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... तो इस मौसम मच्छरों से जूझेंगे लोग
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फतेहपुर। मानसून ने आहट दे दी है। इस वक्त से लेकर नवंबर तक डीडीटी का छिड़काव किया जाता है। इस बार ऐसा संभव नहीं लग रहा है। मलेरिया विभाग के पास छिड़काव के लिए पर्याप्त डीडीटी नहीं है। शासन को भेजी गई डिमांड अब तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में इस बार लोगों को मच्छरों से जूझना पड़ सकता है।
पिछले साल मलेरिया विभाग ने चार एमटी डीडीटी पाउडर की डिमांड भेजकर मच्छर जनित बीमारियों पर रोक लगाने का अभियान चलाया था। इस मर्तबा विभाग ने पांच एमटी पाउडर की डिमांड भेजी थी। यह मंजूर भी हो गई। तभी लॉकडाउन हो गया। इससे डीडीटी पाउडर नहीं मिल पाया। 15 मई से मलेरिया विभाग डीडीटी का छिड़काव शुरू कर देता है। पाउडर की उपलब्धता न होने से यह काम महीना गुजरने के बावजूद शुरू नहीं हो सका है। ऐसी दशा में 29 लाख की आबादी को मच्छरों से जूझना पड़ेगा। मौजूदा समय में मच्छरों की तादाद बढ़ रही है। मलेरिया से पीड़ित मिलने लगे हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि नवंबर महीने तक विभाग स्तर से डीडीटी का छिड़काव किया जाता है। लॉकडाउन की वजह से इस बार भेजी गई आपूर्ति नहीं मिल सकी। विभाग को बचे स्टॉक से काम चलाना पड़ेगा।
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पूजा वाली नहीं, मच्छर वाली अगरबत्ती चाहिए
मच्छर जनित बीमारियों से बचने की बरसात के दौरान ज्यादा कवायद होती है। परचून की दुकानों पर पूजा वाली अगरबत्ती से ज्यादा मच्छर मारने वाली अगरबत्ती की मांग है। शादीपुर चौराहे के प्रोविजन स्टोर संचालक अनिल गुप्ता बताते हैं कि पूजा की अगरबत्ती महीने में दो से तीन खपती हैं। मच्छर वाली अगरबत्ती के लोग महीने भर में आठ से 10 पैकेट ले जा रहे हैं।
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पिछले साल मलेरिया विभाग ने चार एमटी डीडीटी पाउडर की डिमांड भेजकर मच्छर जनित बीमारियों पर रोक लगाने का अभियान चलाया था। इस मर्तबा विभाग ने पांच एमटी पाउडर की डिमांड भेजी थी। यह मंजूर भी हो गई। तभी लॉकडाउन हो गया। इससे डीडीटी पाउडर नहीं मिल पाया। 15 मई से मलेरिया विभाग डीडीटी का छिड़काव शुरू कर देता है। पाउडर की उपलब्धता न होने से यह काम महीना गुजरने के बावजूद शुरू नहीं हो सका है। ऐसी दशा में 29 लाख की आबादी को मच्छरों से जूझना पड़ेगा। मौजूदा समय में मच्छरों की तादाद बढ़ रही है। मलेरिया से पीड़ित मिलने लगे हैं।
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जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि नवंबर महीने तक विभाग स्तर से डीडीटी का छिड़काव किया जाता है। लॉकडाउन की वजह से इस बार भेजी गई आपूर्ति नहीं मिल सकी। विभाग को बचे स्टॉक से काम चलाना पड़ेगा।
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पूजा वाली नहीं, मच्छर वाली अगरबत्ती चाहिए
मच्छर जनित बीमारियों से बचने की बरसात के दौरान ज्यादा कवायद होती है। परचून की दुकानों पर पूजा वाली अगरबत्ती से ज्यादा मच्छर मारने वाली अगरबत्ती की मांग है। शादीपुर चौराहे के प्रोविजन स्टोर संचालक अनिल गुप्ता बताते हैं कि पूजा की अगरबत्ती महीने में दो से तीन खपती हैं। मच्छर वाली अगरबत्ती के लोग महीने भर में आठ से 10 पैकेट ले जा रहे हैं।