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नवंबर में आई बाढ़ का दिखा असर, बढ़ गए सब्जियों के दाम
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फतेहपुर। नवंबर में आई बाढ़ से नष्ट हुई सब्जियों की फसल के चलते अब सब्जी के दाम बढ़ने लगे हैं। हरी मिर्च के भाव 200 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं।
बिंदकी तहसील क्षेत्र का गंगा कटरी जिले का प्रमुख सब्जी उत्पादक क्षेत्र है। यहां की सब्जी कानपुर, बांदा, उन्नाव तक की मंडियों में जाती हैं। किसान गंगा की बाढ़ का पानी घटने के बाद फूल गोभी, बंद गोभी, गाजर, मूल, शिमला मिर्च, भिंडी, परवल, प्याज, शलजम, मिर्च, बैंगन, करेला, लौकी, कद्दू, खीरा आदि की बुवाई करते हैं। बुवाई के बाद इस बार 23 नवंबर को गंगा में फिर बाढ़ आ गई थी। 30 दिसंबर तक क्षेत्र में पानी भरा रहा। जिससे सब्जी की फसल को काफी नुकसान हुआ। ऐसे में अब बाजार में दूसरे जिलों से आई सब्जी बिक रही है।
दरियापुर निवासी सब्जी उत्पादक हरीलाल निषाद का कहना है कि गंगा की बाढ़ में क्षेत्र की सब्जी की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। ऐसे में इस बार क्षेत्र में सब्जी नाम मात्र की निकल रही है। क्षेत्र के सब्जी उत्पादकों की हालत दयनीय हो गई है।
नया खेड़ा निवासी राजेंद्र निषाद का कहना है कि क्षेत्र में सब्जी की पैदावार न होने के कारण जिले में सब्जी की महंगाई होना स्वाभाविक है। बाहर से आने वाली सब्जी में भाड़ा खर्च बढ़ जाता है और कच्चा व्यवसाय होने के कारण बड़ी तादाद में सब्जी खराब भी होती है। दुकानदार पूरा खर्च निकालकर बेचते हैं।
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गृहणी उर्मिला राजवंशी कहती हैं कि सब्जी की आसमान चूमती कीमतों से रसोई का बजट बढ़ गया है। गरीब और मध्यम आय वाले परिवारों को नियमित सब्जी खाना मुश्किल है। हरी सब्जी की कीमत क्षमता से अधिक होने के कारण आलू की खपत बढ़ी है, जिससे आलू भी महंगा हो रहा है।
गृहणी अन्नू सविता कहती हैं कि सब्जी के भाव क्षमता से अधिक होने के कारण आम परिवारों की थालियों से सब्जी दूर होती जा रही है। ऐसे में लोगों को सब्जी खरीदने के पहले जेब का वजन देखने को मजबूर होना पड़ रहा है। चुनाव शुरू होने के बाद और तेजी से सब्जी की कीमतें बढ़ी हैं।
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बिंदकी तहसील क्षेत्र का गंगा कटरी जिले का प्रमुख सब्जी उत्पादक क्षेत्र है। यहां की सब्जी कानपुर, बांदा, उन्नाव तक की मंडियों में जाती हैं। किसान गंगा की बाढ़ का पानी घटने के बाद फूल गोभी, बंद गोभी, गाजर, मूल, शिमला मिर्च, भिंडी, परवल, प्याज, शलजम, मिर्च, बैंगन, करेला, लौकी, कद्दू, खीरा आदि की बुवाई करते हैं। बुवाई के बाद इस बार 23 नवंबर को गंगा में फिर बाढ़ आ गई थी। 30 दिसंबर तक क्षेत्र में पानी भरा रहा। जिससे सब्जी की फसल को काफी नुकसान हुआ। ऐसे में अब बाजार में दूसरे जिलों से आई सब्जी बिक रही है।
दरियापुर निवासी सब्जी उत्पादक हरीलाल निषाद का कहना है कि गंगा की बाढ़ में क्षेत्र की सब्जी की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। ऐसे में इस बार क्षेत्र में सब्जी नाम मात्र की निकल रही है। क्षेत्र के सब्जी उत्पादकों की हालत दयनीय हो गई है।
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नया खेड़ा निवासी राजेंद्र निषाद का कहना है कि क्षेत्र में सब्जी की पैदावार न होने के कारण जिले में सब्जी की महंगाई होना स्वाभाविक है। बाहर से आने वाली सब्जी में भाड़ा खर्च बढ़ जाता है और कच्चा व्यवसाय होने के कारण बड़ी तादाद में सब्जी खराब भी होती है। दुकानदार पूरा खर्च निकालकर बेचते हैं।
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गृहणी उर्मिला राजवंशी कहती हैं कि सब्जी की आसमान चूमती कीमतों से रसोई का बजट बढ़ गया है। गरीब और मध्यम आय वाले परिवारों को नियमित सब्जी खाना मुश्किल है। हरी सब्जी की कीमत क्षमता से अधिक होने के कारण आलू की खपत बढ़ी है, जिससे आलू भी महंगा हो रहा है।
गृहणी अन्नू सविता कहती हैं कि सब्जी के भाव क्षमता से अधिक होने के कारण आम परिवारों की थालियों से सब्जी दूर होती जा रही है। ऐसे में लोगों को सब्जी खरीदने के पहले जेब का वजन देखने को मजबूर होना पड़ रहा है। चुनाव शुरू होने के बाद और तेजी से सब्जी की कीमतें बढ़ी हैं।
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