शिवपाल ने बिगाड़ा गणित, सपा का घटा वोट प्रतिशत

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Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2019 12:00 AM IST
नवनिर्वाचित सांसद के साथ भाजपा विधायक मनीष असीजा
नवनिर्वाचित सांसद के साथ भाजपा विधायक मनीष असीजा - फोटो : अमर उजाला

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दीपक जैन
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फिरोजाबाद। 2014 के चुनाव से तुलना की जाए तो इस बार समाजवादी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। बसपा से गठबंधन के बाद भी सपा 2014 जैसा वोट प्रतिशत नहीं जुटा पाई। पांच में से दो विधानसभा में लीड भी मामूली मिली। सपा को भी उम्मीद नहीं थी कि ऐसे किला ढह जाएगा। गठबंधन के बाद सपा को पहले से भी अधिक वोट मिलने की उम्मीद थी।

सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने पुत्र अक्षय यादव के लिए 2014 के चुनाव से भी ज्यादा मेहनत की थी। चूंकि इस बार अक्षय यादव की राह में चाचा शिवपाल यादव ने कांटे बिछा दिए थे, इसलिए सपा को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। मोदी फैक्टर भी सामने था, लेकिन सपा के रणनीतिकार मानकर चल रहे थे कि गठबंधन के बाद शिवपाल यादव की ओर से किए गए नुकसान की भरपाई कर लेंगे। फिरोजाबाद सदर क्षेत्र में पूर्व विधायक अजीम भाई ने निकाय चुनाव से पहले ही बगावत कर दी थी तो सिरसागंज के सपा विधायक हरिओम यादव भी खुलकर विरोध में आ गए थे।


सपा के वोट बैंक में सेंध मारने में सफल हुए शिवपाल
शिवपाल यादव मुख्य मुकाबले से बाहर रहे, लेकिन 91869 वोट पाकर सपा का गणित बिगाड़ दिया। शिवपाल को 8.5 प्रतिशत वोट मिले हैं। इस चुनाव में सपा को 43.4 प्रतिशत वोट मिले हैं। जबकि 2014 में सपा को 48.39 प्रतिशत वोट मिले थे। शिवपाल को मिले वोट का प्रतिशत यदि सपा के साथ जोड़ दिया जाए तो सपा को 51.9 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान था। जबकि चुनाव जीतने वाले भाजपा के डॉ. चंद्रसेन जादौन को 46.9 प्रतिशत वोट मिले हैं। सपा के परंपरागत वोट बैंक में सपा के बागी नेता शिवपाल यादव सेंध मारने में सफल हो गए।

2014 में सिरसागंज से मिली थी सबसे बड़ी लीड, इस बार झटका
वर्ष 2014 के चुनाव में सिरसागंज से सपा को सबसे बड़ी लीड मिली थी। यहां से अक्षय यादव ने सबसे अधिक वोट पाकर 73365 वोटों की लीड ली थी। 2017 में के विधानसभा चुनाव में मोदी की आंधी में भी सपा यहां से जीती थी। यहां से हरिओम यादव विधायक चुने गए थे। इस चुनाव में हरिओम यादव की बगावत भी सपा को भारी पड़ गई। हरिओम यादव ने शिवपाल का खुल कर समर्थन किया। यहां से शिवपाल यादव को सबसे अधिक 32703 वोट मिले हैं। शहीद की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के जरिए यहां सपा ने चुनाव से पहले अखिलेश यादव के साथ मुलायम सिंह यादव को एक मंच पर बुलाया था। 2014 में सपा को सिरसागंज से सबसे अधिक 133688 वोट मिले थे। जबकि इस बार यहां से 78419 वोट मिले। इस बार लीड 73364 वोट से सिमट कर मात्र 7326 वोट की रह गई।

जसराना में गच्चा खा गई सपा
जसराना को सपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन सपा यहां गच्चा खा गई। 2014 में सपा को यहां से बड़ी लीड मिली थी। अक्षय यादव ने यहां से 130761 वोट पाकर 47 हजार से अधिक वोट की लीड पाई थी। इस बार यहां से मात्र 4776 वोटों की लीड मिल सकी। 2014 के चुनाव में पांच बार सपा से विधायक रामवीर यादव सपा के साथ थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट कट जाने से रामवीर यादव ने बगावत कर भाजपा का दामन थाम लिया। यहां से भी शिवपाल यादव लगभग बीस हजार वोट पा गए।

शिकोहाबाद की लीड को बरकरार नहीं रख सकी सपा
शिकोहाबाद विधानसभा सीट से सपा जीती जरूर है, लेकिन 2014 की तुलना में लीड का अंतर यहां भी सिमट गया। 2014 में सपा को यहां से 29 हजार से अधिक की लीड मिली थी और इस बार मात्र 11577 की लीड मिली। 2014 में सपा को यहां से 104039 वोट मिले थे, इस बार 101350 वोट मिले हैं।

टूंडला -फिरोजाबाद में बसपा का साथ फिर भी पलटी बाजी
गठबंधन के बाद माना जा रहा था टूंडला विधानसभा क्षेत्र में सपा बाजी पलट देगी। 2014 के चुनाव में इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में सपा को पराजय मिली थी, इस बार भी सपा पीछे रही। सदर विधानसभा सीट पर तो भाजपा की लीड का अंतर तीन गुना हो गया। 2014 में भाजपा को यहां से 4395 की लीड मिली थी इस बार 1297 की लीड मिली है। टूंडला में 2014 की तुलना में लीड का अंतर कुछ घट गया। 2014 में यहां से भाजपा को 31077 वोट की लीड मिली थी इस बार आंकड़ा 29518 वोट का रहा।

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