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यहां भी गो सेवा के नाम पर चल रहा गोरखधंधा

Mon, 08 Aug 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Mon, 08 Aug 2016 01:46 AM IST
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The name of the service running too bossy teaser
गोशाला में बंधी गायें - फोटो : अमर उजाला
 गाय हमारी माता है, इसकी रक्षा और सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है, जैसे भाषणबाजी करने वाले गो रक्षक अपनी दुकानें चला रहे हैं। गोशालाओं में गायों की स्थिति बहुत ही बदतर है। न तो भरपेट चारा भूसा दिया जाता है और न ही उन्हें चिकित्सीय सुविधाएं मिलती हैं, जिससे आधे पेट गाय अपनी किस्मत पर आंसू बहाती हैं।
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केंद्र और प्रदेश सरकार गायों के पालन और सुरक्षा के लिए संस्थाओं को लाखों का बजट देती है, लेकिन कई गोशाला संचालक इसका बंदरबांट कर जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गोरक्षा के नाम पर दुकान चलाने वालों पर कड़ी नाराजगी जताई है। इस बिंदु को ध्यान में रखकर जब ‘अमर उजाला’ ने जिले में संचालित कुछ गोशालाओं का जायजा लिया तो बात में काफी हद तक दम दिखा। पेश है एक रिपोर्ट --
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चारा न मिलने से आधे पेट ही रहती गायें- हुसेनगंज। चंद्र लोक ग्रामोद्योग सेवा संस्थान की ओर से एक गोशाला संचालित है। यह गोशाला पिछले नौ वर्षों से चल रही है। कन्यादान में मिलने वाली और गोदान में मिलने वाली गायों को लोग यहां छोड़ जाते हैं। पुलिस की ओर से गोकशी के लिए पकड़ी गायों को भी यहां रखा जाता है।
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वर्तमान में 50 गाय हैं, यहां कई गायों की स्थिति दयनीय है। कई गाय दुबली हैं, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन्हें भरपेट चारा नहीं दिया जाता है। भिटौरा निवासी े गोसेवक भानू प्रकाश द्विवेदी कहते हैं कि वह गोसेवा करते हैं, उन्हें इसके लिए एक रुपया भी नहीं दिया जाता। संचालक ओम प्रकाश दुबे ने बताया कि नेताओं से चंदा लेकर गोशाला चलाते हैं। फिर भी जितना हो सकता है किया जाता है, सरकार से कोई सुविधा नहीं मिलती है।



आठ माह में 90 गायें चल बसीं- खागा। क्षेत्र के त्रिलोचनपुर गांव आश्रम के गोशाला की हालत बदतर होती जा रही है। चारे पानी की व्यवस्था न होने से गाय दम तोड़ रही है। गायें उपेक्षा का शिकार हो रही है। दान और भिक्षा से बमुश्किल गायों का पेट भरा जा रहा है। गांव के डूंगा आश्रम में ही गोशाला है, जिसमें करीब 85 गायें हैं। गायों की देखरेख के लिए छह मजदूर लगे हैं, जो पूरी तरह से व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। दाना, चारा और पानी की कोई खास व्यवस्था नहीं दिखी।


गांव सहित क्षेत्र के लोगों से मिले दान से ही किसी तरह गायों का पेट भरा जाता है। आश्रम संचालक ब्रह्मचारी अमर स्वरूप ने बताया कि गौशाला श्री श्री 1008 श्री स्वामी हरीश्वरानंद डूंगजी महाराज चलाते हैं, जो तीन-चार महीने में एक दो दिनों के लिए आते हैं, इनके यहां न रहने से गायों की देखभाल उतने अच्छे से नहीं हो पा रही है।




बताया कि चारे के अभाव में आठ माह में लगभग 90 गायाें की मौत हो चुकी है। पिछले सप्ताह एक बछड़ा और दो गायों की मौत हुई है। बताया कि तीन माह पहले दिल्ली के सत्यनारायण गुप्ता ने एक लाख रुपया गोशाला को दान में दिया था, जिससे चारे की व्यवस्था की गई थी। अब ग्रामीणों से मांगकर चारा खिलाया जा रहा है।  
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