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रावण का अहंकार चूर, राम के लगे जयकारे
अमर उजाला ब्यूरो फतेहपुर
Updated Thu, 29 Oct 2015 11:54 PM IST
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खजुहा कस्बे के ऐतिहासिक मेले में गुरुवार को हजारों की भीड़ के सामने रावण का अहंकार चूर हो गया। तब श्रीराम के जयकारों से पूरा मेला परिसर गूंज उठा। वहीं इससे पहले लक्ष्मण शक्ति लगने पर राम का विलाप सुन दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
दर्शकों में राम रावण के युद्ध का रोमांच दिखा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा में लगी पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। गुरुवार को रामजानकी मंदिर से रामदल की सेना निकालने के पहले उनकी पूजा अर्चना की गई। यात्रा कस्बे के मुगलरोड, लखनाखेड़ा होकर लंका पहुंची।
जहां राम रावण दल के बीच रोमांचकारी युद्ध शुरू हो गया। लक्ष्मण को शक्ति लगते ही रामदल में शोक छा गया। राम के विलाप सुन दर्शकों की आंखें नम हो गई। विभीषण के कहने पर सुषैन वैद्य को हनुमान जी लेकर आए और संजीवनी बूटी लेने गए हनुमान पूरा पर्वत ही उखाड़ ले आए।
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संजीवनी देते ही लक्ष्मण के होश में आने पर जय हनुमान के जयकारों से पूरा मेला परिसर गूंज गया। इसके बाद लंका में पहुंची राम सेना ने घमासान युद्ध पर रावण की सेना सहित उसके 70 पूत व 72 नाती मारे गए। रावण राम के बीच हुए युद्ध के दौरान अहंकारी रावण विभीषण की मदद से राम के हाथों मारा गया।
यहां लगे झूलों का बच्चों, युवाओं ने लुत्फ उठाया, महिलाओें ने दुकानों में खरीददारी की, रात्रि में दर्शकों ने रंगारंग कार्यक्रम का लुत्फ उठाया। मेले की व्यवस्था संभालने वालों में दयाराम उत्तम, महेंद्र, धमेंद्र, हीरा दुबे, राजन गुप्ता, मनोज आदि दर्जनों कार्यकर्ता शामिल रहे।
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दर्शकों में राम रावण के युद्ध का रोमांच दिखा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा में लगी पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। गुरुवार को रामजानकी मंदिर से रामदल की सेना निकालने के पहले उनकी पूजा अर्चना की गई। यात्रा कस्बे के मुगलरोड, लखनाखेड़ा होकर लंका पहुंची।
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जहां राम रावण दल के बीच रोमांचकारी युद्ध शुरू हो गया। लक्ष्मण को शक्ति लगते ही रामदल में शोक छा गया। राम के विलाप सुन दर्शकों की आंखें नम हो गई। विभीषण के कहने पर सुषैन वैद्य को हनुमान जी लेकर आए और संजीवनी बूटी लेने गए हनुमान पूरा पर्वत ही उखाड़ ले आए।
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संजीवनी देते ही लक्ष्मण के होश में आने पर जय हनुमान के जयकारों से पूरा मेला परिसर गूंज गया। इसके बाद लंका में पहुंची राम सेना ने घमासान युद्ध पर रावण की सेना सहित उसके 70 पूत व 72 नाती मारे गए। रावण राम के बीच हुए युद्ध के दौरान अहंकारी रावण विभीषण की मदद से राम के हाथों मारा गया।
यहां लगे झूलों का बच्चों, युवाओं ने लुत्फ उठाया, महिलाओें ने दुकानों में खरीददारी की, रात्रि में दर्शकों ने रंगारंग कार्यक्रम का लुत्फ उठाया। मेले की व्यवस्था संभालने वालों में दयाराम उत्तम, महेंद्र, धमेंद्र, हीरा दुबे, राजन गुप्ता, मनोज आदि दर्जनों कार्यकर्ता शामिल रहे।