बल्कि अन्य बैंकों के अधिकारी भी किसानों की सूची खंगालते दिखाई दिए। लीड बैंक प्रबंधक महेंद्रपाल सिंह का कहना था कि ग्रामीण बैंक ही बता सकती हैं कि कितने किसानों को इस घोषणा का लाभ होगा। श्रेयश ग्रामीण बैंक के एमके सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि शासन से जब आदेश आएगा तभी किसानों को लाभ मिलने की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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जिला सहकारी बैंक के सचिव एवं महाप्रबंधक एमके अग्रवाल का कहना था कि ग्रामीण विकास बैंक में सिर्फ भूमि विकास बैंक से ऋण लेने वाले किसान ही शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक तो सिर्फ फसली ऋण देती हैं। जिसे किसान एक मुश्त जमा कराते हैं। भूमि विकास बैंक की जिले में आधा दर्जन शाखाओं का संचालन हो रहा है। इन बैंकों में तो अभिलेखों का रख-रखाव ही ठीक ढंग से नहीं होता। यदि बैंक सूत्रों की मानें तो करीब 25 से 30 हजार के करीब किसानों को लाभ मिलेगा, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं कर सका है।
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