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50 से अधिक शाखाओं में रहा हड़ताल का असर, 500 करोड़ लेनदेन प्रभावित.
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फतेहपुर। ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) की ओर से हड़ताल के दूसरे दिन भी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। जिले की 50 से अधिक शाखाओं में हड़ताल का असर देखने को मिला। इससे हड़ताल वाली बैंकों में 500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है। हालांकि निजी बैंकों के अलावा कई और बैंकों में हड़ताल का समर्थन नहीं किया।
बैंकों के निजीकरण के विरोध में ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर देश व्यापी हड़ताल के तहत बैंक अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहे। शहर के बैंक ऑफ बड़ौदा की कई शाखाओं में ताला बंद रहा। बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक, जिला सहकारी बैंक के अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सरकार के रवैये के खिलाफ आवाज उठाई।
हड़ताल में यूनियन अध्यक्ष मोहम्मद सफी, महामंत्री संदीप सिंह और जिले में हड़ताल के प्रभारी बनाए गए कुलदीप सिंह यादव, ललित मोहन पांडेय ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। निजीकरण के विरोध में बीएसएनएल, बिजली, रेलवे कर्मियों ने भी हड़ताल की। बीएसएनएल इंपलाई एसोसिएशन, विद्युत कर्मचारी संघ, रेलवे और एलआईसी कर्मियों ने हड़ताल पर होने के कारण दिनभर काम नहीं किया।
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इस मौके पर बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन के जिला सचिव बाबूलाल ने कहा कि बढ़ते काम के बोझ और घटती कर्मचारियों की संख्या भर्ती शुरू करके पूरी की जाए। एक अप्रैल 2005 से बंद की गई पुरानी पेंशन को लागू किया जाए। एनपीएस खत्म की जाए।
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बैंकों के निजीकरण के विरोध में ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर देश व्यापी हड़ताल के तहत बैंक अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहे। शहर के बैंक ऑफ बड़ौदा की कई शाखाओं में ताला बंद रहा। बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक, जिला सहकारी बैंक के अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सरकार के रवैये के खिलाफ आवाज उठाई।
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हड़ताल में यूनियन अध्यक्ष मोहम्मद सफी, महामंत्री संदीप सिंह और जिले में हड़ताल के प्रभारी बनाए गए कुलदीप सिंह यादव, ललित मोहन पांडेय ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। निजीकरण के विरोध में बीएसएनएल, बिजली, रेलवे कर्मियों ने भी हड़ताल की। बीएसएनएल इंपलाई एसोसिएशन, विद्युत कर्मचारी संघ, रेलवे और एलआईसी कर्मियों ने हड़ताल पर होने के कारण दिनभर काम नहीं किया।
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इस मौके पर बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन के जिला सचिव बाबूलाल ने कहा कि बढ़ते काम के बोझ और घटती कर्मचारियों की संख्या भर्ती शुरू करके पूरी की जाए। एक अप्रैल 2005 से बंद की गई पुरानी पेंशन को लागू किया जाए। एनपीएस खत्म की जाए।