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Fatehpur News: बदला मौसम, बारिश ने किसानों की उड़ाई नींद
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फतेहपुर। बदले मौसम के बाद हुई बारिश ने किसानों की नींद उड़ा दी है। कोल्ड स्टोर के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों एवं खेतों का आलू भीग गया। पहले से ही भंडारण की समस्या से जूझ रहे किसानों के सामने अब आलू सड़ने से बचाने की भी चुनौती है। हालांकि इस बारिश से गेहूं की फसल में नुकसान नहीं हुआ है। अगर ज्यादा बारिश और ओलावृष्टि होती है तो नुकसान होगा।
दो दिन से मौसम में बदलाव का असर जिले भर में रहा। शनिवार दोपहर बारिश शुरू हो गई। पहले लागत से कम दाम, फिर भंडारण की समस्या के बीच बारिश ने आलू किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस बार 2.15 लाख एमटी आलू का उत्पादन हुआ है। यहां 17 कोल्ड स्टोर में 1.49 लाख एमटी भंडारण की क्षमता है। इसके सापेक्ष करीब 1.12 लाख एमटी आलू भंडारित हुआ है। हालांकि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व खेतों में नजर आ रहा आलू इन दावों पर खरा नहीं उतर रहा है।
पहली बार आलू बोने वाले किसानों को टोकन न मिलने से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़़ा। कोल्ड स्टोर के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों एवं खेतों में लगा आलू भीग गया। खेतों में लगे सरसों, चना की कटी फसल भी भीग गई। हवाओं के कारण गेहूं की फसल गिर गई। विभागीय अधिकारी का कहना है कि इस बारिश से गेहूं को नुकसान नहीं हुआ है। इसके अधिक बारिश होती है तो फसलों को नुकसान होगा।
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औने-पौने दाम पर बेचना होगा आलू
खरसोला निवासी किसान राकेश लोधी ने कहा कि दो बीघा आलू लगाया था। तीन दिन से आलू भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर में लाइन लगाए हैं। बारिश में आलू भीग गया है। अब सड़ने की चिंता सताने लगी है। लक्ष्मणपुर निवासी किसान बृजेंद्र कुमार का आलू खेत में डंप है। बृजेंद्र का कहना है कि भंडारण के लिए स्टोर से टोकन नहीं मिल रहा है। बारिश से बचाने के लिए तिरपाल से ढक दिया है। रसूलाबाद निवासी गुड्डू यादव का कहना है कि एक ट्राली लेकर स्टोर जाते हैं, तो तीन दिन तक लाइन लगानी पड़ती है। चार ट्राली आलू खेत में पड़ा है। इसे जमा करने के लिए 15 दिन का समय लगेगा।
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दो दिन से मौसम में बदलाव का असर जिले भर में रहा। शनिवार दोपहर बारिश शुरू हो गई। पहले लागत से कम दाम, फिर भंडारण की समस्या के बीच बारिश ने आलू किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस बार 2.15 लाख एमटी आलू का उत्पादन हुआ है। यहां 17 कोल्ड स्टोर में 1.49 लाख एमटी भंडारण की क्षमता है। इसके सापेक्ष करीब 1.12 लाख एमटी आलू भंडारित हुआ है। हालांकि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व खेतों में नजर आ रहा आलू इन दावों पर खरा नहीं उतर रहा है।
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पहली बार आलू बोने वाले किसानों को टोकन न मिलने से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़़ा। कोल्ड स्टोर के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों एवं खेतों में लगा आलू भीग गया। खेतों में लगे सरसों, चना की कटी फसल भी भीग गई। हवाओं के कारण गेहूं की फसल गिर गई। विभागीय अधिकारी का कहना है कि इस बारिश से गेहूं को नुकसान नहीं हुआ है। इसके अधिक बारिश होती है तो फसलों को नुकसान होगा।
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औने-पौने दाम पर बेचना होगा आलू
खरसोला निवासी किसान राकेश लोधी ने कहा कि दो बीघा आलू लगाया था। तीन दिन से आलू भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर में लाइन लगाए हैं। बारिश में आलू भीग गया है। अब सड़ने की चिंता सताने लगी है। लक्ष्मणपुर निवासी किसान बृजेंद्र कुमार का आलू खेत में डंप है। बृजेंद्र का कहना है कि भंडारण के लिए स्टोर से टोकन नहीं मिल रहा है। बारिश से बचाने के लिए तिरपाल से ढक दिया है। रसूलाबाद निवासी गुड्डू यादव का कहना है कि एक ट्राली लेकर स्टोर जाते हैं, तो तीन दिन तक लाइन लगानी पड़ती है। चार ट्राली आलू खेत में पड़ा है। इसे जमा करने के लिए 15 दिन का समय लगेगा।