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Fatehpur News: चुनाव से पहले दल बदलने का चला दौर
Fri, 12 Apr 2024 12:33 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Fri, 12 Apr 2024 12:33 AM IST
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फोटो-01-फतेहपुर जिले का नक्शा। (आरकाईव)
- जिले के चार दिग्गज नेता भाजपा में हो चुके शामिल, कांग्रेस और बसपा खेमे से हैं सभी, चारों सामान्य वर्ग से हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नेताओं का दल बदलने का सिलसिला तेजी से शुरू है। चुनावी बिगुल फुंकने के बाद से कांग्रेस के तीन और बसपा के एक बड़े नेता ने अपनी पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा के साथ हो लिए। चुनावी पंडित यह सिलसिला आगे भी चलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में भाजपा हर नाखुश को पार्टी से जोड़कर अपनी जीत के रास्ते को आसान समझ रही हो, लेकिन दल बदलने वालों से फायदा होगा या नुकसान। ये चुनाव के नतीजे ही बताएंगे।
जिले में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपना प्रत्याशी सबसे पहले घोषित करके उम्मीदवार के चयन में बाजी मारी है। उन्होंने तीसरी बार साध्वी निरंजन ज्योति पर अपना विश्वास जताया है। साध्वी भी लीड लेने की तैयारी के साथ मैदान में हैं और जनसंपर्क शुरू कर दिया है। उन्होंने अब तक आधे जनपद का दौरा कर लिया है। घर-घर लोगों से संपर्क भी कर रही हैं।
खासकर महिला मतदाताओं से नजदीकियां जताने के लिए घर में उनके साथ खाना बनाते तक दिखाई पड़ रही हैं। उनके प्रचार और मौन जन समर्थन को देखते हुए भी अन्य दलों के बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इसमें सबसे पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता व कुछ समय पहले तक लोकसभा में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में देखे जाने वाले विभाकर शास्त्री हैं।
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उन्होंने चुनाव से पहले जनपद में प्रवास किया। कई जगह दौरे किए, लेकिन कांग्रेस और सपा के गठबंधन के बाद यह अरमान दबा ही रह गया। वैसे भी जनपद में कांग्रेस का जनाधार अभी कमजोर है। सियासत की बदलती तस्वीर को देखते हुए विभाकर शास्त्री ने हाथ का साथ छोड़कर कमल को उठा लिया। उन्होंने पार्टी के प्रति आस्था दिखाई। इसी के बाद कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अखिलेश पांडेय भी भाजपा में आ गए।
इसी क्रम में बसपा से लोकसभा के संभावित उम्मीदवारों में आदित्य पांडेय का नाम शुमार है। वह बसपा से दमदार सांसद प्रत्याशी के रूप में देखे जा रहे थे। वह विधायक भी रह चुके हैं। सियासी गलियारों की चर्चा के अनुसार बसपा उनके नाम पर मंथन भी कर रही थी। ऐसे में ऐन वक्त पर लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के सामने भाजपा के हो गए।
उनके भाजपा में शामिल होने से भाजपा के कई दिग्गजों की आंख में भी किरकिरी हुई, लेकिन आलाकमान के फरमान के आगे सभी नतमस्तक हुए। भाजपा में शामिल हुए आदित्य पांडेय का जनपद कार्यालय में साध्वी निरंजन ज्योति ने स्वयं उनका अभिनंदन किया। दोनों ने एक-दूसरे को बधाई दी।
इसके बाद कांग्रेस के पुराने नेता देवेंद्र सिंह गौतम ने भी दो दिन पहले भाजपा का दामन थाम लिया। वह कांग्रेस से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। जनपद में अभी तक दूसरे दल से सिर्फ भाजपा में ही बड़े नेता जुड़े हैं। खास बात यह है कि चारों नेता सामान्य वर्ग के हैं। सामान्य वर्ग वैसे भी भाजपा का वोटर माना जाता है। ऐसे में यह भाजपा को कैसे लाभ दिला पाएंगे, ये काउंटिंग के बाद भी समझ में आएगा। हालांकि सपा से न कोई टूटा है और उसमें न कोई जुड़ा है।
-- इनसेट--
कांग्रेस का दामन छोड़कर बने विधायक
जनपद में दल बदलकर विधायक बनने वालों के भी नाम हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा कांग्रेस से टूटे नेता हैं। हुसैनगंज से वर्तमान विधायक ऊषा मौर्य ने 2014 में कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरीं थी। उसमें चौथे स्थान पर रहीं। उसके बाद सपा का दामन थामा। विधानसभा चुनाव 2022 में सपा के उम्मीदवार बनकर उतरी ऊषा मौर्या ने हुसैनगंज सीट से जीत दर्ज की। इसी तरह कांग्रेस से फतेहपुर के चेयरमैन रहे चंद्रप्रकाश लोधी ने भी सपा का दामन थामा और 2022 में शहर से विधायक चुने गए।
