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यमुना पुल के निर्माण में रोड़ा बने जमीन के नीचे के पत्थर
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किशनपुर की ओर बन रहे यमुना पुल के पिलर। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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किशनपुर। 91 फीसदी बनकर तैयार हो चुके यमुना पुल के निर्माण पत्थर का रोड़ा फंस गया है। महज तीन पिलर खड़े होने में ये पत्थर रोड़ा बने हैं। जिन्हें हटाने में इंजीनियरों की टीम के भी पसीने छूट रहे हैं। माना जा रहा है कि मार्च 2022 तक पुल का काम खत्म हो सकता है।
खागा तहसील क्षेत्र को बांदा जनपद से जोड़ने वाला किशनपुर का यमुना पुल अब तक तैयार नहीं हो सका है। जबकि 91 फीसदी काम सेतु निगम द्वारा खत्म कर लिया गया है। नदी में पिलर और उन पर पुल व रेलिंग का काम समाप्त हो चुका है। महज तीन पिलर किशनपुर की ओर नहीं खड़े हो पा रहे हैं। बरसात में अभी तक नदी का जलस्तर बढ़ जाने के कारण निर्माण कार्य बंद था और अब फिर से शुरू हुआ है। तीन पिलर निर्माण में हो रही देरी को लेकर पता किया गया तो जानकारी हुई कि तीन पिलर जिस स्थान पर बनाए जा रहे हैं। जमीन के काफी नीचे पत्थरों का जबरदस्त भंडार है। इन्हें काटकर बाहर निकालने में समय लग रहा है।
सेतु निगम द्वारा इसके लिए तीन इंजीनियरों की अलग टीम भी तैनात की गई है। जिससे काम जल्द से जल्द खत्म हो सके। बताया गया कि पत्थरों को काटकर निकाला जा रहा है। अनुमान के तहत मार्च 2022 तक पिलर निर्माण व उस पर पुल बनाने का काम खत्म हो सकता है। इसके बाद लोक निर्माण विभाग द्वारा एप्रोच बनाने का काम शुरू होगा। बता दें कि वर्ष 2017 में पुल निर्माण शुरू हुआ था। इसकी कुल लागत 9186.80 लाख रुपए हैं। इसमें सेतू निगम का बजट 7501.76 लाख व लोक निर्माण विभाग का बजट 1684.94 लाख रुपए है।
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खागा तहसील क्षेत्र को बांदा जनपद से जोड़ने वाला किशनपुर का यमुना पुल अब तक तैयार नहीं हो सका है। जबकि 91 फीसदी काम सेतु निगम द्वारा खत्म कर लिया गया है। नदी में पिलर और उन पर पुल व रेलिंग का काम समाप्त हो चुका है। महज तीन पिलर किशनपुर की ओर नहीं खड़े हो पा रहे हैं। बरसात में अभी तक नदी का जलस्तर बढ़ जाने के कारण निर्माण कार्य बंद था और अब फिर से शुरू हुआ है। तीन पिलर निर्माण में हो रही देरी को लेकर पता किया गया तो जानकारी हुई कि तीन पिलर जिस स्थान पर बनाए जा रहे हैं। जमीन के काफी नीचे पत्थरों का जबरदस्त भंडार है। इन्हें काटकर बाहर निकालने में समय लग रहा है।
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सेतु निगम द्वारा इसके लिए तीन इंजीनियरों की अलग टीम भी तैनात की गई है। जिससे काम जल्द से जल्द खत्म हो सके। बताया गया कि पत्थरों को काटकर निकाला जा रहा है। अनुमान के तहत मार्च 2022 तक पिलर निर्माण व उस पर पुल बनाने का काम खत्म हो सकता है। इसके बाद लोक निर्माण विभाग द्वारा एप्रोच बनाने का काम शुरू होगा। बता दें कि वर्ष 2017 में पुल निर्माण शुरू हुआ था। इसकी कुल लागत 9186.80 लाख रुपए हैं। इसमें सेतू निगम का बजट 7501.76 लाख व लोक निर्माण विभाग का बजट 1684.94 लाख रुपए है।
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