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27 साल की उम्र में 27 वाहनों के स्वामी हैं कामता
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कामता प्रसाद निषाद। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। मेहनत और खुद को स्थापित करने की इच्छा लिए एक 27 साल का युवक आज 27 चार पहिया वाहनों का स्वामी है। युवाओं को स्वरोजगार की प्रेरणा देने वाला यह युवक अपने सभी वाहनों को अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों से संबद्ध कर किराये पर चलवाता है। जिससे 27 वाहन चालकों को भी रोजगार मिल रहा है। हम बात कर रहे हैं उत्तरी गौतम नगर में रहने वाले कामता निषाद की।
कामता के पिता देवशरन निषाद कुसियापुर गांव में खेती करते हैं। कामता तीन भाई व तीन बहनें हैं। बताया कि काफी कम उम्र में ही उसने थरियांव में सड़क बनाने वाली कंपनी के अधिकारी की गाड़ी चलाने का काम शुरू किया था। इसके बाद एक सहकारिता बैंक अधिकारी की गाड़ी चलाने लगा। कामता का सेवा भाव देखर उस बैंक अधिकारी ने खुद डाउनपेमेंट जमाकर उसे बैंक से लोन दिला दिया। ताकि कामता स्वरोजगार कर सके। जिससे कामता ने पहली गाड़ी खरीदी। वह दिन भर बैंक अधिकारी की गाड़ी चलाता और रात में अपनी गाड़ी शादी समारोह में बुकिंग पर ले जाता।
धीरे-धीरे अपनी मेहनत की कमाई से एक दशक में कामता ने 27 गाड़ियां खरीद लीं। आज उनके पास 22 स्कार्पियो, पांच बुलेरो और एक इनोवो क्रिस्टा है। सभी वाहन टैक्सी परमिट पर अलग-अलग विभागों में संबद्घ हैं। इन वाहनों का वह तिमाही तकरीबन डेढ़ लाख रुपए टैक्स भी भरते हैं। कामता ने शहर के शांतिनगर में ऑटो पार्ट्स की दुकान भी खोल रखी है। कामता की मेहनत देखकर एक कार निर्माता कंपनी ने उन्हें 13 स्कार्पियो के लिए नए टायर भेंट किए हैं। एक किसान के बेटे ने जमीन से शुरूआत कर जिस मुकाम को पाया है। वह दूसरों के लिए सीखने लायक है।
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कामता के पिता देवशरन निषाद कुसियापुर गांव में खेती करते हैं। कामता तीन भाई व तीन बहनें हैं। बताया कि काफी कम उम्र में ही उसने थरियांव में सड़क बनाने वाली कंपनी के अधिकारी की गाड़ी चलाने का काम शुरू किया था। इसके बाद एक सहकारिता बैंक अधिकारी की गाड़ी चलाने लगा। कामता का सेवा भाव देखर उस बैंक अधिकारी ने खुद डाउनपेमेंट जमाकर उसे बैंक से लोन दिला दिया। ताकि कामता स्वरोजगार कर सके। जिससे कामता ने पहली गाड़ी खरीदी। वह दिन भर बैंक अधिकारी की गाड़ी चलाता और रात में अपनी गाड़ी शादी समारोह में बुकिंग पर ले जाता।
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धीरे-धीरे अपनी मेहनत की कमाई से एक दशक में कामता ने 27 गाड़ियां खरीद लीं। आज उनके पास 22 स्कार्पियो, पांच बुलेरो और एक इनोवो क्रिस्टा है। सभी वाहन टैक्सी परमिट पर अलग-अलग विभागों में संबद्घ हैं। इन वाहनों का वह तिमाही तकरीबन डेढ़ लाख रुपए टैक्स भी भरते हैं। कामता ने शहर के शांतिनगर में ऑटो पार्ट्स की दुकान भी खोल रखी है। कामता की मेहनत देखकर एक कार निर्माता कंपनी ने उन्हें 13 स्कार्पियो के लिए नए टायर भेंट किए हैं। एक किसान के बेटे ने जमीन से शुरूआत कर जिस मुकाम को पाया है। वह दूसरों के लिए सीखने लायक है।
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