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मंदिर ददुआ का, सुर्खियां बटोर रहे बालकुमार
ब्यूरो/ अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Fri, 05 Feb 2016 01:11 AM IST
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राजनीतिक जमीन देने के बाद अब दस्यु ददुआ के भाई पूर्व सांसद बाल कुमार
पटेल ने फतेहपुर का रुख किया है। वह अपने करीबियों के साथ धाता के
नरसिंहपुर कबरहा गांव में डेरा डाले हैं। मंदिर में 12 फरवरी तक भागवत,
भंडारा के आयोजन तो होने ही हैं, ददुआ और उसके परिजनों की मूर्ति स्थापना
की योजना भी है। समझा जाता है कि वह इसी बहाने यहां की जनता में पैठ बना
रहे हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में ददुआ ने वारदातें नहीं की हैं। इसी से
उसके नाम का यहां ज्यादा विरोध नहीं है और उसके सजातीय लोगों की संख्या भी
यहां ज्यादा है।
यह मंदिर दस्यु ददुआ ने पुलिस से बचने की मन्नत पूरी होने पर बनवाया था। अब इसे बाल कुमार पटेल आगे बढ़ा रहे हैं। माना जा रहा है कि नए साल में बाल कुमार ने इसी आयोजन के बहाने फतेहपुर में दमखम दिखाने की तैयारी की है।
ददुआ और उसके मां-पिता, पत्नी की मूर्ति स्थापना की बात ने बालकुमार को फतेहपुर प्रशासन ही नहीं, जनता के बीच भी चर्चा में ला दिया है।
पुलिस मुठभेड़ में आठ साल पहले मारे गए दस्यु शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ के भाई बालकुमार पटेल ने अपना राजनैतिक कॅरियर इलाहाबाद के करछना विधानसभा सीट से शुरू किया था। तब वह बसपा में थे। वह मिर्जापुर से पूर्व सांसद हैं।
फतेहपुर जिले की राजनीतिक बिसात पर नजर डालें तो इस जिले में कुर्मी और ब्राह्मण लगभग बराबर और क्षत्रिय कुछ ज्यादा हैं। इसके बावजूद राजनीतिक उठापटक में कुर्मी बिरादरी की भूमिका सबसे अहम होती है।
यहां से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह जनता दल से दो बार सांसद हुए। कुर्मी बिरादरी के अशोक पटेल भाजपा समर्थित दो बार सांसद रहे, महेंद्र निषाद व विश्वंभर निषाद एक-एक बार(दोनों बसपा से) और एक बार राकेश सचान सांसद रहे। इन दिनों भाजपा की साध्वी निरंजन ज्योति सांसद हैं।
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो फतेहपुर जिले की राजनीति में सिक्का अक्सर कुर्मी बिरादरी का ही चला है, जिधर घूमे, कुर्सी उधर ही गई। ऐसे में बालकुमार की एंट्री अहम मानी जा रही है। बालकुमार के लिए फतेहपुर एकदम नया नहीं है।
फतेहपुर में ददुआ की ससुराल धाता के घटईपुर गांव में है। ददुआ की बेटी चिरौंजी देवी धाता से ब्लाक प्रमुख रह चुकी हैं। इनकी परसिदपुर में ससुराल है। कबरहा मंदिर से परिवार की धाक पहले से इलाके में है।
पूर्व सांसद अपनी तैयार हो रही राजनीतिक जमीन के सवाल पर फिलहाल सीधा उत्तर देने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि अभी आयोजन है, सिर्फ इसे आयोजन के ही रूप में देखा जाए। समय आने पर पार्टी जैसा चाहेगी, वैसी भूमिका उनकी रहेगी।
यह मंदिर दस्यु ददुआ ने पुलिस से बचने की मन्नत पूरी होने पर बनवाया था। अब इसे बाल कुमार पटेल आगे बढ़ा रहे हैं। माना जा रहा है कि नए साल में बाल कुमार ने इसी आयोजन के बहाने फतेहपुर में दमखम दिखाने की तैयारी की है।
ददुआ और उसके मां-पिता, पत्नी की मूर्ति स्थापना की बात ने बालकुमार को फतेहपुर प्रशासन ही नहीं, जनता के बीच भी चर्चा में ला दिया है।
पुलिस मुठभेड़ में आठ साल पहले मारे गए दस्यु शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ के भाई बालकुमार पटेल ने अपना राजनैतिक कॅरियर इलाहाबाद के करछना विधानसभा सीट से शुरू किया था। तब वह बसपा में थे। वह मिर्जापुर से पूर्व सांसद हैं।
फतेहपुर जिले की राजनीतिक बिसात पर नजर डालें तो इस जिले में कुर्मी और ब्राह्मण लगभग बराबर और क्षत्रिय कुछ ज्यादा हैं। इसके बावजूद राजनीतिक उठापटक में कुर्मी बिरादरी की भूमिका सबसे अहम होती है।
यहां से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह जनता दल से दो बार सांसद हुए। कुर्मी बिरादरी के अशोक पटेल भाजपा समर्थित दो बार सांसद रहे, महेंद्र निषाद व विश्वंभर निषाद एक-एक बार(दोनों बसपा से) और एक बार राकेश सचान सांसद रहे। इन दिनों भाजपा की साध्वी निरंजन ज्योति सांसद हैं।
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो फतेहपुर जिले की राजनीति में सिक्का अक्सर कुर्मी बिरादरी का ही चला है, जिधर घूमे, कुर्सी उधर ही गई। ऐसे में बालकुमार की एंट्री अहम मानी जा रही है। बालकुमार के लिए फतेहपुर एकदम नया नहीं है।
फतेहपुर में ददुआ की ससुराल धाता के घटईपुर गांव में है। ददुआ की बेटी चिरौंजी देवी धाता से ब्लाक प्रमुख रह चुकी हैं। इनकी परसिदपुर में ससुराल है। कबरहा मंदिर से परिवार की धाक पहले से इलाके में है।
पूर्व सांसद अपनी तैयार हो रही राजनीतिक जमीन के सवाल पर फिलहाल सीधा उत्तर देने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि अभी आयोजन है, सिर्फ इसे आयोजन के ही रूप में देखा जाए। समय आने पर पार्टी जैसा चाहेगी, वैसी भूमिका उनकी रहेगी।