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साहबों को दिखाते भूसा, बेजुबानों को खिला रहे पराली

Sat, 22 Jan 2022 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jan 2022 12:12 AM IST
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Showing the straw to the sahib, the straw feeding the voiceless
सराय खालिस गोशाला की चरी में सूखा चारा खाते मवेशी। संवाद - फोटो : FATEHPUR
असोथर। गो आश्रय स्थलों में हर स्तर पर व्यवस्थाएं घुटनों पर हैं। ताजा मामला सरायं खालिस गोशाला का है। यहां गोवंशों को जीवित रखने के लिए पराली दी जा रही है। पराली खाकर कमजोर हुए गोवंशों में ठंड बर्दाश्त करने की क्षमता भी नहीं बची है। भीषण ठंड में गोवंश रातभर ठिठुरते रहते हैं।
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हैरतअंगेज बात यह है कि गोदाम में रखा भूसा गोवंशों को देने की बजाय निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को दिखाने के काम आ रहा है। हकीकत यह है कि क्षमता के अनुसार मवेशियों को एक दिन के खिलाने के लिए भूसा नहीं है।
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असोथर ब्लाक के सरांय खालिस में अन्ना गोवंशो को रखने के लिए गोशाला बनी है। यहां पर 63 गोवंश हैं और इनकी देखरेख के लिए दो मजदूर लगाए गए हैं। कड़ाके की ठंड से गोवंशों को बचाने के लिए सिर्फ एक टिन शेड बना हुआ है, जो नाकाफी है। चार-पांच डिग्री तापमान में गोवंश खुले आसमान के नीचे ठिठुरते हैं। इस गोशाला का यह हाल तो बानगी है। कमोबेश सभी गो आश्रय स्थलों में एक जैसी स्थिति है।
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शासन से जारी बजट में गोवंशों को भूसा, चूनी, चोकर और हरा चारा देने का नियम है, लेकिन गोवंशों को पराली दी जाती है, वह भी इतनी कि वह जीवित रह सकें। मवेशी को पेटभर चारा-दाना न मिलने के कारण दुबले हो रहे हैं। उनमें इतनी भी क्षमता नहीं बची है कि वह ठंड को बर्दाश्त कर सके।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि लोग दिन में अन्ना गोवंशों को पकड़ कर लाते हैं और रात में गोशाला से निकाल दिया जाता है। जो खेतों में जाकर फसलों को नष्ट करते हैं। जब से गोशाला बनी है, गांव के आसपास अन्ना गोवंशों का झुंड हो गया है।
ग्राम पंचायत अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि भूसा का दाम 800 से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल है। शासन से प्रति गोवंश चारा-दाना के लिए 30 रुपये मिलते हैं, जो कि नाकाफी हैं। भूसा महंगा होने के कारण पराली खरीद कर लाई जाती है।
एक ट्राली में करीब सात-आठ क्विंटल पराली लदी होती है। एक ट्राली की कीमत आठ सौ से हजार रुपये के बीच होती है। वहीं, प्रधान प्रतिनिधि लक्ष्मीशंकर ने बताया कि दो महीना से भुगतान नहीं हुआ है। चूनी, चोकर और भूसा सप्लाई करने वाले को भी रुपये देने हैं।

पशु चिकित्सक डॉ. आनंद सिंह ने बताया कि पराली खाने से मवेशियों में डगनाला की बीमारी होती है। इससे पूंछ, कान और खुर सूखने लगते हैं। मवेशियों को पराली के साथ हरा चारा, दाना देना भी अनिवार्य है। केवल पराली खाने से मवेशियों में कमजोरी आ जाती है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता भी लगभग खत्म हो जाती है।
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