फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   Senior litterateur discovered rare manuscripts

वरिष्ठ साहित्यकार ने खोज निकालीं दुर्लभ पांडुलिपियां

Thu, 09 Dec 2021 12:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 12:33 AM IST
विज्ञापन
Senior litterateur discovered rare manuscripts
खोजी गईं पांडूलिपियां दिखाते के साथ डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित। संवाद - फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। हिंदी साहित्य के मानिंद हस्ताक्षर डा.चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने देश की लुप्तप्राय दुर्लभ पांडुलिपियां खोजकर विश्व पटल पर अपनी उपस्थित दर्ज कराने की ख्याति प्राप्त है। साहित्य की दुनिया में लोग उन्हें ललित के नाम से भी जानते हैं। वात्सल्य शिरोमणि कहे जाने वाले सूरदास की सूरमंजरी खोजने का श्रेय इन्हीं को है। दोआबा के इस महान साहित्यकार ने पूरे देश में जिले का नाम रोशन किया है। अपनी उपलब्धियों के लिए यूनेस्को ने दो दशक पूर्व साल 2000 में विश्व हिंदी सेवा सहस्त्राब्दी पुरस्कार से उन्हें नवाजा था।
विज्ञापन

डा.ललित हसवा के समीप टीसी गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने बताया कि शहर के शांति नगर स्थित नारायणदास कुटी से उन्होंने महाकवि सूरदास रचित सूर मंजरी नाम की रचना का संकलन किया था। इसमें महाकवि सूरदास के 797 पदों का हस्तलिखित संग्रह है। उनकी इस खोज का समाचार बीबीसी लंदन ने प्रसारित किया था। इसके साथ ही हसवा जिसका प्राचीन नाम हंसध्वजपुरी था। वहीं पर आकर बसने वाले महाकवि चंद्रबरदाई के राम विनोद महाकाव्य का संपादन एवं प्रकाशन किया। इतिहास में चंद को कई उपाधियां दी गई थीं। जिनमें बरदाई, विद्यासगर प्रमुख हैं।
विज्ञापन

चंद्र बरदाई अपना समस्त काम छोड़कर हसवा आ गए थे और यहां आकर जीवित समाधि ले ली थी। चंद्र की विस्तृत जानकारी महरौली के स्तंभ में आज भी दर्ज है। इसके साथ ही डा.ललित ने खजुहा के संत प्रवर मीता साहेब की ग्रंथावली का संपादन किया। कबीर ग्रंथावली की परंपरा में डा.ब्रजमोहन पांडेय विनीत खागा, राम मनोहर शुक्ल बेंहटा मलवा, डा.रतिभान सिंह किशनपुर ने डा.ललित की खोजी पांडुलिपियों पर पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डा.ललित कहते हैं कि युवावस्था के दौरान उनकी मुलाकात पंडित राहुल सांकृत्यायन से प्रयागराज में हुई थी। वहीं चित्रकूट के कई स्थानों में साहित्य की पांडुलिपियों के मौजूद होने का जिक्र हुआ। राहुल ने इस मुलाकात के बाद तिब्बत का रुख किया और उन्होंने चित्रकूट का। हजारों यात्रा करने के बाद ये पांडुलिपियां प्राप्त हो सकीं। उन्होंने बताया कि दक्षिण में हिंदी के विकास के लिए कई हिंदी सम्मेलन करवाए। पांडुलिपियों के संकलन के बाद संतमीता ग्रंथावली, राम विनोद महाकाव्य को प्रकाशित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed