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धूमधाम से मनाया गया रंगों का त्योहार होली

Sun, 08 Mar 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sun, 08 Mar 2015 12:26 AM IST
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The festival of colors celebrated

रंगों का त्योहार होली जिलेभर में परंपरागत तरीके से हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रंग बरसै चुनरवाली रंग बरसै, होली के दिन दिल मिल जाते हैं, रंगों में रंग खिल जाते हैं आदि गीतों की धुन पर जगह-जगह युवा थिरकते नजर आए।

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शहर में कई स्थानों पर बरसातने की तर्ज पर मटकी फोड़ होली के कार्यक्रम हुए, जिसे देखने के लिए बड़ी तादाद में लोग निर्धारित स्थानों पर जमा रहे।

शहर में होलिका दहन के साथ ही होली गीतों की धूम रही। अगले दिन शुक्रवार को सुबह शहर में 111 होलिका दहन स्थलों पर श्रद्धालु होली गीत गाते हुए पहुंचे और विधि विधान से होलिका की धूल उड़ाई और मौके पर वाद्ययंत्रों के साथ होली गीत के कार्यक्रम हुए।
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इसके साथ शुरू होली गीतों का कार्यक्रम अपरान्ह 2 बजे तक चला। रंग का दौर थमने के बाद लोगों का एक दूसरे घरों आकर गले मिलने के सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा। घरों में होली का मुख्य पकवान गुझिया के साथ तरह-तरह के व्यंजन  पकाए गए। इन्हीं व्यंजनों से आगंतुकों का स्वागत किया गया।
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शनिवार भी शहर में होली की धूम रही। गली कूचों में फिल्मी धुन पर होली गीतों में युवा थिरकते दिखाई पड़े। दोपहर बाद शहर के मुराइनटोला, राधानगर, तुराबअली के पुरवा में मटकी फोड़ होली कार्यक्रम का आयोजन गया, जिसमें रंग से भरी मटकी 20 से 25 फीट की उंचाई पर बीच सड़क पर लटकाई गई, जिसे युवाओं ने साथियों की सीढ़ी बनाकर मटकी तोड़ी। आयोजकों ने मटकी तोड़ने वाली ग्रुप को पुरस्कृत किया।


रंगों का त्योहार होने के कारण दोनों दिन शहर में शाम 5 बजे तक बाजार बंद रहे। पान गुटका तक की दुकानें बंद रहने के कारण लोगों को गली कूचों में खुली दुकानों में जाकर खरीददारी करनी पड़ी।


होली का पर्व उत्साह, उल्लास और उमंग के लिए जाना जाता है। इस बार होली में इन तीनों का ही अभाव दिखाई दिया। होली तो मनी लेकिन रश्मअदायगी को। महंगाई का दंश और समाज के मौजूदा हालात को देखते हुए ज्यादातर लोगों ने परिवार के साथ ही त्योहार का लुत्फ उठाना मुनासिब समझा। शायद यही वजह रही कि न सड़कें लाल हो सकीं और न ही राह चलते लोगोें पर छतों से रंगों की बरसात हुई।

शहर से लेकर गांवों तक होली का यही हाल रहा जबकि महज दशक भर पहले तक होली की रंगत इतनी चटख होती थी कि हफ्तों राह चलते लोगों के होली बीतने का अहसास कराती थी। अब यह बात नहीं रही है। गुरुवार होलिका दहन के बाद उड़ने वाली अबीर और गुलाल में कमी दिखाई दी। सड़कों पर रंग तो चला लेकिन एक दायरे तक। पिचकारी लिए बच्चे ही सड़कों में होली के रंग भरते नजर आए। छतों से बरसने वाला रंग भी इस बार देखने को कई मोहल्लों का भ्रमण करना पड़ा।

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