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साल दर साल सरकता जा रहा है भूगर्भ जलस्तर का ग्राफ
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कुएं में कुछ इस तरह छह सबमर्शिबल के डाले गए पाइप
- फोटो : fatehpur
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फतेहपुर। अति दोहन से पानी की बर्बादी लोगों के लिए कुछ ही वर्षों में बड़ा संकट खड़ा करने वाली है। जिले में भूगर्भ जल की स्थिति साल दर साल भयावह होती जा रही है। हालात इस कदर दुश्वार हो चले हैं कि गंगा और यमुना जैसी दो महत्वपूर्ण नदियों के बीच बसे होने के बावजूद दोआबा की धरती की कोख सूख रही है। भूगर्भ जल विभाग के तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले का जलस्तर हर साल एक-एक मीटर नीचे खिसक रहा है। जनपद में पिछले तीन साल में भूगर्भ जलस्तर तीन मीटर तक नीचे जा चुका है।
सरकारी स्तर पर पूरे जिले में बोरिंग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, फिर भी हालात जस के तस हैं। यहीं कारण हैं कि हर साल हैंडपंपों और नलकूपों की बोरिंग की गहराई बढ़ती जा रही है। बारिश के जरा सा मुंह मोड़ने पर पानी का जबरदस्त संकट हो जाता है।
पानी की बेशुमार बर्बादी भूगर्भ जल के स्तर को धीरे-धीरे दूर करती जा रही है। जनपद में भूगर्भ जल की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के भूगर्भ जल विभाग की इकाई भी समाप्त हो चुकी है। जिसके चलते इसके आंकड़े मिल पाना संभव नहीं हो पाता है। पानी के लगातार दोहन से गंगा किनारे बसा भिटौरा विकास खंड पर अति
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दोहित घोषित चुका है। अन्य ब्लाकों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। जल स्तर घटने का ही कारण है कि प्रतिवर्ष जिले में तीन से चार हजार हैंडपंपों का रिबोर होता है। ट्यूबवेलों की भी यही दशा होती है। खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जिलाधिकारी संजीव सिंह ने जनपद में वर्तमान भूगर्भ जल की दशा पता करने के लिए लघु सिंचाई विभाग को जिम्मेदारी दी है। जिसके तहत लघु सिंचाई विभाग न्याय पंचायतवार सर्वे कर रहा है।
ऐसे तय होते हैं क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल ब्लॉक
फतेहपुर। लघु सिंचाई के सहायक अभियंता एमपी सिंह ने बताया कि ऐसे ब्लॉक जिनमें 60 से 75 प्रतिशत तक जल का दोहन किया जा चुका होता है। उन्हें सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे ब्लॉक जिनमें 75 से 100 फीसदी तक भूगर्भ जल दोहित किया जा चुका है, उन्हें क्रिटिकल ब्लॉक की श्रेणी में रखा जाता है। जहां जल दोहन की सीमा 100 प्रतिशत के दायरे को भी पार कर गयी है, उन्हें अति दोहित क्षेत्र कहा जाता है। जनपद में भिटौरा ब्लॉक अति दोहित की श्रेणी में आने वाला इकलौता ब्लॉक है।
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इस तरह बिगड़ी ब्लाकों की स्थिति
फतेहपुर। लघु सिंचाई विभाग के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में सबसे पहले अमौली, हथगाम, हंसवा और मलवां क्रिटिकल की श्रेणी में थे। इसके बाद 2014 में अमौली, ऐरायां, धाता, बहुआ, हथगाम, हंसवा क्रिटिकल की स्थिति में आए। इसी साल तेलियानी, भिटौरा और मलवां अति दोहित की श्रेणी में आए।र असोथर ब्लाक अकेला सुरक्षित ब्लाक था। इसी वर्ष विजयीपुर, खजुहा और देवमई सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में थे। 2017 में विजयीपुर, असोथर, खजुहा, देवमई सेमी क्रिटिकल में आकर सुरक्षित हो गए। हथगाम क्रिटिकल से सेमी क्रिटिकल हो गया। मलवां और तेलियानी अति दोहित से क्रिटिकल में आ गए। धाता, ऐरायां, हंसवा, बहुआ, अमौली में कोई परिवर्तन नहीं हुआ और ये क्रिटिकल की श्रेणी में ही बने रहे। हलांकि 2017 के बाद से कोई सर्वे नहीं हुआ है। जिससे मौजूदा स्थितियों का आंकलन हो सके।
