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शवदाह गृह निर्माण को चिन्हित थी जमीन, वह कहां गई
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किशनपुर। जनवरी 2019 से नवंबर 2020 के बीच छह आरटीआई दाखिल कर नगर पंचायत से शवदाह गृह निर्माण की प्रगति पूछी गई और हर बार अफसर जमीन मिलने और जल्द निर्माण शुरू होने का दावा करते रहे। जबकि हकीकत यह हैै कि अभी तक न तो जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की गई और न ही निर्माण के नाम पर एक ईंट ही रखी गई। आरटीआई में दिए गए जवाब बताते हैं कि अफसरों ने किस तरह फर्जी दावे कर खुद की लापरवाही पर पर्दा डालने का प्रयास किया।
किशनपुर में शवदाह गृह और एमआरएफ सेेंटर बनाने के लिए शासन ने 2015-16 में स्वीकृति दी थी। इसके लिए जमीन तलाशने की जिम्मेदारी नगर पंचायत किशनपुर के पास थी। लेकिन नगर पंचायत के अफसरों ने पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
उमाशंकर पुत्र चुन्नीलाल निवासी किशनपुर ने 19 जनवरी 2020 को नगर पंचायत से शवदाह गृह और एमआरएफ सेंटर निर्माण से जुड़ी प्रगति जानने के लिए आरटीआई दाखिल की। जिसमें ईओ की ओर से दावा किया गया कि शवदाह गृह के लिए जमीन मिल चुकी है। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में कुल छह आरटीआई दाखिल हुईं और हर बार जमीन मिलने और जल्द निर्माण शुरू कराने की
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बात कही गई। एक बार लॉकडाउन के बाद काम शुरू करने की जानकारी दी गई। हद तो तब हो गई जब 11 नवंबर 2020 को जारी आरटीआई के जवाब में नगर पंचायत ने शवदाह गृह निर्माण के लिए डीएम से स्वीकृति मांगने का दावा किया। जबकि हकीकत में उस वक्त तक न तो नगर पंचायत के पास जमीन थी और न ही निर्माण की कोई तैयारी ही की गई थी।
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इनसेट-
दाखिल की गईं आरटीआई और मिले जवाबों पर एक नजर
- उमाशंकर ने पहली आरटीआई 17 जनवरी 2019 को दाखिल की। 28 जनवरी को जवाब आया कि शवदाह गृह की जमीन मिल चुकी है। रास्ते में बबूल व कटीली झाड़ियां हैं। उन्हें हटाकर कार्य शुरू होगा।
- दूसरी आरटीआई 23 जनवरी 2020 को दाखिल की। आठ फरवरी को जवाब आया कि शवदाह गृह की जमीन मिल चुकी है। जल्द ही काम शुरू होगा।
- तीसरी आरटीआई 27 फरवरी 2020 को दाखिल हुई। छह मार्च को जवाब आया कि जमीन की पैमाइश हो चुकी है और जल्द ही ई-टेंडर किए जाएंगे।
- चौथी आरटीआई 28 मार्च 2020 को दाखिल र्हुई। 27 अप्रैल को जवाब आया कि लॉकडाउन के बाद निर्माण शुरू कराया जाएगा।
- पांचवीं आरटीआई नौ अगस्त 2020 को दाखिल र्हुई। 27 अगस्त को जवाब आया कि एमआरएफ सेंटर के लिए जमीन मिल चुकी है।
- छठवीं आरटीआई 11 नवंबर 2020 को दाखिल र्हुई। 19 नवंबर को जवाब आया कि शवदाह गृह निर्माण के लिए डीएम से स्वीकृति मांगी गई है।
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स्पीकअप
फोटो- 11-जयकांत सिंह
नदी किनारे होता है अंतिम संस्कार
एकडला निवासी व यमुना नदी मित्र समिति के सचिव जयकांत सिंह कहते हैं कि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार नदी किनारे शवदाह होता है। किशनपुर के यमुना घाट पर कई क्षेत्रों के लोग आते हैं। शवदाह कस्बे के आसपास बने तो उपयोगी होगा। अमनी गांव में बनाने से कोई फायदा नहीं है। क्योंकि वहां के लोग खुद किशनपुर आते हैं।
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फोटो-12- अमर सिंह
तीन किमी है यमुना घाट तो अमनी क्यों जाएं
इटोलीपुर गांव निवासी अमर सिंह कहते हैं कि उनके गांव के लोग तीन किमी दूर किशनपुर घाट अंतिम संस्कार के लिए जाते हैं। अगर शवदाह गृह अमनी में बनता है तो उन्हें सात किमी जाना पड़ेगा। करीब 10 गांव के लोगों के सामने यह समस्या खड़ी होगी। ऐसे में वह लोग अमनी क्यों जाएंगे। अमनी में शवदाह गृह बनाना समझ से परे है।
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फोटो- 13-उमाशंकर
