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Fatehpur News: छिवली में मिट्टी और पानी के 70 नमूने लेकर जांच में जुटी टीम
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फोटो-25-छिवली गांव में हैंडपंप से पानी का नमूना भरती जांच टीम। स्रोत: वीडियो ग्रैब
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औंग। क्षेत्र के छिवली गांव में बृहस्पतिवार को आईआईटी कानपुर और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयागराज की संयुक्त टीम ने मिट्टी और पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने एकत्र किए। टीम ने गांव के अलग-अलग स्थानों से मिट्टी के तीन और पानी के करीब 70 नमूने लिए।
टीम में आईआईटी कानपुर के इंजीनियर डॉ. तन्मय, प्रोजेक्ट हेड सुभाष प्रसाद और लैब अटेंडेंट डॉ. सोनू कुमार तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयागराज के अवर अभियंता राहुल और सतीश शामिल रहे। टीम ने विभिन्न स्थानों पर खोदाई कर भूतल की ऊपरी सतह, आधा मीटर और एक मीटर की गहराई से मिट्टी के नमूने लिए। पानी के नमूने भी एकत्र कर जांच के लिए सील करके अपने साथ ले गई।
आईआईटी कानपुर की टीम में शामिल इंजीनियर डॉ. तन्मय ने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें किसी तरह के प्रदूषण की स्थिति का पता लगाने के लिए सैंपलिंग की गई है। उन्होंने बताया कि छिवली गांव में भूजल का रंग हरा और पीला दिखाई देता है। इसे पीने योग्य नहीं बताया गया है। उन्होंने बताया कि पानी में क्रोमियम की अधिक मात्रा होने की बात सामने आई है।
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इससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं होने की आशंका है। इनमें पैरों में विकृति, हृदय संबंधी बीमारी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मिट्टी और पानी में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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टीम में आईआईटी कानपुर के इंजीनियर डॉ. तन्मय, प्रोजेक्ट हेड सुभाष प्रसाद और लैब अटेंडेंट डॉ. सोनू कुमार तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयागराज के अवर अभियंता राहुल और सतीश शामिल रहे। टीम ने विभिन्न स्थानों पर खोदाई कर भूतल की ऊपरी सतह, आधा मीटर और एक मीटर की गहराई से मिट्टी के नमूने लिए। पानी के नमूने भी एकत्र कर जांच के लिए सील करके अपने साथ ले गई।
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आईआईटी कानपुर की टीम में शामिल इंजीनियर डॉ. तन्मय ने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें किसी तरह के प्रदूषण की स्थिति का पता लगाने के लिए सैंपलिंग की गई है। उन्होंने बताया कि छिवली गांव में भूजल का रंग हरा और पीला दिखाई देता है। इसे पीने योग्य नहीं बताया गया है। उन्होंने बताया कि पानी में क्रोमियम की अधिक मात्रा होने की बात सामने आई है।
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इससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं होने की आशंका है। इनमें पैरों में विकृति, हृदय संबंधी बीमारी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मिट्टी और पानी में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फोटो-25-छिवली गांव में हैंडपंप से पानी का नमूना भरती जांच टीम। स्रोत: वीडियो ग्रैब