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- जिले के चार दिग्गज नेता भाजपा में हो चुके शामिल, कांग्रेस और बसपा खेमे से हैं सभी, चारों सामान्य वर्ग से हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नेताओं का दल बदलने का सिलसिला तेजी से शुरू है। चुनावी बिगुल फुंकने के बाद से कांग्रेस के तीन और बसपा के एक बड़े नेता ने अपनी पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा के साथ हो लिए। चुनावी पंडित यह सिलसिला आगे भी चलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में भाजपा हर नाखुश को पार्टी से जोड़कर अपनी जीत के रास्ते को आसान समझ रही हो, लेकिन दल बदलने वालों से फायदा होगा या नुकसान। ये चुनाव के नतीजे ही बताएंगे।
जिले में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपना प्रत्याशी सबसे पहले घोषित करके उम्मीदवार के चयन में बाजी मारी है। उन्होंने तीसरी बार साध्वी निरंजन ज्योति पर अपना विश्वास जताया है। साध्वी भी लीड लेने की तैयारी के साथ मैदान में हैं और जनसंपर्क शुरू कर दिया है। उन्होंने अब तक आधे जनपद का दौरा कर लिया है। घर-घर लोगों से संपर्क भी कर रही हैं।
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खासकर महिला मतदाताओं से नजदीकियां जताने के लिए घर में उनके साथ खाना बनाते तक दिखाई पड़ रही हैं। उनके प्रचार और मौन जन समर्थन को देखते हुए भी अन्य दलों के बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इसमें सबसे पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता व कुछ समय पहले तक लोकसभा में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में देखे जाने वाले विभाकर शास्त्री हैं।
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उन्होंने चुनाव से पहले जनपद में प्रवास किया। कई जगह दौरे किए, लेकिन कांग्रेस और सपा के गठबंधन के बाद यह अरमान दबा ही रह गया। वैसे भी जनपद में कांग्रेस का जनाधार अभी कमजोर है। सियासत की बदलती तस्वीर को देखते हुए विभाकर शास्त्री ने हाथ का साथ छोड़कर कमल को उठा लिया। उन्होंने पार्टी के प्रति आस्था दिखाई। इसी के बाद कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अखिलेश पांडेय भी भाजपा में आ गए।
इसी क्रम में बसपा से लोकसभा के संभावित उम्मीदवारों में आदित्य पांडेय का नाम शुमार है। वह बसपा से दमदार सांसद प्रत्याशी के रूप में देखे जा रहे थे। वह विधायक भी रह चुके हैं। सियासी गलियारों की चर्चा के अनुसार बसपा उनके नाम पर मंथन भी कर रही थी। ऐसे में ऐन वक्त पर लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के सामने भाजपा के हो गए।
उनके भाजपा में शामिल होने से भाजपा के कई दिग्गजों की आंख में भी किरकिरी हुई, लेकिन आलाकमान के फरमान के आगे सभी नतमस्तक हुए। भाजपा में शामिल हुए आदित्य पांडेय का जनपद कार्यालय में साध्वी निरंजन ज्योति ने स्वयं उनका अभिनंदन किया। दोनों ने एक-दूसरे को बधाई दी।
इसके बाद कांग्रेस के पुराने नेता देवेंद्र सिंह गौतम ने भी दो दिन पहले भाजपा का दामन थाम लिया। वह कांग्रेस से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। जनपद में अभी तक दूसरे दल से सिर्फ भाजपा में ही बड़े नेता जुड़े हैं। खास बात यह है कि चारों नेता सामान्य वर्ग के हैं। सामान्य वर्ग वैसे भी भाजपा का वोटर माना जाता है। ऐसे में यह भाजपा को कैसे लाभ दिला पाएंगे, ये काउंटिंग के बाद भी समझ में आएगा। हालांकि सपा से न कोई टूटा है और उसमें न कोई जुड़ा है।
कांग्रेस का दामन छोड़कर बने विधायक
जनपद में दल बदलकर विधायक बनने वालों के भी नाम हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा कांग्रेस से टूटे नेता हैं। हुसैनगंज से वर्तमान विधायक ऊषा मौर्य ने 2014 में कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरीं थी। उसमें चौथे स्थान पर रहीं। उसके बाद सपा का दामन थामा। विधानसभा चुनाव 2022 में सपा के उम्मीदवार बनकर उतरी ऊषा मौर्या ने हुसैनगंज सीट से जीत दर्ज की। इसी तरह कांग्रेस से फतेहपुर के चेयरमैन रहे चंद्रप्रकाश लोधी ने भी सपा का दामन थामा और 2022 में शहर से विधायक चुने गए।