जनपद में गिरते जलस्तर में सुधार लाने के लिए जिलेभर में नए सिरे से 134 तालाबों का निर्माण करवाया जा रहा है। तालाबों के साथ ही पौधरोपण भी विशेष फोकस है, ताकि मिट्टी के कटाव का रोका जा सके। जिल में मनरेगा से प्रत्येक ग्राम पंचायत में तालाबों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। तालाबो का खास तरह से डिजाइन किया गया है ताकि उनमें पानी हर तरफ से आ सके और जलस्तर को बढ़ा सके। - संजीव सिंह, जिलाधिकारी
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सरकारी स्तर पर पूरे जिले में बोरिंग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, फिर भी हालात जस के तस हैं। यहीं कारण हैं कि हर साल हैंडपंपों और नलकूपों की बोरिंग की गहराई बढ़ती जा रही है। बारिश के जरा सा मुंह मोड़ने पर पानी का जबरदस्त संकट हो जाता है।
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पानी की बेशुमार बर्बादी भूगर्भ जल के स्तर को धीरे-धीरे दूर करती जा रही है। जनपद में भूगर्भ जल की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के भूगर्भ जल विभाग की इकाई भी समाप्त हो चुकी है। जिसके चलते इसके आंकड़े मिल पाना संभव नहीं हो पाता है। पानी के लगातार दोहन से गंगा किनारे बसा भिटौरा विकास खंड पर अति
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दोहित घोषित चुका है। अन्य ब्लाकों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। जल स्तर घटने का ही कारण है कि प्रतिवर्ष जिले में तीन से चार हजार हैंडपंपों का रिबोर होता है। ट्यूबवेलों की भी यही दशा होती है। खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जिलाधिकारी संजीव सिंह ने जनपद में वर्तमान भूगर्भ जल की दशा पता करने के लिए लघु सिंचाई विभाग को जिम्मेदारी दी है। जिसके तहत लघु सिंचाई विभाग न्याय पंचायतवार सर्वे कर रहा है।
ऐसे तय होते हैं क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल ब्लॉक
फतेहपुर। लघु सिंचाई के सहायक अभियंता एमपी सिंह ने बताया कि ऐसे ब्लॉक जिनमें 60 से 75 प्रतिशत तक जल का दोहन किया जा चुका होता है। उन्हें सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे ब्लॉक जिनमें 75 से 100 फीसदी तक भूगर्भ जल दोहित किया जा चुका है, उन्हें क्रिटिकल ब्लॉक की श्रेणी में रखा जाता है। जहां जल दोहन की सीमा 100 प्रतिशत के दायरे को भी पार कर गयी है, उन्हें अति दोहित क्षेत्र कहा जाता है। जनपद में भिटौरा ब्लॉक अति दोहित की श्रेणी में आने वाला इकलौता ब्लॉक है।
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इस तरह बिगड़ी ब्लाकों की स्थिति
फतेहपुर। लघु सिंचाई विभाग के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में सबसे पहले अमौली, हथगाम, हंसवा और मलवां क्रिटिकल की श्रेणी में थे। इसके बाद 2014 में अमौली, ऐरायां, धाता, बहुआ, हथगाम, हंसवा क्रिटिकल की स्थिति में आए। इसी साल तेलियानी, भिटौरा और मलवां अति दोहित की श्रेणी में आए।र असोथर ब्लाक अकेला सुरक्षित ब्लाक था। इसी वर्ष विजयीपुर, खजुहा और देवमई सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में थे। 2017 में विजयीपुर, असोथर, खजुहा, देवमई सेमी क्रिटिकल में आकर सुरक्षित हो गए। हथगाम क्रिटिकल से सेमी क्रिटिकल हो गया। मलवां और तेलियानी अति दोहित से क्रिटिकल में आ गए। धाता, ऐरायां, हंसवा, बहुआ, अमौली में कोई परिवर्तन नहीं हुआ और ये क्रिटिकल की श्रेणी में ही बने रहे। हलांकि 2017 के बाद से कोई सर्वे नहीं हुआ है। जिससे मौजूदा स्थितियों का आंकलन हो सके।
जनपद में गिरते जलस्तर में सुधार लाने के लिए जिलेभर में नए सिरे से 134 तालाबों का निर्माण करवाया जा रहा है। तालाबों के साथ ही पौधरोपण भी विशेष फोकस है, ताकि मिट्टी के कटाव का रोका जा सके। जिल में मनरेगा से प्रत्येक ग्राम पंचायत में तालाबों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। तालाबो का खास तरह से डिजाइन किया गया है ताकि उनमें पानी हर तरफ से आ सके और जलस्तर को बढ़ा सके। - संजीव सिंह, जिलाधिकारी