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तालों में कैद हैं रैन बसेरे, तीमारदार परेशान
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:24 AM IST
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ताले में कैद जिला महिला अस्पताल का रैन बसेरा
- फोटो : अमर उजाला
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केस-1: तीमारदार अनिल सिंह कहते हैं कि मेरा गांव गाजीपुर है। पांच दिन से परिवार के चाचा जिला पुरुष अस्पताल में भर्ती है। वह उन्हें देखने गुरुवार को आए थे। रैन बसेरा की जानकारी न होने पर उन्हें आबूनगर में रहने वाले रिश्तेदार के घर का दरवाजा खुलवाना पड़ा। जिससे बड़ी दिक्कत हुई।
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केस-2: तीमारदार धीरेंद्र कुमार का कहना है कि उन्हें सदर अस्पताल में रैन बसेरा होने की जानकारी नहीं है। और न ही अस्पताल प्रशासन की ओर से ही ऐसी कोई जानकारी दी गई है। जिससे बरामदा में सोते समय चोर उचक्कों का डर बना रहता है।
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केस-3: तीमारदार राम प्रताप ने कहा कि मेरी रिश्ते में भाभी की एक दिन पहले महिला अस्पताल में डिलीवरी हुई। शाम होने पर रात बिताने की याद आई। खोजते-खोजते रैन बसेरा पहुंचे तो ताला बंद मिला। आईपीडी में सो नहीं सकते थे इसलिए लॉज का सहारा लेना पड़ा।
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यह तीन मामले एक बानगी हैं। जिला अस्पताल में बने रैन बसेरा का यही हाल है। यहां अक्सर ताला बंद रहता है। ऐसे में मरीज के तीमारदारों की सुविधा के लिए बना रैन बसेरा बेमकसद हो गया है। तीमारदारों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्हें रिश्तेदारों का रात में दरवाजा खटखटाना होता है या फिर होटल-लॉज की सेवाएं लेनी पड़ती है। जेब से कड़के तीमारदार आईपीडी में ही रातें गुजारते हैं।
सरकारी अस्पताल की आईपीडी में भर्ती मरीज के साथ रात में केवल एक तीमारदार के रुकने का नियम है। नियम का पालन हो, इसके लिए शासन स्तर से जिला मुख्यालय स्थित पुरुष व महिला अस्पताल में रैन बसेरा बने हुए हैं। इसके बावजूद इन दोनों रैन बसेरा की सेवाएं छलावा साबित हो रही हैं। यहां अक्सर ताला लटकता रहता है। कई महीने पहले तक जिला पुरुष अस्पताल मेें मरीजों के लिए यहां खाना पकाने का काम होता रहा तो जिला महिला अस्पताल के रैन बसेरा में 108 और 102 नंबर एंबुलेंस सेवा से जुड़े स्वास्थ कर्मी जमे रहे।
रैन बसेरा तीमारदारों के लिए बना है। जिसमें चार बेड पड़े हैं। पहले इसमें मरीजों का खाना पकता था अब नहीं। जो तीमारदार रुकना चाहतें हैं उन्हें यह सुविधा दी जाती है। यदि किसी को सुविधा नहीं मिलती है तो सीएमएस दफ्तर में शिकायत की जा सकती है।
- डॉ. एके मिश्रा, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल
रैन बसेरा में सारी सुविधाएं हैं। महिला तीमारदारों के लिहाज से चौकीदार भी है। फिर भी तीमारदार यहां रुकने की बजाय आईपीडी में ही रात बिताते हैं। मना करने के बावजूद नहीं मानते हैं।
- डॉ. रेखारानी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल