{"_id":"5-48553","slug":"Firozabad-48553-5","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंद रहे परिषदीय विद्यालय ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंद रहे परिषदीय विद्यालय
Firozabad
Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
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टूंडला। बुधवार को समूचा देश पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 123वीं वर्षगांठ मना रहा था। शिक्षण संस्थानों में शासनादेश के तहत विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। वहीं यमुना तलहटी क्षेत्र के अधिकतर विद्यालय बंद रहे। कोई कार्यक्रम आयोजित न होने से स्कूली बच्चे मायूस थे।
14 नवंबर यानी बाल दिवस के अवसर पर शासनादेश के तहत जूनियर हाईस्कूलों को खोलते हुए खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन होना था। जहां नगरीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खुले व कार्यक्रम हुए, वहीं यमना तलहटी क्षेत्र के गांव बझेरा छोड़कर अन्य विद्यालय बंद रहे। इस दौरान उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चे सुबह दौड़, अपनी कहानी, कविताएं आदि की तैयारियां कर विद्यालय पहुंचे थे, किंतु दोपहर 11 बजे तक भी विद्यालय नहीं खुले तो वे मायूस हो गये तथा लौट गये।
वहीं प्राइवेट विद्यालयों ने चाचा नेहरू की जयंती पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए। इसको लेकर ग्रामीणों में खासा रोष रहा। ग्रामीणों का कहना था कि यही कारण है कि वे अपने बच्चों को इन सरकारी स्कूलों में शिक्षा नहीं दिलाना चाहते। शिक्षकों की मनमानी से चाचा नेहरू के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाने वाला बाल दिवस ऐसे ही चला गया।
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प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध होगी कार्रवाई
प्राथमिक विद्यालयों की छुट्टी थी। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय खुले थे तथा उनमें चाचा नेहरू के जन्मदिवस पर कार्यक्रम हुए। जो उच्च प्राथमिक विद्यालय बाल दिवस के दिन नहीं खुले हैं तथा उन विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए हैं, उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जायेगी।
मोहम्मद रिजवान, खंड शिक्षा अधिकारी टूंडला।
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14 नवंबर यानी बाल दिवस के अवसर पर शासनादेश के तहत जूनियर हाईस्कूलों को खोलते हुए खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन होना था। जहां नगरीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खुले व कार्यक्रम हुए, वहीं यमना तलहटी क्षेत्र के गांव बझेरा छोड़कर अन्य विद्यालय बंद रहे। इस दौरान उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चे सुबह दौड़, अपनी कहानी, कविताएं आदि की तैयारियां कर विद्यालय पहुंचे थे, किंतु दोपहर 11 बजे तक भी विद्यालय नहीं खुले तो वे मायूस हो गये तथा लौट गये।
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वहीं प्राइवेट विद्यालयों ने चाचा नेहरू की जयंती पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए। इसको लेकर ग्रामीणों में खासा रोष रहा। ग्रामीणों का कहना था कि यही कारण है कि वे अपने बच्चों को इन सरकारी स्कूलों में शिक्षा नहीं दिलाना चाहते। शिक्षकों की मनमानी से चाचा नेहरू के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाने वाला बाल दिवस ऐसे ही चला गया।
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प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध होगी कार्रवाई
प्राथमिक विद्यालयों की छुट्टी थी। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय खुले थे तथा उनमें चाचा नेहरू के जन्मदिवस पर कार्यक्रम हुए। जो उच्च प्राथमिक विद्यालय बाल दिवस के दिन नहीं खुले हैं तथा उन विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए हैं, उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जायेगी।
मोहम्मद रिजवान, खंड शिक्षा अधिकारी टूंडला।