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शिक्षक बनने का सपना चकनाचूर, दो सौ शिक्षामित्रों को नोटिस

Tue, 28 Apr 2015 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 28 Apr 2015 12:38 AM IST
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Two hundred Shicshamitron shattered dream of becoming a teacher notices

शैक्षिक अभिलेखों में गड़बड़ी की आशंका पर बेसिक शिक्षा विभाग ने दूसरे बैच के दो सौ शिक्षामित्रों को नोटिस थमा दिया है। सहायक शिक्षक पदों पर समायोजन से पूर्व विभाग ने शिक्षामित्रों से जवाब-तलब किया है। शिक्षामित्रों का फिलहाल सहायक अध्यापक बनने का सपना चकनाचूर होता दिख रहा है। सोमवार को स्कूल आवंटन का विकल्प भरने पहुंची महिला 110 महिला शिक्षामित्र व 90 पुरुष शिक्षामित्र नौकरी के बजाय नोटिस लेकर घर पहुंचीं। स्पष्टीकरण से विभाग के संतुष्ट न होने पर एफआईआर दर्ज कराने की भी चेतावनी दी गई है।

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गौरतलब है कि दूसरे बैच में 1750 शिक्षामित्रों ने दूरस्थ विधि से बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इन्हें 30 अप्रैल तक प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पर नियुक्ति दी जानी है। 20 अप्रैल को विकलांग और महिला मिलाकर कुल 1107 शिक्षामित्रों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था, जिसमें 1098 ने काउंसलिंग कराई थी। अगले दिन 21 अप्रैल को 608 पुरुष शिक्षामित्रों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था, जिसमें 573 ने काउंसलिंग कराई थी। इस तरह से कुल 1671 शिक्षामित्रों की काउंसलिंग हुई थी। सोमवार को 928 महिला और विकलांग शिक्षामित्रों को स्कूलों का विकल्प भराने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में बुलाया गया। शेष 110 अभ्यर्थियों के प्रस्ताव जिला बेसिक शिक्षा विभाग से गायब होने के कारण उनके शैक्षिक अभिलेख संदिग्ध होने की आशंका पर नोटिस भेजी गई हैं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में विकल्प भरने पहुंची महिला शिक्षामित्रों को जब सूची में नाम नहीं मिला, तो उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारियों से संपर्क किया। खंड शिक्षा अधिकारियों ने उन्हें फर्जी शैक्षिक अभिलेख होने का नोटिस थमा दिया। नोटिस मिलते ही शिक्षामित्रों के सपने चकनाचूर होते दिखे। नोटिस में उन्हें हफ्तेभर का समय देकर पक्ष रखने को कहा गया है। स्पष्टीकरण से विभाग के संतुष्ट न होने पर एफआईआर दर्ज कराने की भी चेतावनी दी गई है।
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इंसेट
आखिर दोष किसका
फतेहपुर। शिक्षामित्रों के चयन का प्रस्ताव जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा होने का प्रावधान है। चयन ग्राम पंचायत स्तर से प्रस्ताव तैयार करके बीएसए दफ्तर भेजा जाता है, जहां पर चयन की अंतिम मुहर बीएसए की लगती है। इसके बाद यह प्रस्ताव बीएसए दफ्तर में सुरक्षित रखे जाते हैं। ऐसी हालत में प्रस्ताव गायब होने पर शिक्षामित्र कहां से दोषी हो गए, यह सवाल खड़ा हो गया है। प्रस्ताव गायब होने के पीछे दोषी कौन है और उस पर क्या कार्रवाई होती है, इसे आने वाला समय बताएगा, लेकिन फिलहाल ऐसे शिक्षामित्रों की नौकरी खटाई में पड़ती नजर आ रही है।

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