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बौंडर गांव में पेयजल का संकट
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शोपीस बनी बौंडर की पानी टंकी। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। असोथर क्षेत्र के बौंडर गांव बनी पानी टंकी चार साल से बंद है। वाटर लाइन क्षतिग्रस्त होने से जलनिगम ने यहां ताला डाल दिया। करीब छह हजार की आबादी के सामने पेयजल का संकट बना हुआ है। लोग हैंडपंप के सहारे पीने के पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। बौंडर क्षेत्र के आसपास के गांवों का पानी खारा है। कुएं और हैंडपंपों के पानी से दाल पकाना मुश्किल होता है।
क्षेत्र की समस्या को देखते हुए 2008 में जल निगम ने ग्राम समूह योजना बनाई थी, जिसमें 2010 में पानी टंकी बनाई गई और जलापूर्ति शुरू हो गई। इससे बौंडर, कौंदर, सराय गांव की करीब 20 हजार की आबादी को पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन घटिया वाटरलाइन कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो गईं। तीन साल में ही जलापूर्ति सिर्फ बौंडर तक सीमित रह गई, जिसकी आबादी करीब छह हजार है। 2017 में वाटर लाइनें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं।
जल निगम ने पानी टंकी परिसर के मुख्य गेट पर ताला डाल दिया। चार साल से यहां के लोग हैंडपंप के खारे पानी के सहारे प्यास बुझा रहे हैं। ग्रामीणों ने टंकी को जल्द शुरू कराने की मांग की है। अवर अभियंता जलनिगम अनिरुद्घ ने बताया कि वाटर लाइनें ध्वस्त होने के कारण टंकी से जलापूर्ति संभव नहीं है। बौंडर में नई वाटर लाइनें बिछाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। फिलहाल अभी बजट नहीं मिला है।
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ग्रामीण रामजीत का कहना है कि बंद होने से पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है। गांव में लगे कुछ डीप बोरिंग वाले हैंडपंप के पानी से जरूरत को पूरा किया जाता है। सुबह, शाम हैंडपंपों के पास भीड़ लग जाती है।
गोलू ने कहा कि सर्दी और बारिश में तो किसी तरह काम चल जाता है, लेकिन गर्मी में पानी की खपत बढ़ जाती है। गर्मी में ही पीने के पानी के लिए खासी दिक्कत उठानी पड़ती है। खराब पानी टंकी पर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है।
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क्षेत्र की समस्या को देखते हुए 2008 में जल निगम ने ग्राम समूह योजना बनाई थी, जिसमें 2010 में पानी टंकी बनाई गई और जलापूर्ति शुरू हो गई। इससे बौंडर, कौंदर, सराय गांव की करीब 20 हजार की आबादी को पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन घटिया वाटरलाइन कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो गईं। तीन साल में ही जलापूर्ति सिर्फ बौंडर तक सीमित रह गई, जिसकी आबादी करीब छह हजार है। 2017 में वाटर लाइनें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं।
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जल निगम ने पानी टंकी परिसर के मुख्य गेट पर ताला डाल दिया। चार साल से यहां के लोग हैंडपंप के खारे पानी के सहारे प्यास बुझा रहे हैं। ग्रामीणों ने टंकी को जल्द शुरू कराने की मांग की है। अवर अभियंता जलनिगम अनिरुद्घ ने बताया कि वाटर लाइनें ध्वस्त होने के कारण टंकी से जलापूर्ति संभव नहीं है। बौंडर में नई वाटर लाइनें बिछाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। फिलहाल अभी बजट नहीं मिला है।
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ग्रामीण रामजीत का कहना है कि बंद होने से पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है। गांव में लगे कुछ डीप बोरिंग वाले हैंडपंप के पानी से जरूरत को पूरा किया जाता है। सुबह, शाम हैंडपंपों के पास भीड़ लग जाती है।
गोलू ने कहा कि सर्दी और बारिश में तो किसी तरह काम चल जाता है, लेकिन गर्मी में पानी की खपत बढ़ जाती है। गर्मी में ही पीने के पानी के लिए खासी दिक्कत उठानी पड़ती है। खराब पानी टंकी पर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है।