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पोषण पुनर्वास केन्द्र के नही भर पा रहे बेड
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फतेहपुर। शासन व प्रशासन की तमाम कवायद के बावजूद जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र के बेड नहीं भर पा रहे हैं। केंद्र में सालाना 240 बच्चों के इलाज की व्यवस्था है, लेकिन इलाज करीब 200 बच्चों का ही हो पा रहा है। वर्तमान समय में पांच कुपोषित बच्चे यहां भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में फरवरी 2016 में 10 बेड का पुनर्वास केंद्र बना था। यहां बच्चों के साथ रहने वाले अभिभावकों को भी रहने के साथ-साथ अस्पताल की ओर से खाना दिया जाता हैं। केंद्र में भर्ती होने वाले कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए एक चिकित्साधिकारी भी तैनात हैं। जिनकी
देखरेख में बच्चों का इलाज किया जाता है। सुविधाओं के बावजूद जिला अस्पताल के पुनर्वास केंद्र के बेड नहीं भर पा रहे हैं। इस समय केंद्र में मलवां ब्लाक के तीन, हसवा व खजुहा ब्लाकों के दो बच्चे भर्ती हैं। जिनका इलाज चल रहा है। पांच बेड खाली पडे़ हैं।
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केंद्र के चिकित्साधिकारी डॉ. रघुनाथ सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते गत 20 मार्च से तीन माह तक केंद्र बंद रहा। तीन माह के बाद 14 जून को केंद्र चालू हुआ। अप्रैल माह में चार बच्चे भर्ती हुए थे। उन्होंने बताया कि कुपोषित बच्चों को केंद्र में कम से कम 14 दिन व अधिकतम 28 दिनों तक रखा जाता है। बीमार बच्चों में पांच ग्राम प्रति किलो बढ़ोतरी होने पर डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
फतेहपुर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने में मरीजों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों ने पहले से नंबर लगा रखा है। एडवांस बुकिंग वाले मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो रहा है। इसके चलते प्रतिदिन करीब 50 मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड कराए वापस होना पड़ रहा है।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने से पुरुष अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कोरोना की जांच के बाद ही अल्ट्रासाउंड हो रहा है। अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को पहले से नंबर लगाना पड़ रहा है। सोमवार को 49 मरीजों ने नंबर ले रखा था, जिनका अल्ट्रासाउंड किया गया। वहीं, मंगलवार को 42, बुधवार को 49 मरीजों के नंबर बुक हैं।
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कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में फरवरी 2016 में 10 बेड का पुनर्वास केंद्र बना था। यहां बच्चों के साथ रहने वाले अभिभावकों को भी रहने के साथ-साथ अस्पताल की ओर से खाना दिया जाता हैं। केंद्र में भर्ती होने वाले कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए एक चिकित्साधिकारी भी तैनात हैं। जिनकी
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देखरेख में बच्चों का इलाज किया जाता है। सुविधाओं के बावजूद जिला अस्पताल के पुनर्वास केंद्र के बेड नहीं भर पा रहे हैं। इस समय केंद्र में मलवां ब्लाक के तीन, हसवा व खजुहा ब्लाकों के दो बच्चे भर्ती हैं। जिनका इलाज चल रहा है। पांच बेड खाली पडे़ हैं।
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केंद्र के चिकित्साधिकारी डॉ. रघुनाथ सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते गत 20 मार्च से तीन माह तक केंद्र बंद रहा। तीन माह के बाद 14 जून को केंद्र चालू हुआ। अप्रैल माह में चार बच्चे भर्ती हुए थे। उन्होंने बताया कि कुपोषित बच्चों को केंद्र में कम से कम 14 दिन व अधिकतम 28 दिनों तक रखा जाता है। बीमार बच्चों में पांच ग्राम प्रति किलो बढ़ोतरी होने पर डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
फतेहपुर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने में मरीजों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों ने पहले से नंबर लगा रखा है। एडवांस बुकिंग वाले मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो रहा है। इसके चलते प्रतिदिन करीब 50 मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड कराए वापस होना पड़ रहा है।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने से पुरुष अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कोरोना की जांच के बाद ही अल्ट्रासाउंड हो रहा है। अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को पहले से नंबर लगाना पड़ रहा है। सोमवार को 49 मरीजों ने नंबर ले रखा था, जिनका अल्ट्रासाउंड किया गया। वहीं, मंगलवार को 42, बुधवार को 49 मरीजों के नंबर बुक हैं।