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Fatehpur News: पारा गांव की प्रधानी विवादों में घिरी रही
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हरदोई। पारा गांव की प्रधानी अक्सर विवादों से घिरी रही है। इतिहास गवाह है पारा गांव की प्रधानी बिना गोली बंदूक की आवाज सुने पूरी नहीं हो पाई। इस बार की मौजूदा प्रधानी भी आखिरकार खून से रंग गई। इस सनसनीखेज डलब मर्डर से गांव में दहशत का माहौल है। लोग अपने घरों से निकलने और एक-दूसरे से बात करने में कतरा रहे हैं।
मझिला के पारा गांव डबल मर्डर केस में एक और खुलासा हुआ है। मौजूदा प्रधान नंदलाल कुशवाहा राजा बाबू गुट के थे। उन्होंने अनिल शुक्ला गुट की महिला प्रत्याशी को चुनाव में हराया था। जीतने के बाद से नंदलाल कुशवाहा की प्रधानी उसका भतीजा रमाकांत कुशवाहा देख रहा था और सरपरस्ती राजा बाबू गुट की थी।
पिछले डेढ़ साल की प्रधानी में नंदलाल कोई काम नहीं करवा पा रहे थे। इस कारण चाचा-भतीजे में धीरे-धीरे राजा बाबू गुट के खिलाफ रोष पनप रहा था। उधर, पूर्व प्रधान अनिल शुक्ला के पुत्र अमित जो कि पेशे से एडवोकेट था। उसको इस बात की भनक लगी। अमित क्षेत्र में सामाजिक रूप से काफी व्यवहार कुशल माना जाता रहा है। अमित के इसी व्यवहार से प्रभावित प्रधान नंदलाल का भतीजा अमित के संपर्क में आया। दोनों में अच्छी बनने लगी। अमित और रमाकांत की इसी दोस्ती ने प्रधान नंदलाल को गुट बदलने को प्रेरित किया।
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इसलिए नाराज चल रहा था राजा बाबू गुट
प्रधानी की सीट ओबीसी होने के चलते राजा बाबू गुट ने ही नंनदलाल को चुनाव लड़वाकर जितवाया था। डेढ़ माह पूर्व प्रधान के पाला बदलने से खूनी संघर्ष हो गया। प्रधान नंदलाल कुशवाहा को राजा बाबू गुट ने अपने मोहरे के रूप में प्रयोग कर रहा था। राजा बाबू ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका आदमी इस तरह धोखा देकर उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रधान अनिल शुक्ला गुट में जा मिलेगा। यही वजह है कि राजा बाबू गुट सबसे ज्यादा नाराज नंदलाल के भतीजे रमाकांत और अनिल शुक्ला के पुत्र एडवोकेट अमित से नाराज चल रहे थे।
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मझिला के पारा गांव डबल मर्डर केस में एक और खुलासा हुआ है। मौजूदा प्रधान नंदलाल कुशवाहा राजा बाबू गुट के थे। उन्होंने अनिल शुक्ला गुट की महिला प्रत्याशी को चुनाव में हराया था। जीतने के बाद से नंदलाल कुशवाहा की प्रधानी उसका भतीजा रमाकांत कुशवाहा देख रहा था और सरपरस्ती राजा बाबू गुट की थी।
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पिछले डेढ़ साल की प्रधानी में नंदलाल कोई काम नहीं करवा पा रहे थे। इस कारण चाचा-भतीजे में धीरे-धीरे राजा बाबू गुट के खिलाफ रोष पनप रहा था। उधर, पूर्व प्रधान अनिल शुक्ला के पुत्र अमित जो कि पेशे से एडवोकेट था। उसको इस बात की भनक लगी। अमित क्षेत्र में सामाजिक रूप से काफी व्यवहार कुशल माना जाता रहा है। अमित के इसी व्यवहार से प्रभावित प्रधान नंदलाल का भतीजा अमित के संपर्क में आया। दोनों में अच्छी बनने लगी। अमित और रमाकांत की इसी दोस्ती ने प्रधान नंदलाल को गुट बदलने को प्रेरित किया।
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इसलिए नाराज चल रहा था राजा बाबू गुट
प्रधानी की सीट ओबीसी होने के चलते राजा बाबू गुट ने ही नंनदलाल को चुनाव लड़वाकर जितवाया था। डेढ़ माह पूर्व प्रधान के पाला बदलने से खूनी संघर्ष हो गया। प्रधान नंदलाल कुशवाहा को राजा बाबू गुट ने अपने मोहरे के रूप में प्रयोग कर रहा था। राजा बाबू ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका आदमी इस तरह धोखा देकर उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रधान अनिल शुक्ला गुट में जा मिलेगा। यही वजह है कि राजा बाबू गुट सबसे ज्यादा नाराज नंदलाल के भतीजे रमाकांत और अनिल शुक्ला के पुत्र एडवोकेट अमित से नाराज चल रहे थे।