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आलू बोने के बाद समय बचा तो वोट डालेंगे
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Mon, 19 Oct 2015 12:24 AM IST
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किसान मतदान की अपेक्षा खेत खलिहानों में काम करने को
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अधिक महत्व देते हैं। किसान मतदाता मताधिकार के प्रति अभी तक जागरूक नहीं
हैं। खेती किसानी का काम करने के बाद समय बचने पर यह कुनबा वोट डालने जाता
है। रविवार को भिटौरा विकास खंड के भदार गांव में आलू की फसल की बुआई कर
रहे किसान महिपाल कहते हैं कि वोट डालै से पेट थोड़ै भरिहैं। आलू बोअन के
बाद समय बचिहैं, तो बड़ागांव मां वोट डालि अइहैं।
शासन प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र का मतदाता मताधिकार के प्रति जागरूक नहीं हैं। खेती किसानी से जुड़े मतदाता पहले अपना काम करते हैं और समय बचने पर वोट डालने जाते हैं।
रविवार को भिटौरा, हथगाम, तेलियानी ब्लाक क्षेत्र में डीडीसी और बीडीसी पदों का मतदान हुआ। भिटौरा विकास खंड क्षेत्र के भदार गांव के किनारे खेत पर आलू की फसल की बुआई कर रहे देवनरायण, महिपाल, जगमोहन, संदीप, राममनोहर से इस संवाददाता ने वोट डालने के विषय पर बात की, तो उन्होंने बताया कि गांव मां वोट नाहीं परत हैं।
इहां के लोग दुसरे गांव बड़ागांव मा वोट डालै जात हैं। किसान कहते हैं कि गांव का प्रत्याशी है नाहीं तो वोट डालै कौन जात। वोट बंद होय तक समय निकारिकै वोट डालि आवब। क्षुब्ध मन से किसान कहते हैं कि वोट लेइय के समय प्रत्याशी तरह-तरह का सपना दिखावत हैं। यहि कै बाद में घूमिकै नाहीं देखत। यह किसान तो बानगी के तौर पर हैं।
इस तरह के तमाम मतदाता जो खेत खलिहान का काम छोड़कर वोट डालने नहीं जाते हैं। ऐसी मतदाताओं को वोट के महत्व पर जागरूक करने की आवश्यकता है, तभी अच्छा वोट प्रतिशत होगा और अच्छी छवि तथा ईमानदार प्रतिनिधि का चुनाव हो सकेगा।
शासन प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र का मतदाता मताधिकार के प्रति जागरूक नहीं हैं। खेती किसानी से जुड़े मतदाता पहले अपना काम करते हैं और समय बचने पर वोट डालने जाते हैं।
रविवार को भिटौरा, हथगाम, तेलियानी ब्लाक क्षेत्र में डीडीसी और बीडीसी पदों का मतदान हुआ। भिटौरा विकास खंड क्षेत्र के भदार गांव के किनारे खेत पर आलू की फसल की बुआई कर रहे देवनरायण, महिपाल, जगमोहन, संदीप, राममनोहर से इस संवाददाता ने वोट डालने के विषय पर बात की, तो उन्होंने बताया कि गांव मां वोट नाहीं परत हैं।
इहां के लोग दुसरे गांव बड़ागांव मा वोट डालै जात हैं। किसान कहते हैं कि गांव का प्रत्याशी है नाहीं तो वोट डालै कौन जात। वोट बंद होय तक समय निकारिकै वोट डालि आवब। क्षुब्ध मन से किसान कहते हैं कि वोट लेइय के समय प्रत्याशी तरह-तरह का सपना दिखावत हैं। यहि कै बाद में घूमिकै नाहीं देखत। यह किसान तो बानगी के तौर पर हैं।
इस तरह के तमाम मतदाता जो खेत खलिहान का काम छोड़कर वोट डालने नहीं जाते हैं। ऐसी मतदाताओं को वोट के महत्व पर जागरूक करने की आवश्यकता है, तभी अच्छा वोट प्रतिशत होगा और अच्छी छवि तथा ईमानदार प्रतिनिधि का चुनाव हो सकेगा।