{"_id":"88e2e2bb27629036782a9182f1375b57","slug":"131-years-after-the-arrival-of-lakshmi-will-mahasnyog-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"131 साल बाद महासंयोग में होगा लक्ष्मी का आगमन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
131 साल बाद महासंयोग में होगा लक्ष्मी का आगमन
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Wed, 04 Nov 2015 10:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐश्वर्य और धन की देवी महालक्ष्मी जी की आराधना का पर्व दीपावली पर इस बार दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। यह योग सभी के लिए शुभ फल देने वाला है। इस योग में गुरू और राहु के साथ रहते हुए सौभाग्य, बुधादित्य और धाता योग बनेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में लक्ष्मी पूजा करने से सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति व्यापार में उन्नति मिलेगी। वर्तमान में गुरु, सिंह राशि और राहु, कन्या राशि में भ्रमणरत हैं। दीपावली पर विशाखा नक्षत्र में इन दोनों के साथ सौभाग्य, बुधादित्य और धाता योग बन रहा है। इस योग में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। श्री बिहारी जी मंदिर के मुख्य महंत पं. मुन्नालाल शास्त्री ने बताया कि विशाखा नक्षत्र में इन दोनों के साथ 131 साल बाद सौभाग्य, बुधादित्य और धाता योग बन रहा है। 11 नवंबर को पड़ने वाली दीपावली लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि लाएगी।
यह है योग की विशेषताएं
सौभाग्य योग- लक्ष्मी सौभाग्य का कारक है। सौभाग्य योग में दीपावली अधिक शुभ होगी। इसका अधिक प्रभाव प्रोफेशनल लोगों पर पड़ेगा।
बुधादित्य योग- सूर्य और बुध के साथ युति योग बनने पर बुधादित्य योग बनता है। यह योग राजयोग कहलाता है। इस योग में कोई कार्य करने से श्रेष्ठता आती है। विद्यार्थियों का इस योग में पूजा करना फलदायी होता है।
धाता योग- धाता योग को सौभाग्य और बुधादित्य योग का पूरक माना जाता है। इस योग के कारण सोना, चांदी, खाद्य पदार्थ और वाहन आदि के व्यापार में तेजी रहेगी। लोग इन सामानों की ज्यादा खरीदारी करेंगे।
विज्ञापन
धनतेरस से पहले पुष्य नक्षत्र
दीपावली से पहले और बाद में आ रहे विशेष पर्वों पर खरीदारी के शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और खरीदारों के साथ-साथ व्यापारियों की दीपावली भी काफी अच्छी मनेगी। धनतेरस से पहले मंगलवार को पुष्य नक्षत्र होने से इस दिन बाजार में खरीदारी का जोर रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस योग में नए कार्य का शुभारंभ, सोना की खरीद शुभ व चिर स्थाई रहती है।
किस पर्व पर क्या खरीदना श्रेष्ठ रहेगा
पुष्य नक्षत्र- गुरू चंद्रमा के द्वितीय द्वादश होने से सोने, चांदी, वाहन खरीदना श्रेष्ठ।
धनतेरस- कन्या का चंद्रमा होने से जवाहरात, वाहन की खरीद के लिए सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा।
रुप चतुर्दशी- तुला का चंद्रमा और सूर्य चंद्र की युति होने से सोना खरीदना शुभ।
दीपावली- तुला का चंद्रमा रहने और स्वाति नक्षत्र होने से चांदी की मांग बढ़ेगी।
लाभ पंचमी- 16 नवंबर को धनु का चंद्र होने से सोने की खरीदारी उत्तम रहेगी।
देवउठनी एकादशी- 22 नवंबर को मीन का चंद्र होने से वाहन, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की खरीद श्रेष्ठ रहेगी।
ऐसा योग बना था साल 1884 में
