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Fatehpur News: पहली तैनाती में ही एआरटीओ खा गए गच्चा
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फतेहपुर। जिले के एआरटीओ दफ्तर में भ्रष्टाचार के मामले थमते नहीं दिख रहे हैं। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप में पूर्व एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा का निलंबन हुआ था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी। इसके बाद 25 जनवरी को एआरटीओ प्रशासन की कमान रंजीत सिंह को सौंपी गई थी। इसके बाद भी उनकी ओर से भ्रष्टाचार पर नकेल नहीं कसी जा सकी।
रंजीत सिंह को एआरटीओ प्रशासन के पद पर पहली बार चार्ज मिला था। इससे पहले वह आंबेडकर नगर में आरआई के पद पर तैनात थे। पहली तैनाती में ही वह विभाग में चल रही व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में आ गए। कार्यालय में सामने होने वाले भ्रष्टाचार की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लग सका और यही उनके लिए परेशानी का कारण बना।
दरअसल, विभाग में जिला और शासन स्तर पर हर साल एक-दो बार निरीक्षण होता है। बीते कई सालों से निरीक्षण के दौरान खामियां मिलती रही हैं। दलाल पकड़े गए और मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन कुछ दिनों बाद कार्यालय फिर पुराने माहौल में नजर आने लगता है। विभाग में लंबे समय से चली आ रही इस अनदेखी का असर अब एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह पर कार्रवाई के रूप में सामने आया है।
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प्रवर्तन दल में भी हलचल
एआरटीओ प्रशासन पर कार्रवाई की खबर आने के बाद शाम से ही अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। एआरटीओ प्रवर्तन दल में संतोष कुमार सिंह प्रथम और द्वितीय प्रतीक मिश्रा हैं। दल के अधिकारियों के बीच भी कार्रवाई को लेकर चर्चाएं होती रहीं। माना जा रहा है कि फिलहाल प्रवर्तन दल के ही एक एआरटीओ को प्रशासन का चार्ज मिल सकता है।
एक साल पहले भ्रष्टाचार में एआरटीओ व पीटीओ हो चुके निलंबित
नवंबर 2025 में एसटीएफ की ओर से ओवरलोडिंग के मामले में थरियांव थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। प्राथमिकी में पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी, जिले के खनिज अधिकारी और खनिज अधिकारी का गनर राजू शामिल थे। वहीं, एसटीएफ ने तत्कालीन एआरटीओ प्रशासन व प्रवर्तन का कार्यभार संभाल रही पुष्पांजलि मित्रा के खिलाफ रायबरेली जिले के लालगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अधिकारियों की लोकेटरों से मिलीभगत होने का आरोप लगा था। सभी को निलंबित किया गया था।
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रंजीत सिंह को एआरटीओ प्रशासन के पद पर पहली बार चार्ज मिला था। इससे पहले वह आंबेडकर नगर में आरआई के पद पर तैनात थे। पहली तैनाती में ही वह विभाग में चल रही व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में आ गए। कार्यालय में सामने होने वाले भ्रष्टाचार की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लग सका और यही उनके लिए परेशानी का कारण बना।
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दरअसल, विभाग में जिला और शासन स्तर पर हर साल एक-दो बार निरीक्षण होता है। बीते कई सालों से निरीक्षण के दौरान खामियां मिलती रही हैं। दलाल पकड़े गए और मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन कुछ दिनों बाद कार्यालय फिर पुराने माहौल में नजर आने लगता है। विभाग में लंबे समय से चली आ रही इस अनदेखी का असर अब एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह पर कार्रवाई के रूप में सामने आया है।
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प्रवर्तन दल में भी हलचल
एआरटीओ प्रशासन पर कार्रवाई की खबर आने के बाद शाम से ही अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। एआरटीओ प्रवर्तन दल में संतोष कुमार सिंह प्रथम और द्वितीय प्रतीक मिश्रा हैं। दल के अधिकारियों के बीच भी कार्रवाई को लेकर चर्चाएं होती रहीं। माना जा रहा है कि फिलहाल प्रवर्तन दल के ही एक एआरटीओ को प्रशासन का चार्ज मिल सकता है।
एक साल पहले भ्रष्टाचार में एआरटीओ व पीटीओ हो चुके निलंबित
नवंबर 2025 में एसटीएफ की ओर से ओवरलोडिंग के मामले में थरियांव थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। प्राथमिकी में पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी, जिले के खनिज अधिकारी और खनिज अधिकारी का गनर राजू शामिल थे। वहीं, एसटीएफ ने तत्कालीन एआरटीओ प्रशासन व प्रवर्तन का कार्यभार संभाल रही पुष्पांजलि मित्रा के खिलाफ रायबरेली जिले के लालगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अधिकारियों की लोकेटरों से मिलीभगत होने का आरोप लगा था। सभी को निलंबित किया गया था।