{"_id":"57bde9a04f1c1bd02dd4f1e1","slug":"three-died-from-fever-many-still-suffer","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुखार से तीन की मौत, कई अभी पीड़ित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुखार से तीन की मौत, कई अभी पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:08 AM IST
विज्ञापन
hospital accident
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहपुर। जिले में बुधवार को बुखार से तीन बच्चों की मौत हो गई। बुखार से पीड़ित बालक और बालिका ने सदर अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया। हफ्ते भर के अंदर एक-एक कर चार मौतें होने से ग्रामीणों में दहशत है। कई पीड़ितों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों को बीमारी से बचाने का काम नहीं हो रहा है। जाफरगंज क्षेत्र के खदरी गांव निवासी एक बच्ची की भी बुखार से मौत हो गई।
विज्ञापन
यमुना तिरहार में बुखार और संक्रामक रोगों का कहर है। ब्लाक मुख्यालय असोथर में किलापर निवासी अर्जुन के सात साल के बेटे बऊवा को तीन दिन से बुखार आ रहा था। परिजन किशोर का प्राइवेट इलाज करा रहे थे। बुधवार की सुबह हालत बिगड़ने पर बऊवा के परिवार के लोग इलाज कराने सदर अस्पताल के लिए घर से निकले थे। थरियांव कस्बा से पहले सांसें थम गईं। इसी मोहल्ले में रहने वाले अशोक यादव की 10 साल की बेटी कोमल की जिंदगी खत्म हो गई। उसे मंगलवार की रात तेज बुखार आया था। रात जैसे-तैसे गुजारने के बाद कोमल के परिजन भी उसे सदर अस्पताल ला रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में दम निकल गया।
विज्ञापन
इसके अलावा शहर के एक नर्सिंगहोम में भर्ती होरी लाल के 10 साल के बेटे निर्मल की तबियत मेें सुधार होता न देख कर परिजन बुधवार को कानपुर के फारच्यून अस्पताल ले गए। इसी प्रकार से कस्बे के मनोज कुुमार बाजपेई की बेटी शिवानी (17) की हालत बिगड़ने पर कानपुर ले जाया गया है। बता दें कि मनोज के बेटे आदर्श को उर्सला में डेंगू होने की पुष्टि हुई थी। आदर्श हफ्ता भर पहले ही ठीक होकर घर लौटा है। जाफरगंज प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के गांव खदरी निवासी रामशंकर निषाद की पांच वर्षीय पुत्री शिवांगी को मंगलवार की रात विचित्र बुखार ने अपने आगोश में ले लिया। परिजन रात में घरेलू इलाज कराते रहे। सुबह जब मऊदेव के प्राइवेट अस्पताल ले गए तो डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन