{"_id":"5f36cc428ebc3e294b1b55c1","slug":"social-work-by-freedom-fighters-in-fatehpur-fatehpur-news-knp57692249","type":"story","status":"publish","title_hn":"कल के भारत से लाख गुना अच्छा आज का भारत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कल के भारत से लाख गुना अच्छा आज का भारत
विज्ञापन
स्वातंत्रता सेनानी कल्यानपुर गांव निवासी विश्वनाथ खन्ना, बहू व पोती के साथ
- फोटो : FATEHPUR
चौडगरा में स्वतंत्र संग्राम के आंदोलन में भागीदार रहे फ्रीडम फाइटर विश्वनाथ खन्ना देश की मौजूदा स्थित को बेहतर करार देते हैं। जिले के इकलौते स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का कहना है कि कल के भारत से आज का भारत लाख गुना अच्छा है। पहले मुल्क में गरीबी थी। ब्रिटिश हुकूमत का अत्याचार था। आज ऐसी बात नहीं है। सभी को दो वक्त की रोटी मिल रही है। विकास के कार्य हो रहे हैं। यह बदलाव है जो किसी भी देश की सफलता मानी जाती है।
बिंदकी तहसील क्षेत्र के कल्याणपुर गांव के रहने वाले विश्वनाथ खन्ना 98 साल के हो चुके हैं। वर्ष 1942 के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में हिस्सा लेने वाले विश्वनाथ की उम्र भले ही ढलान पर है लेकिन उनमें अभी भी देशभक्ति का अटूट जज्बा कायम है।
पिता श्याम किशोर खन्ना कानपुर में एक अंग्रेज कंपनी में कैशियर थे। वह उस वक्त बिंदकी के नेहरू इंटर कॉलेज में कक्षा 5 के छात्र थे। पिताजी नेहरू का गुणगान करते थे। जिसके चलते उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। उनके ताऊ नवल किशोर का भी यही हाल हुआ था। विश्वनाथ खन्ना ने बताया कि उन्होंने 20 लड़कों के साथ अंग्रेज शासन के खिलाफ नारेबाजी की और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। इससे खफा अंग्रेजी हुकूमत ने उन सब को जेल में डाल दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिंदकी तहसील क्षेत्र के कल्याणपुर गांव के रहने वाले विश्वनाथ खन्ना 98 साल के हो चुके हैं। वर्ष 1942 के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में हिस्सा लेने वाले विश्वनाथ की उम्र भले ही ढलान पर है लेकिन उनमें अभी भी देशभक्ति का अटूट जज्बा कायम है।
विज्ञापन
पिता श्याम किशोर खन्ना कानपुर में एक अंग्रेज कंपनी में कैशियर थे। वह उस वक्त बिंदकी के नेहरू इंटर कॉलेज में कक्षा 5 के छात्र थे। पिताजी नेहरू का गुणगान करते थे। जिसके चलते उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। उनके ताऊ नवल किशोर का भी यही हाल हुआ था। विश्वनाथ खन्ना ने बताया कि उन्होंने 20 लड़कों के साथ अंग्रेज शासन के खिलाफ नारेबाजी की और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। इससे खफा अंग्रेजी हुकूमत ने उन सब को जेल में डाल दिया था।
विज्ञापन