किशनपुर के उमाशंकर बताते हैं कि एमआरएफ सेंटर व शवदाह गृह को लेकर उन्होंने वर्ष 2020 में लगातार पत्राचार किए और ऑनलाइन शिकायतें कीं। अधिशाषी अधिकारी द्वारा हर बार किशनपुर में ही निर्माण कराने की सूचनाएं लिखित रूप से दी गईं। बावजूद इसके अब इसे अमनी गांव ले जाया जा रहा है। जो बेतुका फैसला है।
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फोटो- 14-आकाश शुक्ला
किशनपुर के आकाश शुक्ला बताते हैं कि यहां विकास कार्यों में जमकर खेल हुआ हैं। इसकी जांचें भी चल रही हैं। करोड़ रुपये की लागत से होने वाले निर्माण इसी खेल को आगे भी जारी रखने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। पांच किलोमीटर दूर निर्माण होगा तो कोई देखने वाला भी नहीं होगा। अमनी गांव में शवदाह गृह नहीं बनाना चाहिए।
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फोटो- 10- शवदाह गृह को लेकर एसडीएम खागा को ज्ञापन देते सुनील शुक्ला व रामराज सिंह। संवाद
एसडीएम से की यमुना किनारे शवदाह गृह बनाने की मांग
क्रासर
ज्ञापन सौंपकर बताई नगर पंचायत की हकीकत
संवाद न्यूज एजेंसी
खागा। शवदाह गृह को अमनी गांव में बनाने के निर्णय से किशनपुर नगर पंचायत के अफसरों ने एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। इस मामले में शनिवार को किशनपुर के कुछ लोग एसडीएम से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
किशनपुर के रहने वाले सुनील शुक्ला व रामराज सिंह खागा एसडीएम आशीष कुमार से मिले। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर बताया कि 27 मार्च 2021 को शवदाह गृह निर्माण के लिए 109.80 लाख रुपये स्वीकृत करते हुए शासन ने पहली किस्त में 19 लाख रुपये और 28 मार्च को दूसरी किस्त में 35.90 लाख रुपये जारी कर दिए थे। इसी तरह से लाइट, नाली, सड़क आदि के लिए 50 लाख रुपये और अवमुक्त किए गए।
वर्ष 2017 में आशाराम नाम के व्यक्ति द्वारा शवदाह गृह के लिए जमीन दान में दी गई थी। बावजूद इसके यह कार्य नहीं कराया जा सका है। अब शवदाह गृह को अमनी में बनाए जाने का प्रस्ताव शुरू किया गया है, जो गलत है। उन्होंने इस कार्य पर रोक लगाकर इसका निर्माण किशनपुर में यमुना नदी किनारे कराने की मांग की है। जिससे क्षेत्र के लोग इसका प्रयोग कर सकें। आरोप लगाया कि नगर पंचायत किशनपुर कमीशनबाजी के चक्कर में इसे अमनी गांव में बनवा रहा है। ताकि वह मनमानी कर सके।
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किशनपुर में शवदाह गृह और एमआरएफ सेेंटर बनाने के लिए शासन ने 2015-16 में स्वीकृति दी थी। इसके लिए जमीन तलाशने की जिम्मेदारी नगर पंचायत किशनपुर के पास थी। लेकिन नगर पंचायत के अफसरों ने पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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उमाशंकर पुत्र चुन्नीलाल निवासी किशनपुर ने 19 जनवरी 2020 को नगर पंचायत से शवदाह गृह और एमआरएफ सेंटर निर्माण से जुड़ी प्रगति जानने के लिए आरटीआई दाखिल की। जिसमें ईओ की ओर से दावा किया गया कि शवदाह गृह के लिए जमीन मिल चुकी है। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में कुल छह आरटीआई दाखिल हुईं और हर बार जमीन मिलने और जल्द निर्माण शुरू कराने की
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बात कही गई। एक बार लॉकडाउन के बाद काम शुरू करने की जानकारी दी गई। हद तो तब हो गई जब 11 नवंबर 2020 को जारी आरटीआई के जवाब में नगर पंचायत ने शवदाह गृह निर्माण के लिए डीएम से स्वीकृति मांगने का दावा किया। जबकि हकीकत में उस वक्त तक न तो नगर पंचायत के पास जमीन थी और न ही निर्माण की कोई तैयारी ही की गई थी।
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इनसेट-
दाखिल की गईं आरटीआई और मिले जवाबों पर एक नजर
- उमाशंकर ने पहली आरटीआई 17 जनवरी 2019 को दाखिल की। 28 जनवरी को जवाब आया कि शवदाह गृह की जमीन मिल चुकी है। रास्ते में बबूल व कटीली झाड़ियां हैं। उन्हें हटाकर कार्य शुरू होगा।
- दूसरी आरटीआई 23 जनवरी 2020 को दाखिल की। आठ फरवरी को जवाब आया कि शवदाह गृह की जमीन मिल चुकी है। जल्द ही काम शुरू होगा।
