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फतेहपुर: इंदिरा गांधी को खुली चुनौती देकर चर्चा में आईं थीं सुषमा स्वराज

Wed, 07 Aug 2019 06:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Aug 2019 06:54 PM IST
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फतेहपुर। बात 1978 की है, लोकसभा के उपचुनाव चल रहे थे। हुकूमत पर कांग्रेस का कब्जा था। जनता पार्टी भी अस्तित्व में आ चुकी थी। चुनाव में तकरीबन साठ साल की अनुभवी इंदिरा गांधी के सामने प्रचार के लिए उन दिनों 25 वर्ष की सुषमा स्वराज ने मोर्चा संभाला था। सुषमा उन दिनों जनता दल की नेता थीं और हरियाणा सरकार में मंत्री हुआ करती थीं। बिंदकी के ठठराही में इंदिरा गांधी के मंच पर पहुंचकर उन्होंने जनता के सामने ही इंदिरा गांधी को उनके सवालों का जवाब देने की चुनौती दे दी थी। सुषमा स्वराज ने कहा था कि ‘इंदिरा जी आप भी यहां हैं, मैं भी यहीं हूं और जनता भी है। आप मेरे सवालों का जवाब दे दीजिए, मैं आपके सवालों का जवाब दे दूं, फैसला यहीं हो जाएगा’। इंदिरा गांधी इस पर मुस्कुरा कर चली गई थीं।
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1978 के उपचुनाव में कांग्रेस ने प्रेमदत्त तिवारी को मैदान में उतारा था तो उनके सामने जनता पार्टी से लियाकत हुसैन सदन में पहुंचने की दावेदारी कर रहे थे। सीट को अपने पक्ष में करने के लिए इंदिरा गांधी ने जिले मेें डेरा डाल दिया था और महिला वोटरों पर वह विशेष फोकस कर रही थीं। इस दौरान जनता पार्टी का चेहरा बनकर हरियाणा सरकार की मंत्री रहीं सुषमा स्वराज भी यहां आई थीं। विकास भवन के सेवानिवृत्त कर्मचारी रमेश मोहन शुक्ला ने बताया कि आते ही सुषमा स्वराज शहर के सैय्यदवाड़ा स्थित पार्टी प्रत्याशी रहे लियाकत हुसैन के कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने सबसे पहले पूछा कि मुझे जनसभा के लिए कहां जाना है। इस पर चुनाव प्रभारी रहे सिंचाई राज्यमंत्री छोटेलाल यादव ने उनसे थोड़ी देर आराम करने को कहा था। जिस पर उन्होंने दो टूक जवाब दिया था। मैं यहां काम करने आई हूं, आराम करने नहीं। इसके बाद सुषमा जिले में हर उस जगह गईं, जहां-जहां इंदिरा
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गांधी ने जनसभा की थी। कार्य व दायित्व के प्रति उनके समर्पण को देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए थे। सुषमा स्वराज यहां तीन दिन तक सर्किट हाउस में रुकी रहीं और इस दौरान उन्होंने खागा, अमौली, खजुहा और बिंदकी में कई जनसभाएं कीं। मलवां की जनसभा में उन्होंने महिलाओं से कहा था कि इंदिरा गांधी महिला होने के नाते महिलाओं से वोट मांग रही हैं। जबकि इमरजेंसी लगाकर उन्होंने देशभर की माताओं के बच्चों को जेल भिजवा दिया था। सुषमा स्वराज की तर्कपूर्ण बातों और उनके ओजस्वी भाषणों का यह असर था कि उस दौर की आयरन लेडी के रूप में जानी जाने वाली इंदिरा गांधी अपनी सीट नहीं बचा पाईं थीं और कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर जनता पार्टी के प्रत्याशी लियाकत हुसैन ने जीत का परचम लहराया था।
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