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तीन महीने के भीतर 11 एचआईवी पाजीटिव

Sun, 27 Mar 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sun, 27 Mar 2016 12:10 AM IST
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Within three months, 11 HIV-positive
dd - फोटो : getty images

एड्स का खतरनाक जबड़ा साल-दर-साल फैलता जा रहा है। हर महीने कोई न कोई एचआईवी पॉजीटिव की जमात में खड़ा हो रहा है। महज तीन महीने के अंदर ही 11 लोग एचआईवी से ग्रसित पाए गए हैं। तमाम जागरूकता के बाद भी इसमें गिरावट नहीं आ पा रही है। असुरक्षित यौन संबंध जिंदगी मेें लगातार जहर घोल रहे हैं। इस जहर का शिकार नौनिहाल भी हो रहे हैं।

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सदर अस्पताल के एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केेंद्र (आईसीटीसी) का यह खुलासा जागरूकता कार्यक्रमों को तमाचा जड़ने का काम कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2011-12 मेें कराई गई जांचों में 39 एचआईवी पाजीटिव सामने आए। वित्तीय वर्ष 2012-13 मेें यह संख्या जरूर घटी, लेकिन इतनी नहीं कि संतोष व्यक्त किया जा सके।
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इस वित्तीय वर्ष में 37 एचआईवी ग्रसित चिह्नित हुए। वित्तीय वर्ष 2013-14 में इस खतरनाक बीमारी के जबड़े में जाने वाली संख्या में उछाल आई। इस वित्तीय वर्ष में 49 एचआईवी पाजीटिव पाए गए। वित्तीय वर्ष 2014-15 में भी 48 एचआईवी के रोगी सामने आए।
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चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में मार्च महीने तक 35 लोग एड्स के जबड़े का शिकार हो चुके हैं। चालू साल के तीन महीने के रिकार्ड पर निगाह दौड़ाएं तो 22 मार्च तक आईसीटीसी ने 11 एचआईवी रोगी निकले। इसमें जनवरी में एक महिला में एचआईवी पाया गया। फरवरी महीने में एक पुरुष व दो महिला एचआईवी ग्रसित मिलीं। जबकि मार्च में अब तक सात रोगी इस बीमारी के चिह्नित हो चुके हैं। जिसमें चार पुरुष व दो महिलाओं के साथ एक बच्चा भी शामिल है।

फतेहपुर। एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र ने चालू महीने में अब तक 755 लोगों की जांच की। राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के विशेष अभियान में हाल ही में जिला कारागार मेें भी कैंप लगाया गया। इस कैंप मेें 266 कैदियों का परीक्षण किया गया। जिसमें एक कैदी एचआईवी पाजीटिव निकला। आईसीटीसी के काउंसलर अतुल जायसवाल कहते हैं कि पहले की अपेक्षा इधर के सालों में जांच के लिए लोग ज्यादा संख्या में सामने आ रहे हैं। यह अच्छी बात है। यह ऐसी बीमारी है जिसे छिपा कर जिंदगी बचाना संभव नहीं है।


पिछड़े जिले में रोजगार के साधन नाममात्र होने से एचआईवी का खतरा कुछ ज्यादा ही मंडरा रहा है। गंगा व यमुना की पट्टी में बसे गांवों के लोग रोजी-रोटी के लिए महानगराें का रुख कर रहे हैं। यकीनन इन लोगों की आर्थिक जरूरतें तो पूरी हो रही हैं लेकिन इसी के साथ उन्हेें यह गंभीर बीमारी भी बर्दाश्त करनी पड़ रही है। नेहरू युवा केंद्र टीसी के प्रबंधक राजेंद्र साहू का कहना है कि एचआईवी ग्रसित आंकड़े इनसे भी ज्यादा है। भिटौरा ब्लाक के ही एक गांव में एड्स रोगियों की खासी जमात है।

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