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फसल बर्बाद देख किसान ने लगा ली फांसी
fatehpur
Updated Thu, 03 May 2018 11:15 PM IST
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फतेहपुर। आंधी और बारिश से फसल को बर्बाद देख एक किसान ने गुरुवार सुबह फांसी लगा ली। किसान ने पचास हजार रुपये कर्ज लेकर फसल बोई थी। पुलिस ने शव को पेड़ से उतारने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
मामला गाजीपुर थानाक्षेत्र के गंभरी गांव का है। यहां के किसान रामधनी पासवान (62) एक बीघा खेत के मालिक थे। बटाई के खेत लेकर वह फसल की पैदावार करते थे। इस बार तीन बीघा में गेहूं की फसल बोई थी। बुधवार को उन्होंने फसल काटी और बोझ बांधकर वहीं खेत में छोड़ गए थे। गुरुवार सुबह खेत पहुंचे तो बोझ का अता-पता नहीं था। बोझ खुलकर इधर-उधर दूसरे खेतों में फैल गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो रामधनी सिर पकड़कर वहीं बैठ गया। इसके बाद काफी देर तक इधर-उधर परेशान हाल में घूमता रहा। दोपहर बाद ग्रामीणों ने बच्चा कश्यप की बाग में जामुन के पेड़ पर अंगोछे के सहारे रामधनी को लटके देखा तो शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास खेतों में मौजूद लोग पहुंचे। परिजन भी आ गए। पुलिस भी तब तक आ पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि रामधनी अकेले खेती का काम देखते थे। उनके तीन बेटे हैं लेकिन वह खेती से मतलब नहीं रखते थे।
बेटे होरीलाल ने बताया कि पिता ने फसल उगाने के लिए करीब पचास हजार रुपये लोगों से कर्ज ले रखा था। आंधी से फसल चौपट होना बर्दाश्त नहीं कर सके और खुदकुशी कर ली। एसओ धीरेंद्र सिंह ने बताया कि किसान गरीब तबके का है। कर्ज होने की बात सामने आई है। इसी वजह से फांसी लगाई है।
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मामला गाजीपुर थानाक्षेत्र के गंभरी गांव का है। यहां के किसान रामधनी पासवान (62) एक बीघा खेत के मालिक थे। बटाई के खेत लेकर वह फसल की पैदावार करते थे। इस बार तीन बीघा में गेहूं की फसल बोई थी। बुधवार को उन्होंने फसल काटी और बोझ बांधकर वहीं खेत में छोड़ गए थे। गुरुवार सुबह खेत पहुंचे तो बोझ का अता-पता नहीं था। बोझ खुलकर इधर-उधर दूसरे खेतों में फैल गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो रामधनी सिर पकड़कर वहीं बैठ गया। इसके बाद काफी देर तक इधर-उधर परेशान हाल में घूमता रहा। दोपहर बाद ग्रामीणों ने बच्चा कश्यप की बाग में जामुन के पेड़ पर अंगोछे के सहारे रामधनी को लटके देखा तो शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास खेतों में मौजूद लोग पहुंचे। परिजन भी आ गए। पुलिस भी तब तक आ पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि रामधनी अकेले खेती का काम देखते थे। उनके तीन बेटे हैं लेकिन वह खेती से मतलब नहीं रखते थे।
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बेटे होरीलाल ने बताया कि पिता ने फसल उगाने के लिए करीब पचास हजार रुपये लोगों से कर्ज ले रखा था। आंधी से फसल चौपट होना बर्दाश्त नहीं कर सके और खुदकुशी कर ली। एसओ धीरेंद्र सिंह ने बताया कि किसान गरीब तबके का है। कर्ज होने की बात सामने आई है। इसी वजह से फांसी लगाई है।
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