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Fatehpur News: हक और इंसाफ के लिए डटे रहने की सीख देता है वाक्या-ए-कर्बला
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फोटो-26-मुहर्रम की मजलिस में तकरीर करते मौलाना अनवार अहमद। संवाद
खागा। क्षेत्र के सुल्तानपुर घोष गांव में आठवीं मुहर्रम के मौके पर आयोजित मजलिस में शोहदा-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया। इस दौरान कर्बला की घटना और हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व उनके साथियों की कुर्बानियों को याद किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पेश इमाम सुल्तानपुर घोष कारी बिलाल नूरी ने नात-ओ-मनकबत पेश कर की। कारी मौलाना अनवार अहमद ने कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि कर्बला का वाक्या हक और बातिल के बीच फर्क को स्पष्ट करता है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने जुल्म और नाइंसाफी के सामने झुकने के बजाय इंसाफ और सच्चाई का रास्ता चुना।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम की नौवीं तारीख कर्बला की इतिहास में बेहद अहम है। कर्बला का संदेश पूरी इंसानियत के लिए है जो सिखाता है कि मुश्किल हालात में भी हक और इंसाफ का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। मजलिस में हजरत अब्बास अलमदार, हजरत अली अकबर, हजरत कासिम, औन-मोहम्मद और छह माह के शीरख्वार हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम की कुर्बानियों का भी जिक्र किया गया।
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कार्यक्रम की शुरुआत पेश इमाम सुल्तानपुर घोष कारी बिलाल नूरी ने नात-ओ-मनकबत पेश कर की। कारी मौलाना अनवार अहमद ने कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि कर्बला का वाक्या हक और बातिल के बीच फर्क को स्पष्ट करता है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने जुल्म और नाइंसाफी के सामने झुकने के बजाय इंसाफ और सच्चाई का रास्ता चुना।
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उन्होंने कहा कि मुहर्रम की नौवीं तारीख कर्बला की इतिहास में बेहद अहम है। कर्बला का संदेश पूरी इंसानियत के लिए है जो सिखाता है कि मुश्किल हालात में भी हक और इंसाफ का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। मजलिस में हजरत अब्बास अलमदार, हजरत अली अकबर, हजरत कासिम, औन-मोहम्मद और छह माह के शीरख्वार हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम की कुर्बानियों का भी जिक्र किया गया।

फोटो-26-मुहर्रम की मजलिस में तकरीर करते मौलाना अनवार अहमद। संवाद
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