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आखिरी अशरा आज से, खूब करें इबादत
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फतेहपुर। रमजान का आखिरी अशरा जुमा शुक्रवार से शुरू हो रहा है। इस निजात के अशरे में खुदा की खूब इबादत कर मगफितर की दुआएं मांगी जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि रमजान के इस अशरे में अल्लाह अपने बंदे की हर जायज दुआ कुबूल करता है और गुनाह माफ करता है।
काजी ए शहर फरीद उद्दीन कादरी ने रमजान की अहमियत बताते हुए इसे पाक महीना करार दिया । उन्होंने कहा कि जो कोई बंदा इस अशरे में अपने गुनाहों की माफी नहीं मांग पा रहा उससे बदनसीब कोई और नहीं हो सकता। रमजान के इस अशरे में अल्लाह के बंदे को चाहिए कि वह खूब इबादत करे। हैसियत मंद को चाहिए कि वह गरीबों को जकात दे। जिस तरह रोजा रखने से इंसान की रूह पाक जाती है, वैसे ही जकात देने से उस व्यक्ति का माल पाक हो जाता है।
कादरी ने बताया कि अल्लाह ताला ने इस अशरे में शबे कद्र रात बनाकर इसे फजीलत वाली रात बनाई है । इबादत कर इंसान दीनी और दुनियावी जिंदगी में कामयाबी के रास्ते पर बढ़ सकता है। अल्लाह ताला ने फरमाया है कि ईद का पहला हक पड़ोसी का होता है। लिहाजा इस बात को ध्यान में रखकर पड़ोस के यतीम और गरीब बच्चों का ईद के दिन ख्याल रखें। काजी ने आवाम से गुजारिश की है महामारी के इस दौर में ईद को सादगी से मनाएं । उन्होंने पांचों वक्त की नमाज और तरावीह घरों में पढ़ने की बात कही ।
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काजी ए शहर फरीद उद्दीन कादरी ने रमजान की अहमियत बताते हुए इसे पाक महीना करार दिया । उन्होंने कहा कि जो कोई बंदा इस अशरे में अपने गुनाहों की माफी नहीं मांग पा रहा उससे बदनसीब कोई और नहीं हो सकता। रमजान के इस अशरे में अल्लाह के बंदे को चाहिए कि वह खूब इबादत करे। हैसियत मंद को चाहिए कि वह गरीबों को जकात दे। जिस तरह रोजा रखने से इंसान की रूह पाक जाती है, वैसे ही जकात देने से उस व्यक्ति का माल पाक हो जाता है।
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कादरी ने बताया कि अल्लाह ताला ने इस अशरे में शबे कद्र रात बनाकर इसे फजीलत वाली रात बनाई है । इबादत कर इंसान दीनी और दुनियावी जिंदगी में कामयाबी के रास्ते पर बढ़ सकता है। अल्लाह ताला ने फरमाया है कि ईद का पहला हक पड़ोसी का होता है। लिहाजा इस बात को ध्यान में रखकर पड़ोस के यतीम और गरीब बच्चों का ईद के दिन ख्याल रखें। काजी ने आवाम से गुजारिश की है महामारी के इस दौर में ईद को सादगी से मनाएं । उन्होंने पांचों वक्त की नमाज और तरावीह घरों में पढ़ने की बात कही ।
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