{"_id":"5759c8534f1c1b3b0c9c5110","slug":"ramajan-prayer-every-moment","type":"story","status":"publish","title_hn":"रमजान में हर पल इबादत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रमजान में हर पल इबादत
अमर उजाला ब्यूरो फतेहपुर
Updated Fri, 10 Jun 2016 01:19 AM IST
विज्ञापन
कोतवाली के समीप स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ते रोजेदार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रमजान में रोजेदारों के लिए हर पल इबादत है। रोजेदार तरावीह पढ़ने के बाद सोते हैं तो वह भी इबादत में शामिल है। इसके बाद भोर में उठकर सहरी करने के बाद फजिर की नमाज अदा करते हैं। उलमा ने कहा कि बीमारी की वजह से जो लोग रोजा न रख पा रहे हैं वह भी रोजेदारों का एहतराम करें। रोजेदारों के सामने खाएं पिएं नहीं। रमजान में गैर मुसलमानों के घरों में भी इफ्तारी पहुंच रही हैं।
मुसलमानों के घरों में इबादत का दौर चल रहा है। मस्जिदों में लोग कुरान की तिलावत कर रहे हैं। रोजे की वजह दिन में होटलों में चहल-पहल गायब हो गई है। इफ्तार के बाद मुस्लिम क्षेत्रों में मेले जैसा माहौल रहता है। शाम को ही लोग खरीदारी के लिए निकल रहे हैं। 15 घंटे से ज्यादा लंबे रोजा रखने के बाद भी लोग अपने काम में मशगूल रहते हैँ।
दुकानदार रोजा रखने के बाद भी दुकानों पर बैठकर कारोबार कर रहे हैं। इसके अलावा कर्मचारी भी रोजा रखकर ड्यूटी दे रहे हैं। सहरी के लिए मुस्लिम बहुल इलाके आधी रात से ही तैयार होने लग रहे हैं। इन इलाकों में सुबह से शाम तक रमजान की खुशियां बिखर रही हैं। इफ्तार का दौर चल रहा है जिसमेें पड़ोसियों के साथ रोजा खोला जा रहा है।
विज्ञापन
उधर, मस्जिदों में नमाज के दौरान इमामों ने पाकीजा महीने की खूबियों पर रोशनी डाल रहे हैं। ब्रिलियंट स्कूल के प्रिंसिपल वकील अहमद ने कहा कि रमजान में रोजेदार ज्यादा से ज्यादा नेकियां बटोर लें। इसमें अल्लाह खुले दिल से रोजेदारों पर अपनी रहमत बरसाता है। रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है। इसमें गरीबों और यतीमों की भूख का एहसास करें।
रोजेदार रोजे की हालत में अपने को सारी बुराइयों से दूर रखें। यह ट्रेनिंग का महीना है। इस महीने में रोजेदारों की सही ट्रेनिंग हो गई तो साल के 11 महीने भी उनके अल्लाह की राह में आसानी से गुजर जाएंगे। इस महीने में अल्लाह ने कुरान पाक नाजिल किया।
विज्ञापन
मुसलमानों के घरों में इबादत का दौर चल रहा है। मस्जिदों में लोग कुरान की तिलावत कर रहे हैं। रोजे की वजह दिन में होटलों में चहल-पहल गायब हो गई है। इफ्तार के बाद मुस्लिम क्षेत्रों में मेले जैसा माहौल रहता है। शाम को ही लोग खरीदारी के लिए निकल रहे हैं। 15 घंटे से ज्यादा लंबे रोजा रखने के बाद भी लोग अपने काम में मशगूल रहते हैँ।
विज्ञापन
दुकानदार रोजा रखने के बाद भी दुकानों पर बैठकर कारोबार कर रहे हैं। इसके अलावा कर्मचारी भी रोजा रखकर ड्यूटी दे रहे हैं। सहरी के लिए मुस्लिम बहुल इलाके आधी रात से ही तैयार होने लग रहे हैं। इन इलाकों में सुबह से शाम तक रमजान की खुशियां बिखर रही हैं। इफ्तार का दौर चल रहा है जिसमेें पड़ोसियों के साथ रोजा खोला जा रहा है।
विज्ञापन
उधर, मस्जिदों में नमाज के दौरान इमामों ने पाकीजा महीने की खूबियों पर रोशनी डाल रहे हैं। ब्रिलियंट स्कूल के प्रिंसिपल वकील अहमद ने कहा कि रमजान में रोजेदार ज्यादा से ज्यादा नेकियां बटोर लें। इसमें अल्लाह खुले दिल से रोजेदारों पर अपनी रहमत बरसाता है। रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है। इसमें गरीबों और यतीमों की भूख का एहसास करें।
रोजेदार रोजे की हालत में अपने को सारी बुराइयों से दूर रखें। यह ट्रेनिंग का महीना है। इस महीने में रोजेदारों की सही ट्रेनिंग हो गई तो साल के 11 महीने भी उनके अल्लाह की राह में आसानी से गुजर जाएंगे। इस महीने में अल्लाह ने कुरान पाक नाजिल किया।