- तीसरी आरटीआई 27 फरवरी 2020 को दाखिल हुई। छह मार्च को जवाब आया कि जमीन की पैमाइश हो चुकी है और जल्द ही ई-टेंडर किए जाएंगे।
- चौथी आरटीआई 28 मार्च 2020 को दाखिल र्हुई। 27 अप्रैल को जवाब आया कि लॉकडाउन के बाद निर्माण शुरू कराया जाएगा।
- पांचवीं आरटीआई नौ अगस्त 2020 को दाखिल र्हुई। 27 अगस्त को जवाब आया कि एमआरएफ सेंटर के लिए जमीन मिल चुकी है।
- छठवीं आरटीआई 11 नवंबर 2020 को दाखिल र्हुई। 19 नवंबर को जवाब आया कि शवदाह गृह निर्माण के लिए डीएम से स्वीकृति मांगी गई है।
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स्पीकअप
फोटो- 11-जयकांत सिंह
नदी किनारे होता है अंतिम संस्कार
एकडला निवासी व यमुना नदी मित्र समिति के सचिव जयकांत सिंह कहते हैं कि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार नदी किनारे शवदाह होता है। किशनपुर के यमुना घाट पर कई क्षेत्रों के लोग आते हैं। शवदाह कस्बे के आसपास बने तो उपयोगी होगा। अमनी गांव में बनाने से कोई फायदा नहीं है। क्योंकि वहां के लोग खुद किशनपुर आते हैं।
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फोटो-12- अमर सिंह
तीन किमी है यमुना घाट तो अमनी क्यों जाएं
इटोलीपुर गांव निवासी अमर सिंह कहते हैं कि उनके गांव के लोग तीन किमी दूर किशनपुर घाट अंतिम संस्कार के लिए जाते हैं। अगर शवदाह गृह अमनी में बनता है तो उन्हें सात किमी जाना पड़ेगा। करीब 10 गांव के लोगों के सामने यह समस्या खड़ी होगी। ऐसे में वह लोग अमनी क्यों जाएंगे। अमनी में शवदाह गृह बनाना समझ से परे है।
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फोटो- 13-उमाशंकर
किशनपुर के उमाशंकर बताते हैं कि एमआरएफ सेंटर व शवदाह गृह को लेकर उन्होंने वर्ष 2020 में लगातार पत्राचार किए और ऑनलाइन शिकायतें कीं। अधिशाषी अधिकारी द्वारा हर बार किशनपुर में ही निर्माण कराने की सूचनाएं लिखित रूप से दी गईं। बावजूद इसके अब इसे अमनी गांव ले जाया जा रहा है। जो बेतुका फैसला है।
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फोटो- 14-आकाश शुक्ला
किशनपुर के आकाश शुक्ला बताते हैं कि यहां विकास कार्यों में जमकर खेल हुआ हैं। इसकी जांचें भी चल रही हैं। करोड़ रुपये की लागत से होने वाले निर्माण इसी खेल को आगे भी जारी रखने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। पांच किलोमीटर दूर निर्माण होगा तो कोई देखने वाला भी नहीं होगा। अमनी गांव में शवदाह गृह नहीं बनाना चाहिए।
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फोटो- 10- शवदाह गृह को लेकर एसडीएम खागा को ज्ञापन देते सुनील शुक्ला व रामराज सिंह। संवाद
एसडीएम से की यमुना किनारे शवदाह गृह बनाने की मांग
क्रासर
ज्ञापन सौंपकर बताई नगर पंचायत की हकीकत
संवाद न्यूज एजेंसी
खागा। शवदाह गृह को अमनी गांव में बनाने के निर्णय से किशनपुर नगर पंचायत के अफसरों ने एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। इस मामले में शनिवार को किशनपुर के कुछ लोग एसडीएम से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
किशनपुर के रहने वाले सुनील शुक्ला व रामराज सिंह खागा एसडीएम आशीष कुमार से मिले। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर बताया कि 27 मार्च 2021 को शवदाह गृह निर्माण के लिए 109.80 लाख रुपये स्वीकृत करते हुए शासन ने पहली किस्त में 19 लाख रुपये और 28 मार्च को दूसरी किस्त में 35.90 लाख रुपये जारी कर दिए थे। इसी तरह से लाइट, नाली, सड़क आदि के लिए 50 लाख रुपये और अवमुक्त किए गए।
वर्ष 2017 में आशाराम नाम के व्यक्ति द्वारा शवदाह गृह के लिए जमीन दान में दी गई थी। बावजूद इसके यह कार्य नहीं कराया जा सका है। अब शवदाह गृह को अमनी में बनाए जाने का प्रस्ताव शुरू किया गया है, जो गलत है। उन्होंने इस कार्य पर रोक लगाकर इसका निर्माण किशनपुर में यमुना नदी किनारे कराने की मांग की है। जिससे क्षेत्र के लोग इसका प्रयोग कर सकें। आरोप लगाया कि नगर पंचायत किशनपुर कमीशनबाजी के चक्कर में इसे अमनी गांव में बनवा रहा है। ताकि वह मनमानी कर सके।
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