ज्योतिषियों की माने तो इस बार जैसा योग बन रहा है। वैसा ही योग साल 1884 में बना था। इस दीपावली के बाद अब यह योग साल 2145 में बनेगा। इस योग के कारण लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए गए काम और उपायों से सफलता मिलेगी। इसके साथ दीपावली में सौभाग्य योग है। जिसमें लक्ष्मी कारक हैं और सौभाग्य योग में दीपावली पड़ने से यह अधिक शुभ होगी। इसके साथ ही बुधादित्य योग है जो सूर्य और बुध के साथ युति बनने पर बुधादित्य योग बनता है। यह योग राजयोग कहलाता है। इस योग में किसी भी कार्य को करने से श्रेष्ठता प्राप्त होती है और धाता योग भी है जिसे सौभाग्य और बुधादित्य योग का पूरक माना गया है। माना जा रहा है कि इस योग के कारण सोना, चांदी, खाद्य पदार्थ और वाहन आदि के व्यापार में तेजी रहेगी। इस बार की दीपावली व्यापारियों के लिए बहुत ही शुभ है।
विज्ञापन
यह है योग की विशेषताएं
सौभाग्य योग- लक्ष्मी सौभाग्य का कारक है। सौभाग्य योग में दीपावली अधिक शुभ होगी। इसका अधिक प्रभाव प्रोफेशनल लोगों पर पड़ेगा।
बुधादित्य योग- सूर्य और बुध के साथ युति योग बनने पर बुधादित्य योग बनता है। यह योग राजयोग कहलाता है। इस योग में कोई कार्य करने से श्रेष्ठता आती है। विद्यार्थियों का इस योग में पूजा करना फलदायी होता है।
विज्ञापन
धाता योग- धाता योग को सौभाग्य और बुधादित्य योग का पूरक माना जाता है। इस योग के कारण सोना, चांदी, खाद्य पदार्थ और वाहन आदि के व्यापार में तेजी रहेगी। लोग इन सामानों की ज्यादा खरीदारी करेंगे।
विज्ञापन
धनतेरस से पहले पुष्य नक्षत्र
दीपावली से पहले और बाद में आ रहे विशेष पर्वों पर खरीदारी के शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और खरीदारों के साथ-साथ व्यापारियों की दीपावली भी काफी अच्छी मनेगी। धनतेरस से पहले मंगलवार को पुष्य नक्षत्र होने से इस दिन बाजार में खरीदारी का जोर रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस योग में नए कार्य का शुभारंभ, सोना की खरीद शुभ व चिर स्थाई रहती है।
किस पर्व पर क्या खरीदना श्रेष्ठ रहेगा
पुष्य नक्षत्र- गुरू चंद्रमा के द्वितीय द्वादश होने से सोने, चांदी, वाहन खरीदना श्रेष्ठ।
धनतेरस- कन्या का चंद्रमा होने से जवाहरात, वाहन की खरीद के लिए सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा।
रुप चतुर्दशी- तुला का चंद्रमा और सूर्य चंद्र की युति होने से सोना खरीदना शुभ।
दीपावली- तुला का चंद्रमा रहने और स्वाति नक्षत्र होने से चांदी की मांग बढ़ेगी।
लाभ पंचमी- 16 नवंबर को धनु का चंद्र होने से सोने की खरीदारी उत्तम रहेगी।
देवउठनी एकादशी- 22 नवंबर को मीन का चंद्र होने से वाहन, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की खरीद श्रेष्ठ रहेगी।
ऐसा योग बना था साल 1884 में
ज्योतिषियों की माने तो इस बार जैसा योग बन रहा है। वैसा ही योग साल 1884 में बना था। इस दीपावली के बाद अब यह योग साल 2145 में बनेगा। इस योग के कारण लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए गए काम और उपायों से सफलता मिलेगी। इसके साथ दीपावली में सौभाग्य योग है। जिसमें लक्ष्मी कारक हैं और सौभाग्य योग में दीपावली पड़ने से यह अधिक शुभ होगी। इसके साथ ही बुधादित्य योग है जो सूर्य और बुध के साथ युति बनने पर बुधादित्य योग बनता है। यह योग राजयोग कहलाता है। इस योग में किसी भी कार्य को करने से श्रेष्ठता प्राप्त होती है और धाता योग भी है जिसे सौभाग्य और बुधादित्य योग का पूरक माना गया है। माना जा रहा है कि इस योग के कारण सोना, चांदी, खाद्य पदार्थ और वाहन आदि के व्यापार में तेजी रहेगी। इस बार की दीपावली व्यापारियों के लिए बहुत ही शुभ है।