{"_id":"6ac7f9c2c74de73b760084f4","slug":"before-navratri-the-idols-of-maa-durga-are-being-filled-with-color-and-aura-fatehpur-news-c-217-1-srv1001-164070-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehpur News: नवरात्र से पहले मां दुर्गा की प्रतिमाओं में भर रहे रंग और आभा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehpur News: नवरात्र से पहले मां दुर्गा की प्रतिमाओं में भर रहे रंग और आभा
विज्ञापन
फोटो-10-शहर के खंभापुर में मां की प्रतिमा को अंतिम रूप देते मंजीत। संवाद
फतेहपुर। शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से शुरू होंगे। मां के आगमन से पहले खंभापुर में उनकी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेज हो गया है। कहीं प्रतिमाओं पर रंग चढ़ाया जा रहा है तो कहीं मुकुट, आभूषण और वस्त्रों से उनका शृंगार किया जा रहा है।
बंगाल और बिहार से आए 14 कारीगर दिन-रात मेहनत कर मां दुर्गा की प्रतिमाओं में रंग और आभा भरने में जुटे हैं। शहर में पूजा समितियां भी पंडालों को अंतिम रूप देने में लगी हैं।
मंजीत भारती के नेतृत्व में चल रहे मूर्ति निर्माण में इस वर्ष 150 प्रतिमाओं का ऑर्डर मिला था, जिसे पूरा कर लिया गया है। मंजीत ने बताया कि वह करीब 18 वर्षों से दुर्गा प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। अब प्रतिमाओं पर रंग-रोगन और सजावट का अंतिम काम चल रहा है।
विज्ञापन
एक-दो दिन में सभी प्रतिमाएं पूरी तरह तैयार हो जाएंगी। यहां बनी प्रतिमाएं फतेहपुर शहर के अलावा प्रयागराज, रायबरेली और बाराबंकी तक भेजी जाती हैं। इनकी कीमत ढाई हजार से 25 हजार रुपये तक है।
-- -- -- -- -
चार माह पहले शुरू हो जाता है काम
कारीगरों ने बताया कि प्रतिमा तैयार करने का काम नवरात्र से करीब चार माह पहले शुरू हो जाता है। सबसे अधिक मेहनत मिट्टी जुटाने और ढांचा तैयार करने में लगती है। बांस और पुआल से ढांचा बनाने के बाद चिकनी, कजिला और बलुई मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। प्रतिमा को आकार देने के बाद सुखाया जाता है और फिर रंग-रोगन किया जाता है।
कृष्णानगर से आती है सजावट की सामग्री
मंजीत ने बताया कि प्रतिमाओं की साज-सज्जा में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश सामग्री पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से मंगाई जाती है। इसके लिए पहले ही ऑर्डर देना पड़ता है। प्रतिमा तैयार होने के बाद मुकुट, आभूषण, वस्त्र और अन्य सजावटी सामग्री लगाकर उसे आकर्षक रूप दिया जाता है।
बारिश से बढ़ा काम का समय
कारीगरों ने बताया कि इस बार अधिक बारिश के कारण मिट्टी की प्रतिमाओं को सूखने में सामान्य से ज्यादा समय लगा। इससे काम की गति प्रभावित हुई, लेकिन समय रहते सभी प्रतिमाएं तैयार कर ली गईं। मंजीत के साथ आजाद, शनी, मनीष, समीर, सोनू, रोहित और अंकित समेत 14 कारीगर अंतिम सजावट में जुटे हैं। नवरात्र शुरू होते ही पूजा पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी।
विज्ञापन
बंगाल और बिहार से आए 14 कारीगर दिन-रात मेहनत कर मां दुर्गा की प्रतिमाओं में रंग और आभा भरने में जुटे हैं। शहर में पूजा समितियां भी पंडालों को अंतिम रूप देने में लगी हैं।
विज्ञापन
मंजीत भारती के नेतृत्व में चल रहे मूर्ति निर्माण में इस वर्ष 150 प्रतिमाओं का ऑर्डर मिला था, जिसे पूरा कर लिया गया है। मंजीत ने बताया कि वह करीब 18 वर्षों से दुर्गा प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। अब प्रतिमाओं पर रंग-रोगन और सजावट का अंतिम काम चल रहा है।
विज्ञापन
एक-दो दिन में सभी प्रतिमाएं पूरी तरह तैयार हो जाएंगी। यहां बनी प्रतिमाएं फतेहपुर शहर के अलावा प्रयागराज, रायबरेली और बाराबंकी तक भेजी जाती हैं। इनकी कीमत ढाई हजार से 25 हजार रुपये तक है।
चार माह पहले शुरू हो जाता है काम
कारीगरों ने बताया कि प्रतिमा तैयार करने का काम नवरात्र से करीब चार माह पहले शुरू हो जाता है। सबसे अधिक मेहनत मिट्टी जुटाने और ढांचा तैयार करने में लगती है। बांस और पुआल से ढांचा बनाने के बाद चिकनी, कजिला और बलुई मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। प्रतिमा को आकार देने के बाद सुखाया जाता है और फिर रंग-रोगन किया जाता है।
कृष्णानगर से आती है सजावट की सामग्री
मंजीत ने बताया कि प्रतिमाओं की साज-सज्जा में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश सामग्री पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से मंगाई जाती है। इसके लिए पहले ही ऑर्डर देना पड़ता है। प्रतिमा तैयार होने के बाद मुकुट, आभूषण, वस्त्र और अन्य सजावटी सामग्री लगाकर उसे आकर्षक रूप दिया जाता है।
बारिश से बढ़ा काम का समय
कारीगरों ने बताया कि इस बार अधिक बारिश के कारण मिट्टी की प्रतिमाओं को सूखने में सामान्य से ज्यादा समय लगा। इससे काम की गति प्रभावित हुई, लेकिन समय रहते सभी प्रतिमाएं तैयार कर ली गईं। मंजीत के साथ आजाद, शनी, मनीष, समीर, सोनू, रोहित और अंकित समेत 14 कारीगर अंतिम सजावट में जुटे हैं। नवरात्र शुरू होते ही पूजा पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी।

फोटो-10-शहर के खंभापुर में मां की प्रतिमा को अंतिम रूप देते मंजीत। संवाद